सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार 32 वर्षीय एक व्यक्ति को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी है। न्यायालय ने पिछले 12 वर्षों से अधिक समय से कोमा में पडे व्यक्ति के कृत्रिम जीवन रक्षक यंत्र को हटाने की अनुमति दे दी है।
निष्क्रिय इच्छामृत्यु ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें जीवन रक्षक यंत्र या उसे जीवित रखने के लिए आवश्यक उपचार को रोक दिया जाता है या हटा दिया जाता है। गाजियाबाद के रहने वाले पंजाब विश्वविद्यालय के छात्र हरीश राणा को 2013 में अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के बाद सिर में गंभीर चोटें आईं थी। इसके बाद से वह एक दशक से अधिक समय से कोमा में हैं।
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