कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा निर्मित आठ उथले जल के पनडुब्बी-रोधी जहाजों (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) में से दूसरा युद्धपोत, ‘मालवान’, 31 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।
इस पोत को कोच्चि स्थित सीएसएल द्वारा भारतीय नौसेना की विशिष्टताओं के अनुसार, डीएनवी के वर्गीकरण नियमों के तहत स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है।
‘मालवन’ नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन से लिया गया है; यह क्षेत्र छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवशाली समुद्री विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह पोत पूर्ववर्ती आईएनएस मालवन की विरासत को भी संजोए हुए है, जो भारतीय नौसेना का एक ‘माइनस्वीपर’ (बारूदी सुरंग हटाने वाला जहाज) था और 2003 तक सेवा में रहा था। इस प्रकार, यह युद्धपोत प्रतिष्ठित जहाजों के नामों को संरक्षित रखने की नौसैनिक परंपरा को आगे बढ़ाता है।
यह युद्धपोत पानी के भीतर निगरानी, तटीय जलक्षेत्र में पनडुब्बी-रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) अभियानों, कम तीव्रता वाली समुद्री गतिविधियों (एलआईएमओ) के साथ-साथ समुद्री युद्धक क्षमताओं से सुसज्जित है। यह जहाज लगभग 80 मीटर लंबा और 1,100 टन भार वाला है। वाटरजेट से चलने वाला यह एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी युद्धपोत टॉरपीडो, बहु-कार्यकारी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट तथा अत्याधुनिक सेंसरों से लैस है, जिसमें उन्नत रडार व सोनार प्रणालियां शामिल हैं, जो इसकी परिचालन क्षमता को और सशक्त बनाती हैं।
मालवन जहाज 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ तैयार किया गया है, जो स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनकर उभरा है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करता है। यह युद्धपोत गर्व के साथ ऐसे उपकरणों और प्रणालियों से सुसज्जित है, जिन्हें देश के घरेलू रक्षा निर्माण इकोसिस्टम द्वारा विकसित व सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है, जिसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र भी शामिल हैं।





