केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नवाचार, वैज्ञानिक सोच और समस्याओं का त्वरित समाधान तलाशने पर बल दिया। वे आज भोपाल में भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) में आयोजित 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने भी इस कार्यक्रम में भागीदारी की।
वित्त मंत्री ने कहा कि विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान का अधिकतम उपयोग समाज की बेहतरी के लिए किया जाना चाहिए। नवीकरणीय ऊर्जा को समय की मांग बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से इस तरह की बैटरी और संसाधन बनाने का आग्रह किया जो इस ऊर्जा का भंडारण कर सके। वित्त मंत्री ने उन्नत रसायन के जरिये देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के प्रयासों का भी आह्वान किया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक हरित हाइड्रोजन मिशन, अनुसंधान और फाइव जी प्रौद्योगिकी के लिए बढ़ते बजट आवंटन सहित सरकार के विभिन्न प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों से ही हम देश को विकसित बनाने का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
भोपाल के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि डिग्री सिर्फ एक कागज का टुकडा नहीं है बल्कि यह आपकी प्रतिभा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि विद्या धन सबसे बडी संपत्ति है। 21वीं सदी ज्ञान की सदी है। भारतीय ज्ञान परम्परा से आप और भारत इस सदी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आई आई एस ई आर भोपाल ने इस वर्ष कुल दो सौ चौदह एकीकृत स्नातकोत्तर डिग्री, 79 अंडर ग्रेजुएट, 15 स्नातकोत्तर, 13 एम एस सी और 121 पी एच डी डिग्रियां प्रदान की।
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