संस्कृति मंत्रालय और यूट्यूब ने भारतीय पारंपरिक लोक और आदिवासी संगीत को वैश्विक मंच पर उसे आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
भारतीय पारंपरिक लोक और आदिवासी संगीत को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देने और उसे व्यापक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और यूट्यूब के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। आज नई दिल्ली में इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल और यूट्यूब की भारत स्थित प्रबंध निदेशक गुंजन सोनी उपस्थित थीं।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की विविध लोक परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन संस्कृति मंत्रालय का प्रमुख उद्देश्य है। यूट्यूब के साथ यह सहयोग हमारी रचनात्मक अर्थव्यवस्था को पोषित करने और हमारे कलाकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि हमारा लक्ष्य लोक संगीतकारों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अधिक पहचान, स्थिरता और मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक उपकरण और मंच उपलब्ध कराना है।
संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य लोक कलाकारों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना है ताकि देश के कोने-कोने के लोक कलाकार गर्व से अपनी संस्कृति और परंपराओं को कायम रख सकें और स्वतंत्र रचनात्मक उद्यमी बन सकें। विवेक अग्रवाल ने आगे कहा कि यूट्यूब की वैश्विक पहुंच को मंत्रालय के व्यापक बुनियादी ढांचे के साथ एकीकृत करके, मंत्रालय न केवल एक मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि लाखों लोक कलाकारों को आत्मनिर्भर बनने और सफल उद्यम चलाने के लिए आधार तैयार करने में मदद कर रहा है।
इस समझौते के अवसर पर यूट्यूब की भारत की प्रबंध निदेशक, गुंजन सोनी ने कहा कि यूट्यूब का उद्देश्य भारत के हर कोने के कलाकारों और रचनाकारों को अपनी प्रतिभा को दुनिया के साथ साझा करने में मदद करना है। लोक संगीत भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग है और संस्कृति मंत्रालय के साथ यह साझेदारी इन महत्वपूर्ण परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने का एक अनमोल अवसर है। उन्होंने आगे कहा कि यूट्यूब, मंत्रालय की गहरी सांस्कृतिक भागीदारी और आईएमओसी के बुनियादी ढांचे को वैश्विक मंच पर कलाकारों को समर्थन और प्रदर्शन देने की अपनी अनूठी क्षमता के साथ जोड़कर, दुनिया भर के रचनाकारों के लिए पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए उत्साहित है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य इन प्रतिभाशाली कलाकारों को न केवल डिजिटल कौशल से सशक्त बनाना है, बल्कि उन्हें दुनिया भर में नए दर्शकों से जुड़ने, ऑनलाइन सफल करियर बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए स्थायी मार्ग प्रदान करना है कि उनकी अमूल्य कला आने वाली पीढ़ियों तक गूंजती रहे।
इस पहल का उद्देश्य देश के समृद्ध पारंपरिक और लोक संगीतकारों के समुदाय को डिजिटल उपकरणों, ज्ञान प्रणालियों और व्यापक दर्शकों तक पहुंच प्रदान करके सशक्त बनाना है। इसका उद्देश्य डिजिटल कौशल, बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता, सहयोग के बेहतर अवसर और कलाकारों के लिए स्थायी करियर विकल्प के माध्यम से भारतीय पारंपरिक और लोक संगीत के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
भारत की लोक, आदिवासी और पारंपरिक संगीत विरासत, विविधतापूर्ण और जीवंत होने के बावजूद, आधुनिक सामग्री परिदृश्य में वैश्विक दृश्यता, डिजिटल वितरण और अधिकारों के प्रति जागरूकता के मामले में अक्सर चुनौतियों का सामना करती रही है। यह पहल संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, बुनियादी ढांचे तक पहुंच और निरंतर संस्थागत समर्थन प्रदान करके इन कमियों को दूर करने का प्रयास करती है।
संस्कृति मंत्रालय लोक संगीत रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करते हुए कार्यक्रम के लिए रणनीतिक नेतृत्व और पर्यवेक्षण प्रदान करेगा, जबकि एक संयुक्त कार्य बल कार्यान्वयन और प्रभाव मूल्यांकन का मार्गदर्शन करेगा। मंत्रालय द्वारा चयनित स्वायत्त कला और प्रदर्शन संस्थानों के माध्यम से, यह पहल रिकॉर्डिंग उपकरणों सहित सुविधाओं तक पहुंच और क्षेत्रीय संपर्क प्रदान करेगी, साथ ही स्थानीयकृत शैक्षिक सामग्री का सह-विकास करेगी और मार्गदर्शकों की पहचान करेगी।
समझौते के तहत यूट्यूब इन प्रयासों में सहयोग करेगा और लोक, आदिवासी और पारंपरिक कलाकारों को डिजिटल सामग्री निर्माण की सर्वोत्तम प्रथाओं, चैनल प्रबंधन, मुद्रीकरण रणनीतियों, कॉपीराइट प्रबंधन और यूट्यूब एनालिटिक्स के माध्यम से दर्शकों की अंतर्दृष्टि को समझने के प्रशिक्षण में सहायता प्रदान करेगा।





