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सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 55,200 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 55,200 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी है, जो स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरूआत के बाद से किसी एक वर्ष में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की सर्वाधिक संख्या है।

स्टार्टअप इंडिया पहल 16 जनवरी, 2016 को एक कार्य योजना के साथ शुरू की गई थी, जिसमें नवाचार को बढ़ावा देने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और देश भर में स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए एक मजबूत इकोसिस्‍टम बनाने के उद्देश्य से योजनाएं और प्रोत्साहन शामिल थे। स्टार्टअप्स को मान्यता देने, विकसित करने और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं।

शुरूआत से लेकर 31 मार्च, 2026 तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2.23 लाख को पार कर गई है, जिससे 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। 1.07 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है, जो कुल मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स का लगभग 48 प्रतिशत है।

वित्त वर्ष 2025-26 में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या में वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष-दर-वर्ष 51.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि के दौरान प्रत्यक्ष रूप से सृजित नौकरियों में 36.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

अब स्टार्टअप सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूद हैं। 31 मार्च, 2026 तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअपों की संख्या और प्रत्यक्ष रोजगार सृजन के मामले में महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात अग्रणी क्षेत्रों के रूप में उभरे हैं।

सरकार स्टार्टअप्स को फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (एफएफएस), स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (एसआईएसएफएस) और क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (सीजीएसएस) जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से समर्थन देना जारी रखे हुए है, जो स्टार्टअप जीवनचक्र के विभिन्न चरणों में वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।

एफएफएस के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक 135 से अधिक वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) को 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिन्होंने आगे 1,420 से अधिक स्टार्टअप में 26,900 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इस सफलता के आधार पर सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को अधिसूचित किया है।

स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना का वित्त वर्ष 2025-26 में विस्तार किया गया है, ताकि प्रति उधारकर्ता गारंटी कवर को 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करके पूंजी जुटाने की क्षमता को बढाया जा सके। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक 1,250 करोड़ रुपये से अधिक के 410 से अधिक ऋणों की गारंटी दी जा चुकी है।

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना के तहत 219 इनक्यूबेटरों का चयन किया गया है और 945 करोड़ रुपये की पूरी धनराशि आवंटित की गई है। इन इनक्यूबेटरों ने 3,400 से अधिक स्टार्टअपों को 605 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की है। योजना को स्वीकृत गतिविधियों की निरंतरता एंव वितरण सुनिश्चित करने हेतु विस्तारित किया गया है।

स्टार्टअप- आधारित नवाचार ने बौद्धिक संपदा सृजन को भी मजबूत किया है। स्टार्टअप द्वारा 19,400 से अधिक पेटेंट आवेदन दायर किए गए हैं। पेटेंट आवेदन वित्‍त वर्ष 2024-25 में 2,850+ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 4,480+ से अधिक हो गए।

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने सार्वजनिक खरीद में स्टार्टअप की भागीदारी को और सुगम बनाया है। इस प्लेटफॉर्म पर 38,600 से अधिक स्टार्टअप को जोड़ा गया हैं।

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