भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से आतंकवाद के खतरे पर लगातार ध्यान देने की अपील की है। भारत ने आतंकवाद को मानवाधिकारों, विशेष रूप से जीवन के अधिकार के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बताया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने कहा कि आतंकवाद आज भी मानवाधिकारों के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार परिषद ने भी जुलाई में जिनेवा में पारित एक प्रस्ताव में इस खतरे को स्वीकार किया था।
इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद को रोकने और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की गई थी। भारत ने परिषद से आतंकवाद के मुद्दे पर लगातार ध्यान देने और इसके प्रति बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाने का आग्रह किया। सुश्री मंगलानंदन ने मानवाधिकारों के मुद्दों को राजनीतिक रूप देने और उनमें दोहरे मापदंड अपनाने के लिए परिषद की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यवहार से परिषद की विश्वसनीयता कमजोर होती है।
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