नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आज उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अगले चरण के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 21 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करके देशभर में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। ये समझौता ज्ञापन विमानन अवसंरचना के विकास और कम सेवा वाले तथा बिना हवाई संपर्क वाले क्षेत्रों तक हवाई संपर्क के विस्तार के लिए केंद्र-राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित द अशोक में आयोजित समारोह का उद्घाटन नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने किया। इस अवसर पर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव श्री समीर कुमार सिन्हा, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अध्यक्ष श्री विपिन कुमार और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
श्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा, “इन समझौता ज्ञापनों के साथ टीम भारत देश के क्षेत्रीय विमानन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एकजुट होकर काम कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित राज्य, विकसित भारत की नींव है और इस यात्रा में प्रत्येक राज्य समान भागीदार है।”
उड़ान के प्रभाव के बारे में मंत्री ने कहा, “शुरू होने के बाद से उड़ान ने 687 मार्गों और 95 एयरोड्रोम को परिचालन में ला दिया है तथा 3.66 लाख से अधिक उड़ानों के माध्यम से लगभग 1.71 करोड़ यात्रियों को यात्रा कराई है। लेकिन मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े इसके प्रभाव से जुड़े हैं। विमानन क्षेत्र में रोजगार 2014 में लगभग 30 लाख से बढ़कर आज करीब 77 लाख हो गया है और 2040 तक इसके 2.5 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में तेजू और बिहार में पूर्णिया जैसे हवाई अड्डे, जो कभी सैकड़ों किलोमीटर तक हवाई संपर्क से कटे हुए थे, आज क्षेत्रीय समृद्धि के वाहक बन रहे हैं।”
उड़ान के अगले चरण का शुभारंभ 4 जुलाई 2026 को जोधपुर में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए उद्घाटन और 16 जुलाई 2026 को आयोजित उड़ान कार्यशाला पर आधारित है। इस कार्यशाला में नागरिक उड्डयन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने योजना के अगले चरण की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया था।
श्री राम मोहन नायडू ने आगे कहा, “संशोधित उड़ान चार स्तंभों पर आधारित है; यात्रियों के लिए वहनीयता, परिचालन की सततता, परियोजनाओं के लिए पारदर्शी चैलेंज मोड ढांचा और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना। साथ मिलकर हम ‘मेड इन इंडिया’ नागरिक विमानों की व्यापक परिकल्पना की दिशा में एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं। उड़ान का यह अगला चरण हमें इसी दिशा में आगे ले जा रहा है।”
आज के शुभारंभ के साथ उड़ान का अगला चरण नीति और हितधारक परामर्श से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की दिशा में अग्रसर हो गया है। इसमें केंद्र-राज्य/केंद्र शासित प्रदेश साझेदारी को मजबूत करने, विमानन अवसंरचना का निर्माण करने और क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार करने पर तीन प्रमुख स्तरों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इस अवसर पर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सक्षम नेतृत्व में उड़ान योजना ने 2016 से अब तक लंबी यात्रा तय की है और पूरे देश में क्षेत्रीय तथा दूरदराज के क्षेत्रों के हवाई संपर्क का विस्तार किया है। अब संशोधित उड़ान के तहत हम अगले दस वर्षों में 120 नए गंतव्यों और 4 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों को जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। 20 से अधिक राज्यों के साथ आने से हम इस यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं और भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक नया अध्याय खोल रहे हैं।”
उड़ान योजना के तहत कार्यान्वयन एजेंसी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) सहित नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच कुल 21 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौता ज्ञापनों के माध्यम से केंद्र, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और एएआई के बीच समन्वित कार्रवाई के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित किया गया है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संपर्क संबंधी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप विमानन परिसंपत्तियों की पहचान, विकास और परिचालन सुनिश्चित किया जाएगा।
नागरिक उड्डयन मंत्री ने एयरोड्रोम विकास के लिए चैलेंज मोड पोर्टल का भी शुभारंभ किया और उड़ान के अगले चरण की मार्ग बोली प्रक्रिया संबंधी योजना दस्तावेज जारी किया।
चैलेंज मोड के तहत राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन अब समर्पित पोर्टल के माध्यम से उड़ान के अगले चरण के तहत विकास के लिए हवाई पट्टियों और हेलीपैडों को नामित कर सकेंगे। इससे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को विमानन संपर्क की संभावनाओं वाले स्थानों की सक्रिय रूप से पहचान करने और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर विमानन अवसंरचना के निर्माण तथा उन्नयन में सुविधा होगी।
मार्ग बोली प्रक्रिया में विमानन कंपनियों को चिन्हित उड़ान मार्गों के लिए बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा, जिससे मार्गों और परिचालकों का पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी चयन सुनिश्चित हो सकेगा। यह प्रक्रिया बिना हवाई संपर्क वाले और कम हवाई संपर्क वाले क्षेत्रों तक हवाई सेवाओं के विस्तार, पहुंच और आवागमन में सुधार तथा व्यापक आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
कार्यक्रम में उड़ान के अगले चरण पर एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें एयरोड्रोम विकास के लिए चैलेंज मोड और उड़ान मार्गों के चयन के लिए आगामी बोली प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इस सत्र में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, एएआई, विमानन कंपनियों और नागरिक उड्डयन क्षेत्र के अन्य हितधारकों को कार्यान्वयन ढांचे और आगे की दिशा पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला।
उड़ान का अगला चरण योजना के तहत हासिल उपलब्धियों को आगे बढ़ाने और देशभर में विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने का प्रयास करता है, ताकि हवाई संपर्क और विमानन अवसंरचना के लाभ अधिक से अधिक क्षेत्रों, समुदायों और नागरिकों तक पहुंच सकें।
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