केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की राजकीय यात्रा पर आए लिकटेंस्टाइन के राजकुमार एलोइस से शिष्टाचार भेंट की। इस बैठक में भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते (टीईपीए) के तहत आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश के अवसरों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
पीयूष गोयल ने भारत के मजबूत आर्थिक बुनियाद ढांचे, निरंतर जारी सुधारों की प्रक्रिया और विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार को रेखांकित किया, जो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए व्यापक अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कारोबार सुगमता में सुधार, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल शासन को मजबूत करने तथा एक पूर्वानुमान योग्य, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल तैयार करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों पर जोर दिया।
भारत में निवेश के आंकड़े उसकी आर्थिक संभावनाओं के प्रति बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह 843 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2025-26 में एफडीआई का प्रवाह रिकॉर्ड 94.53 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो निवेश गंतव्य के रूप में भारत के बढ़ते आकर्षण को रेखांकित करता है। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से विकसित हो रहा है। देश में 2.50 लाख स्टार्टअप 770 से अधिक जिलों और 56 उद्योग क्षेत्रों में 25.42 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने में योगदान दे रहे हैं। इनमें से 52 प्रतिशत स्टार्टअप महानगरों से बाहर स्थित शहरों में हैं।
पीयूष गोयल ने भारत-ईएफटीए टीईपीए से मिलने वाले अवसरों को रेखांकित किया। यह समझौता 1 अक्टूबर, 2025 को लागू हुआ था। इसके तहत ईएफटीए देशों ने 15 वर्षों में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने में मदद करने का लक्ष्य रखा है। यह ढांचा मजबूत आर्थिक संबंधों को दीर्घकालिक निवेश, उत्पादन क्षमता, प्रौद्योगिकी साझेदारी और भारत में रोजगार सृजन के ठोस अवसरों में बदलने का मार्ग प्रशस्त करता है।
पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को एक बड़े और तेजी से बढ़ते घरेलू बाजार, कुशल कार्यबल, प्रतिस्पर्धी विनिर्माण इकोसिस्टम तथा विस्तारित वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं तक पहुंच जैसे लाभ प्रदान करता है। उन्होंने लिकटेंस्टाइन की कंपनियों को विनिर्माण साझेदारियों, प्रौद्योगिकी सहयोग, अनुसंधान एवं विकास तथा भारतीय आपूर्तिकर्ताओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के साथ गहरे जुड़ाव सहित भारत में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
बैठक में सटीक इंजीनियरिंग, उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक प्रौद्योगिकियों और नवाचार जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इन क्षेत्रों में व्यापक सहयोग से प्रौद्योगिकी अपनाने की प्रक्रिया को गति मिल सकती है, औद्योगिक संबंध मजबूत हो सकते हैं तथा दोनों देशों के व्यवसायों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी अवसर सृजित हो सकते हैं।
7 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। यह सम्मेलन भारत-ईएफटीए टीईपीए के एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर आयोजित हुआ। लिकटेंस्टाइन के गृह मामलों, अर्थव्यवस्था एवं खेल मंत्री ह्यूबर्ट ब्यूशेल ने लिकटेंस्टाइन के कारोबार प्रतिनिधियों के साथ इस सम्मेलन में भाग लिया था।
इस बैठक में भारत-ईएफटीए टीईपीए का लाभ उठाकर निवेश प्रवाह को मजबूत करने और वाणिज्यिक संबंधों को और गहरा बनाने के साझा संकल्प की पुष्टि की गई। भारत का मुख्य उद्देश्य इस समझौते से उत्पन्न अवसरों को निवेश में वृद्धि, विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार, प्रौद्योगिकी सहयोग और गुणवत्तापूर्ण रोजगार सहित ठोस आर्थिक परिणामों में बदलना है।
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