भारत

सुरक्षा बलों की युद्धक तत्परता बढ़ाने के लिए डीएसी ने 3.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 12 फरवरी, 2026 को लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्य पर सेवाओं के विभिन्न प्रस्तावों के लिए आवश्यकता स्वीकृति (एओएन) प्रदान की। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए, मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) {राफेल}, लड़ाकू मिसाइलों और एयर-शिप आधारित उच्च ऊंचाई वाले छद्म उपग्रह (एएस-एचएपीएस) की खरीद के लिए एओएन को मंजूरी दी गई।

एमआरएफए की खरीद से युद्ध की सभी स्थितियों में हवाई वर्चस्व स्थापित करने की क्षमता बढ़ेगी और लंबी दूरी के आक्रामक हमलों के साथ वायु सेना की निवारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। खरीदी जाने वाली अधिकांश एमआरएफए मिसाइलों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। ये लड़ाकू मिसाइलें गहरी मारक क्षमता और अत्यधिक सटीकता के साथ जमीनी हमले की क्षमता को बढ़ाएंगी। एएस-एचएपीएस का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए निरंतर खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही, इलेक्ट्रॉनिक खुफिया, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग के लिए किया जाएगा।

भारतीय सेना को विभव (एंटी-टैंक माइंस) की खरीद और बख्तरबंद रिकवरी वाहनों (एआरवी), टी-72 टैंकों और पैदल सेना लड़ाकू वाहनों (बीएमपी-II) के वाहन प्लेटफार्मों के नवीनीकरण के लिए मंजूरी दी गई है। विभव माइंस को दुश्मन की मशीनीकृत सेनाओं की बढ़त में देरी करने के लिए एंटी-टैंक बाधा प्रणाली के रूप में बिछाया जाएगा। एआरवी, टी-72 टैंकों और बीएमपी-II के वाहन प्लेटफार्मों के नवीनीकरण से उपकरणों का सेवा जीवन बढ़ेगा। इससे भारतीय सेना की तत्परता और परिचालन प्रभावशीलता सुनिश्चित होगी।

भारतीय नौसेना को 4 मेगावाट के समुद्री गैस टरबाइन आधारित विद्युत जनरेटर और पी8आई लम्‍बी दूरी के समुद्री टोही विमान के अधिग्रहण के लिए मंजूरी मिल गई है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की मेक-I श्रेणी के तहत 4 मेगावाट के समुद्री गैस टरबाइन आधारित विद्युत जनरेटर के शामिल होने से विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता कम होगी। इससे भारतीय नौसेना की बिजली उत्पादन आवश्यकताओं में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होगी। पी8आई विमान के अधिग्रहण से नौसेना की लम्‍बी दूरी की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) को डॉर्नियर विमानों के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड प्रणाली की खरीद के लिए मंजूरी दी गई है। यह खरीद आईसीजी की समुद्री निगरानी क्षमता को बढ़ाने में सहायक होगी।

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