भारतीय वायु सेना (IAF) ने जैसलमेर स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में ‘वायुशक्ति–26’ अभ्यास का सफलतापूर्वक आयोजन किया
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने जैसलमेर स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में ‘वायुशक्ति–26’ अभ्यास का सफलतापूर्वक आयोजन किया। भारतीय वायु सेना ने इस दौरान हवाई अभियानों के संपूर्ण क्रिया-कलापों में अपनी दुर्जेय युद्ध तत्परता, उत्कृष्ट परिचालन समन्वय और अत्याधुनिक तकनीकी दक्षता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुख्य अतिथि के रूप में इस अभ्यास प्रदर्शन समारोह की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर उनके साथ राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसानराव बागडे, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नागर विमानन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जी.एस. शेखावत, मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल, कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, भारतीय वायु सेना व भारतीय नौसेना के कमांडर-इन-चीफ, तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्र तथा राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा सहायक अधिकारी, पूर्व वायु सेना प्रमुख, सम्मानित पूर्व सैनिक, मित्र देशों के रक्षा अटैचेस, भारतीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस अभ्यास के माध्यम से भारतीय वायु सेना ने गतिशील एवं वास्तविक युद्धक्षेत्र के वातावरण में जटिल और एकीकृत हवाई अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने की अपनी सशक्त क्षमता का प्रदर्शन किया। इससे पूर्व दिन के समय, माननीय राष्ट्रपति ने स्वदेशी रूप से विकसित एलसीएच ‘प्रचंड’ में उड़ान भरी, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की निरंतर बढ़ती आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है।
पहली बार, वायुशक्ति अभ्यास का संचालन एक सुविचारित एवं पूर्वनिर्धारित परिचालन रणनीति के अंतर्गत किया गया, जिससे यह वास्तविक युद्धक्षेत्र के यथार्थ अनुकरण में परिवर्तित हो गया। इस अभ्यास के दौरान आक्रामक हवाई हमलों, वायु रक्षा गतिविधियों, विशेष बलों के अभियानों और मानवीय सहायता कार्यों को निर्बाध रूप से एकीकृत किया गया, जिसने बहु-क्षेत्रीय, एकीकृत बल तथा राष्ट्र के प्रथम उत्तरदाता के रूप में भारतीय वायु सेना की सशक्त भूमिका को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।
अभ्यास का शुभारंभ राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ, इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज, वायुसेना ध्वज तथा ऑपरेशन सिंदूर ध्वज को धारण किए चेतक हेलीकॉप्टरों ने औपचारिक फ्लाई-पास्ट किया। इसके उपरांत राफेल लड़ाकू विमानों द्वारा सटीक समय पर किया गया ध्वनि विस्फोट उच्च तीव्रता वाले युद्ध अभियानों के लिए एक सशक्त और प्रभावशाली मंच का निर्माण करता हुआ प्रतीत हुआ।
दिन-रात संचालित इस अभ्यास में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29, जगुआर, हॉक, एमआई-17, सी-130जे, सी-295, सी-17, स्वदेशी उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (एएलएच) ‘ध्रुव’ तथा हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच) ‘प्रचंड’ सहित 130 से अधिक विमानों ने सहभागिता की। लड़ाकू विमानों ने उन्नत वायु-से-भूमि हथियारों का प्रयोग करते हुए कृत्रिम शत्रु ठिकानों पर अत्यंत सटीक प्रहार किए, जिससे भारतीय वायु सेना की उच्च स्तरीय सटीक मारक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ और इनमें सटीक निर्देशित आयुध एवं लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता शामिल थी।
हवाई रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन आकाश एवं स्पाइडर मिसाइल प्रणालियों जैसे हवाई प्लेटफार्मों तथा जमीनी प्रणालियों के समन्वित संचालन के माध्यम से किया गया, जिन्हें सेना की वायु रक्षा परिसंपत्तियों, जैसे एल-70 और एम-777 का प्रभावी सहयोग प्राप्त था। यह अभ्यास वायु एवं थल बलों के बीच निर्बाध व सुदृढ़ समन्वय का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत करता है। विशेष अभियान और मानवीय सहायता मिशन इस अभ्यास के प्रमुख घटक रहे। शाम होते ही गरुड़ स्पेशल फोर्सेज को पैरा सेफ्टी टुकड़ियों के साथ एमआई-17 हेलीकॉप्टरों द्वारा उतारा गया, ताकि शहरी क्षेत्र में घुसपैठ एवं बंधक बचाव अभियान का अभ्यास किया जा सके। इसके उपरांत एडवांस लैंडिंग ग्राउंड से सी-130 और सी-295 विमानों द्वारा हमले के पश्चात लैंडिंग तथा बचाव अभियान संचालित किया गया, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया व घायलों की सुरक्षित निकासी में भारतीय वायु सेना की निर्णायक भूमिका उजागर हुई।
अभ्यास के रात्रि चरण में एकीकृत वायु रक्षा तथा हवाई-लैंडिंग अभियानों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया, जिसके उपरांत अनेक लड़ाकू विमानों द्वारा अत्यंत सटीक रात्रिकालीन प्रहार किए गए। इससे भारतीय वायु सेना की चौबीसों घंटे युद्धक्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करने की सुदृढ़ क्षमता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। अभ्यास का समापन सी-17 विमान द्वारा की गई प्रतीकात्मक ‘युद्धविराम उड़ान’ के साथ हुआ, जिसके पश्चात भारतीय वायु सेना की गौरवशाली विरासत एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों के उत्सवस्वरूप एक भव्य ड्रोन प्रदर्शन आयोजित किया गया।
“अचूक, अभेद्य एवं सटीक” के अपने मूल मूल्यों से प्रेरित, वायुशक्ति–26 अभ्यास ने भारतीय वायु सेना के परिचालन सिद्धांतों, संयुक्त एकीकरण और अत्याधुनिक तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ रूप से प्रमाणित किया। इस अभ्यास के माध्यम से भारत की व्यापक राष्ट्रीय शक्ति एवं रणनीतिक प्रतिरोध के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में भारतीय वायु सेना की भूमिका की पुनः पुष्टि हुई।





