भारत

गतिशक्ति विश्वविद्यालय और DGCA ने विमान रखरखाव में सुधार और रोजगार सृजन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के अग्रणी विश्वविद्यालय, गतिशक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के बीच आज रेल भवन में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण समझौते पर केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू की उपस्थिति में फैज अहमद किदवई (महानिदेशक, डीजीसीए) और प्रो. मनोज चौधरी (कुलपति, जीएसवी) ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा सहित रेलवे और नागरिक उड्डयन के अन्य शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।

यह रणनीतिक सहयोग मानव पूंजी को मजबूत करके और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (एएमई) प्रशिक्षण में सुधार करके भारत में तेजी से बढ़ते मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) क्षेत्र को सक्षम बनाने के उद्देश्य से किया गया है। यह साझेदारी एएमई शिक्षा के मानकीकरण, गुणवत्ता मानकों को बढ़ाने और ‘एविएशन मेंटेनेंस इंजीनियरिंग’ में स्नातक डिग्री शुरू करके युवाओं के लिए एमआरओ करियर को अधिक आकर्षक बनाने पर केंद्रित होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने गति शक्ति विश्वविद्यालय में विनिर्माण प्रौद्योगिकी पर केंद्रित एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां उच्च स्तर की सटीकता की आवश्यकता होती है, जैसे विमानन, रेलवे और समुद्री क्षेत्र। इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण के लिए अलग स्तर की तकनीकी सटीकता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। उद्योग उन्मुख पाठ्यक्रम छात्रों को स्नातक होने के बाद रोजगार के लिए तैयार करने और विविध रोजगार अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कार्यक्रमों के विकास के लिए वैश्विक बेंचमार्क मानकों का पालन किया जाना चाहिए। इसके संभावित प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी पहलों से सालाना कम से कम 1,000 छात्र लाभान्वित हो सकते हैं, और आश्वासन दिया कि इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की व्यवस्था की जाएगी।

के. राम मोहन नायडू ने अपने संबोधन में कहा, “भारत का विमानन क्षेत्र आज देश का सबसे प्रगतिशील क्षेत्र है, जो सालाना 10-12% की दर से बढ़ रहा है। यह गति अगले 15 वर्षों तक जारी रहने की उम्मीद है।” उन्होंने कहा कि परिचालन हवाई अड्डों, यात्रियों और विमानों के बेड़े में हालिया विस्तार एक ऐसे कार्यबल को विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है जो वैश्विक मानकों को पूरा करता हो। उन्होंने जेवर हवाई अड्डे के हालिया उद्घाटन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के बीच निर्बाध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी स्थापित करने के दृष्टिकोण के अनुरूप विकास की गति को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि गतिशक्ति विश्वविद्यालय इस एकीकृत दृष्टिकोण का प्रतीक है, जो विभिन्न लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को एकजुट करता है। विमानन के व्यापक दायरे पर जोर देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि यह क्षेत्र आज केवल यात्री यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एमआरओ, कौशल विकास, प्रशिक्षण और स्वदेशी विमान घटकों का विनिर्माण भी शामिल है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण में योगदान देता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ज्ञापन सही प्रतिभा पूल बनाने में मदद करेगा, जो उड़ान (Udaan) जैसी योजनाओं के तहत उचित वित्त पोषण के साथ भविष्य के कुशल कार्यबल के लिए महत्वपूर्ण है।

इस समझौते के तहत जीएसवी और डीजीसीए संयुक्त रूप से एक भविष्य उन्मुख तीन वर्षीय बी.एससी. (एएमई) कार्यक्रम तैयार करेंगे, जिसमें शैक्षणिक कठोरता, नियामक अनुपालन और उद्योग से जुड़े कौशल शामिल होंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के विमानन क्षेत्र की बदलती मांगों को पूरा करने के लिए अत्यधिक कुशल कार्यबल तैयार करना है।

कार्यक्रम का पायलट चरण शैक्षणिक वर्ष 2026–27 में चुनिंदा प्रमुख एएमई संस्थानों, जिनमें जीएमआर स्कूल ऑफ एविएशन और एयर इंडिया एएमई अकादमी शामिल हैं, में शुरू होगा। यह चरण देशभर में संरचित विस्तार से पहले शैक्षणिक और नियामक उत्कृष्टता का मॉडल बनेगा।

कार्यक्रम का पायलट चरण शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में जीएमआर स्कूल ऑफ एविएशन और एयर इंडिया एएमई अकादमी सहित कुछ चुनिंदा प्रमुख एएमई संस्थानों में शुरू होगा। राष्ट्रव्यापी विस्तार से पहले यह चरण अकादमिक और नियामक उत्कृष्टता के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेगा।

एक नोडल केंद्र के रूप में अपनी भूमिका के तहत, जीएसवी उभरते क्षेत्रों जैसे सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएफ) और संबंधित क्षेत्रों में डीजीसीए के साथ एक अनुसंधान भागीदार के रूप में सहयोग करेगा। विश्वविद्यालय डीजीसीए कर्मियों की क्षमता निर्माण और कौशल विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेगा।

यह साझेदारी नियमन, शिक्षा और उद्योग के बीच एक संरचित सेतु स्थापित करती है। जहां डीजीसीए सीएआर-66 और सीएआर-147 ढांचे के तहत लाइसेंसिंग मानकों को परिभाषित करता रहेगा, वहीं जीएसवी पाठ्यक्रम नवाचार, फैकल्टी विकास, अनुसंधान एकीकरण और उद्योग से जुड़े अप्रेंटिसशिप मॉडल के लिए राष्ट्रीय शैक्षणिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

यह विस्तार योग्य और दोहराए जा सकने वाला ढांचा भारत के विदेशी एमआरओ सुविधाओं पर निर्भरता कम करने और मजबूत स्वदेशी रखरखाव क्षमताओं के निर्माण के विजन के अनुरूप है। एएमई शिक्षा में व्यावहारिक एमआरओ प्रशिक्षण, सिमुलेशन आधारित शिक्षण, ओईएम साझेदारी और क्षमता आधारित मार्गों को शामिल करके यह सहयोग भारत के बढ़ते विमान बेड़े को समर्थन देने और देश को एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक एमआरओ गंतव्य के रूप में स्थापित करने में सक्षम भविष्य-तैयार कार्यबल तैयार करेगा।

गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी), जो भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का एकमात्र विश्वविद्यालय है जिसकी स्थापना 2022 में संसद के अधिनियम द्वारा एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में की गई थी। मांग-आधारित पाठ्यक्रम के अनुसार विश्वविद्यालय को रेलवे, विमानन, राजमार्ग, बंदरगाह, समुद्री, शिपिंग, अंतर्देशीय जलमार्ग, शहरी परिवहन तथा संपूर्ण लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन नेटवर्क सहित पूरे परिवहन क्षेत्र को कवर करने का दायित्व दिया गया है। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अश्विनी वैष्णव (केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री) हैं।

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