भारत

जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने नई दिल्ली में “जल उपयोग दक्षता: सतत भविष्य की रणनीतियां” विषय पर कार्यशाला का उद्घाटन किया

जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) के अंतर्गत संचालित जल उपयोग दक्षता ब्यूरो (बीडब्ल्यूयूई) ने भारतीय प्लंबिंग एसोसिएशन (आईपीए) के सहयोग से घरेलू जल क्षेत्र से संबंधित जल उपयोग दक्षता: सतत भविष्य की रणनीतियां शीर्षक से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। इसका आयोजन नई दिल्ली के पालिका केंद्र स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने किया। उन्होंने अभिनव दृष्टिकोण और सहयोगात्मक प्रयासों द्वारा जल संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। कार्यशाला में विभिन्न मंत्रालयों, संगठनों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, विशेषज्ञों और हितधारकों ने घरेलू क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने की रणनीतियों और तकनीकी प्रगति पर विमर्श किया।

जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग सचिव ने मुख्य संबोधन में नीतिगत पहलों और बहु-क्षेत्रीय साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यशाला में जल की खपत कम करने में कम प्रवाह वाले उपकरणों और स्मार्ट सैनिटरी वेयर के प्रयोग की अहम भूमिका का भी उल्लेख किया गया। कार्यशाला में संबंधित मंत्रालयों, जल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न उद्योगों, जल प्रबंधन से संबंधित गैर-सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों सहित 350 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, 20 से अधिक विशेषज्ञों/वक्ताओं ने अपने संबोधन में व्यावहारिक समाधान दिये।

कार्यशाला में (i) “नीति से व्यवहार तक – कम प्रवाह स्थिरता और सही प्रवाह स्थिरता तथा स्मार्ट सेनेटरी वेयर समाधानों के माध्यम से शहरी परिदृश्य में जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना शीर्षक से परिचर्चा। (ii) पहला तकनीकी सत्र – सभी के लिए जल: भारत के जल प्रबंधन में दक्षता शक्ति का उपयोग करना। (iii) दूसरा तकनीकी सत्र – वॉक द टॉक: सहयोगात्मक जल प्रबंधन समाधानों को बढ़ाने – ऐसे मामलों के अध्ययन से अंतर्दृष्टि प्राप्त करने, जैसे विभिन्न सत्र शामिल रहे। साथ ही, प्रमुख उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ जल शक्ति मंत्री की बातचीत भी आयोजित की गई, ताकि उद्योगों को अपने डिजाइनों और उत्पादों में जल-कुशल तकनीकों को अपनाने और एकीकृत करने तथा अपने अनुभवों, विचारों और चुनौतियों को साझा करने हेतु प्रोत्साहित किया जा सके

कार्यशाला में जाने-माने विशेषज्ञों ने जल प्रबंधन में संवहनीय प्रचलन और उन्नत प्रौद्योगिकियों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जल प्रबंधन के लिए सहयोगी दृष्टिकोण की प्रभावशीलता के मामलों का उदाहरण देते हुए सफल जल प्रबंधन मॉडल के वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत किए। कार्यशाला में परस्पर संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें जल शक्ति मंत्री ने विभिन्न जल उद्योग विशेषज्ञों से बातचीत की।

कार्यशाला में जल कुशल उत्पाद विकसित करने में नवीन विचारों को समाहित करने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहित करने, घरेलू स्थलों पर कम प्रवाह वाले उपकरणों और स्मार्ट सेनेटरी वेयर अपनाने को बढ़ावा देने, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोगात्मक जल प्रबंधन मॉडल का विस्तार करने और जल दक्षता संबंधी पहल को बढ़ावा देने के लिए नीतियों को सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया गया।

Editor

Recent Posts

सरकार ने विदेश व्यापार नीति 2023 के तहत इन्वेंट्री-आधारित सीमा पार ई-कॉमर्स निर्यात ढांचा अधिसूचित किया

भारत सरकार ने अधिसूचना संख्या 27/2026-27 दिनांक 5 अगस्त, 2026 और संबंधित सार्वजनिक सूचना संख्या…

33 मिनट ago

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा- युवा प्रदर्शनकारियों के साथ अधिकारियों को संयम बरतना चाहिए

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि युवा छात्र प्रदर्शनकारियों को लेकर प्रतिक्रिया देते समय अधिकारियों…

58 मिनट ago

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज

झारखंड में रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित…

1 घंटा ago

सरकार ने चांदीपुरा वायरस रोग (CHPV) के प्रकोप से निपटने के लिए राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) को गुजरात और राजस्थान में तैनात किया

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चांदीपुरा वायरस रोग (सीएचपीवी) के प्रकोप से निपटने…

3 घंटे ago

DRI ने 364 मिलियन टन प्रतिबंधित पाकिस्तानी सूखा खजूर जब्त किया, बाजार मूल्य 3 करोड़ रुपये

पाकिस्तान से आयात पर भारत के लगाए गए प्रतिबंध को दरकिनार करने के प्रयासों पर…

3 घंटे ago

RBI ने रेपो दर में कोई बदलाव न करते हुए 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा

भारतीय रिजर्व बैंक-आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान…

6 घंटे ago