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सरकार ने बजट 2025-26 के अनुरूप MSME निर्माताओं और निर्यातकों को बढ़ावा देने के लिए पारस्परिक ऋण गारंटी योजना में संशोधन किया

सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए पारस्परिक ऋण गारंटी योजना (एमसीजीएस-एमएसएमई) जनवरी 2025 में शुरू की गई थी। यह योजना राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) को एमसीजीएस-एमएसएमई के तहत पात्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को उपकरण/मशीनरी की खरीद के लिए स्वीकृत ₹100 करोड़ तक की ऋण सुविधा के लिए 60% गारंटी कवरेज प्रदान करती है।

सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और ऋणदाता संस्थानों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर कुछ संशोधन किए गए हैं।

मौजूदा “एमसीजीएस-एमएसएमई” योजना में संशोधन:

  • अग्रिम अंशदान: 5% अग्रिम अंशदान वापसी योग्य है, चौथे वर्ष से आगे प्रत्येक वर्ष 1% वापसी योग्य है, बशर्ते ऋण खाते का प्रदर्शन संतोषजनक हो।
  • पात्रता: सेवा क्षेत्र के सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी इस योजना में शामिल किए गए हैं।
  • मशीनरी/उपकरणों के लिए न्यूनतम परियोजना लागत: उपकरणों/मशीनरी की लागत परियोजना लागत के 60% तक कम कर दी गई है (पहले यह 75% थी)।
  • गारंटी की अवधि: गारंटी 10 वर्षों के बाद समाप्त हो जाएगी।

निर्यातकों के लिए योजना में विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं:

  • पात्र निर्यातक: लाभ कमाने वाली इकाइयाँ जिन्होंने पिछले 3 वित्तीय वर्षों में से प्रत्येक में अपने बिक्री कारोबार का कम से कम 25% निर्यात किया हो और कुछ निर्यात प्राप्ति शर्तों को पूरा करती हों।
  • गारंटीकृत ऋण राशि: 20 करोड़ रुपये।
  • अग्रिम योगदान: ऋण राशि का 2% (अधिकतम 40 लाख रुपये); गारंटी अवधि के चौथे और पांचवें वर्ष में 1 % की वापसी।
  • गारंटी कवरेज: डिफ़ॉल्ट राशि का 75%।
  • गारंटी शुल्क: पहले वर्ष: शून्य; उसके बाद, प्रत्येक वर्ष: बकाया ऋण का 0.50%।

भारत के सकल घरेलू उत्‍पादन में सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का योगदान लगभग 30% और निर्यात में 45% से अधिक है, साथ ही इससे 35 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिलता है। “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ एमएसएमई की आवश्यकता है। एमसीजीएस-एमएसएमई योजना में किए गए संशोधनों से एमएसएमई, जिनमें निर्यातक एमएसएमई भी शामिल हैं, उनको संयंत्र और मशीनरी/उपकरणों की खरीद के लिए ऋण की उपलब्धता में वृद्धि होने की उम्मीद है जिससे भारत के विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

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