CSIR प्रयोगशालाएं नवाचार और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ा रही हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत की औद्योगिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में तेजी लाने पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने तिरुपति में आयोजित एक बैठक में चेन्नई और हैदराबाद स्थित सीएसआईआर प्रयोगशालाओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों और प्रौद्योगिकीय योगदान की समीक्षा करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए मजबूत उद्योग साझेदारी और प्रयोगशाला अनुसंधान को सामाजिक और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों में तेजी से परिवर्तित करना महत्वपूर्ण है।
समीक्षा बैठक में प्रयोगशालाओं की हाल की उपलब्धियों का आकलन करने और भारत सरकार द्वारा देश के वैज्ञानिक और नवाचार इको-सिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए दिए जा रहे निरंतर प्रोत्साहन के संदर्भ में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ उनके तालमेल का मूल्यांकन करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशकों ने अपनी प्रमुख उपलब्धियों को प्रस्तुत किया और प्रभावशाली अनुसंधान, नवाचार और उद्योग सहयोग के लिए भविष्य के तरीकों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं के निदेशकों – सीएसआईआर-केंद्रीय विद्युतरासायनिक अनुसंधान संस्थान (सीईसीआरआई), कराईकुडी; सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई), हैदराबाद; सीएसआईआर-केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान (सीएलआरआई), चेन्नई; सीएसआईआर-संरचनात्मक अभियांत्रिकी अनुसंधान केंद्र (एसईआरसी), चेन्नई; सीएसआईआर-कोशिकीय और आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीसीएमबी), हैदराबाद और सीएसआईआर-भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी), हैदराबाद ने बैठक में भाग लिया और अपनी प्रमुख उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं को प्रस्तुत किया।
डॉ. सिंह को सामूहिक रूप से जानकारी देते हुए, सीएसआईआर-सीईसीआरआई के निदेशक डॉ. के. रामेशा ने इलेक्ट्रोकेमिकल प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ ऊर्जा में सीएसआईआर-सीईसीआरआई के कार्यों को रेखांकित किया, जिसमें सोडियम-आयन बैटरी, प्रयुक्त बैटरियों से धातु पुनर्प्राप्ति, हरित हाइड्रोजन उत्पादन और कार्बन-डाईऑक्साइड कैप्चर में स्वदेशी प्रयास शामिल हैं। सीएसआईआर-एनजीआरआई के निदेशक डॉ. प्रकाश ने लद्दाख में भूभौतिकीय अंतर्दृष्टि प्रदान करने, भूतापीय ऊर्जा अन्वेषण, महत्वपूर्ण खनिजों के मानचित्रण और भारतीय प्लेट के तनाव मानचित्र के विकास के साथ-साथ हिमालयी भू-खतरों पर मिशन-मोड कार्यक्रमों और एसएलबीसी सुरंग परियोजना के लिए हेलीकॉप्टर सर्वेक्षणों के लिए सीएसआईआर-एनजीआरआई की पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की। सीएसआईआर-सीएलआरआई के निदेशक डॉ. पी. थानिकैवेलन ने स्वदेशी ‘भा’ फुटवियर साइजिंग सिस्टम के विकास, उद्योग को हस्तांतरित उन्नत रक्षा दस्ताने, भारतीय वायु सेना के लिए स्पर्श-संवेदनशील दस्ताने, अखिल भारतीय चाल अध्ययन और चमड़े के कचरे को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए सीएसआईआर-सीएलआरआई द्वारा किए गए कार्यों को प्रस्तुत किया।
सीएसआईआर-एसईआरसी के निदेशक डॉ. एन. आनंदवल्ली ने अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना, संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी, टिकाऊ सामग्री और आपदा-प्रतिरोधी निर्माण प्रौद्योगिकियों, जिनमें ईआरएस, विस्फोट-प्रतिरोधी एलएससीसी और बुलेट-प्रूफ सुरक्षा बूथ शामिल हैं, पर सीएसआईआर-एसईआरसी के फोकस का विस्तृत विवरण दिया। सीएसआईआर-सीसीएमबी के निदेशक डॉ. विनय नंदीकुरी ने मानव स्वास्थ्य, पशु कल्याण और पादप स्वास्थ्य को शामिल करते हुए जीनोमिक्स, निदान और जैव प्रौद्योगिकी में सीएसआईआर-सीसीएमबी की उपलब्धियों को रेखांकित किया। सीएसआईआर-आईआईसीटी के निदेशक डॉ. डी. श्रीनिवास रेड्डी ने फार्मास्यूटिकल्स, वैक्सीन एडज्वेंट, एचएफओ जैसे नई पीढ़ी के रेफ्रिजरेंट में सीएसआईआर-आईआईसीटी की प्रगति और अनुवाद संबंधी अनुसंधान तथा उद्योग सहयोग पर इसके द्वारा जोर दिए जाने के बारे में जानकारी दी।
सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय विकास के लिए आवश्यकता-आधारित अनुसंधान और विज्ञान-प्रेरित नवाचार के महत्व पर बल दिया। उन्होंने मजबूत उद्योग साझेदारी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में तेजी लाने और अनुसंधान के सामाजिक अनुप्रयोगों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि सीएसआईआर प्रयोगशालाओं को सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण के लिए उद्योगों द्वारा उचित मान्यता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।





