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लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वॉटर ट्रांसवर्सैलिटी ग्लोबल अवॉर्ड्स एवं कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित किया

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि विकास और पर्यावरण को विरोधी शक्तियों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें एक-दूसरे के पूरक के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मानवता के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक है और जनप्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

ओम बिरला ने ये विचार वॉटर ट्रांसवर्सैलिटी ग्लोबल अवॉर्ड्स एंड कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने जल संरक्षण, सतत विकास और वैश्विक सहयोग के महत्व पर बल दिया और कहा कि इंटरनेशनल वॉटर फोरम (IWF) जैसी पहलें जल संबंधी चुनौतियों का समाधान करने में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

यह उल्लेख करते हुए कि वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब नागरिक जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनें, श्री बिरला ने बताया कि जल, ऊर्जा, स्वास्थ्य और पर्यावरण ऐसे क्षेत्र हैं जो गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन जटिल चुनौतियों का समाधान केवल समन्वित और एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से ही संभव है। श्री बिरला ने यह भी रेखांकित किया कि समावेशी विकास के लिए विभागों और नीतियों के बीच “ट्रांसवर्सैलिटी” आवश्यक है।

ओम बिरला ने जल संरक्षण के लिए “रिड्यूस, रीयूज़, रिचार्ज और रीसायकल” के मंत्र को अपनाने के महत्व पर बल दिया। “कैच द रेन” और “जल जीवन मिशन” जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इन अभियानों की सफलता सुनिश्चित करने में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

उन्होंने आगे कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा और हरित पहलें भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ कर रही हैं। ओम बिरला ने कहा कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत की प्रगति उल्लेखनीय है और यह देश को सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक है।

ओम बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं की शक्ति और मजबूत वैश्विक सहयोग के माध्यम से ही एक सतत भविष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पारदर्शी शासन और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ें, तो हम ऐसा भविष्य निर्मित कर सकते हैं जिसमें आर्थिक समृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन साथ-साथ आगे बढ़ें।

ओम बिरला ने भारतीय संस्कृति में जल के आध्यात्मिक और जीवनदायी महत्व को भी रेखांकित किया। जनभागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सार्थक और स्थायी परिवर्तन लाने के लिए पंचायत स्तर से लेकर संसद तक, इन प्रयासों को सक्रिय जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

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