NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर औषधीय वृक्षारोपण के लिए ‘NHAI आरोग्य वन’ परियोजना विकसित करेगा
जैव विविधता को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास में पारिस्थितिक स्थिरता को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर औषधीय वृक्षारोपण के रूप में ‘आरोग्य वन’ विकसित करने की पहल की है। इस पहल का उद्देश्य परागणकों, पक्षियों और सूक्ष्मजीवों को सहारा देने वाली औषधीय वृक्ष प्रजातियों को लगाकर राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे जैव विविधता को समृद्ध करना है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती सुनिश्चित हो सके।
‘आरोग्य वन’ के विकास के पहले चरण में 62.8 हेक्टेयर में फैले 17 भूखंडों को शामिल करते हुए एक कार्य योजना तैयार की गई है, जहां मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्यों में विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के किनारे लगभग 67,462 औषधीय वृक्ष लगाए जाएंगे।
इसके अलावा नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर, मौलसरी आदि औषधीय गुणों से युक्त लगभग 36 वृक्ष प्रजातियों की पहचान की गई है और इन्हें संबंधित कृषि-जलवायु क्षेत्रों की उपयुक्तता के अनुसार भूमि भूखंडों पर लगाया जाएगा। जन जागरूकता और पहुंच को अधिकतम करने के लिए टोल प्लाजा, सड़क किनारे की सुविधाओं, इंटरचेंजों, क्लोवरलीफ जंक्शनों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अन्य प्रमुख स्थानों के पास स्थित भूमि भूखंडों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस पहल का कार्यान्वयन भारत सरकार के भूनिर्माण और वृक्षारोपण संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
परंपरागत रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण गतिविधियां हरियाली बढ़ाने और पारिस्थितिक स्थिरता के उद्देश्य से देशी और सड़क किनारे उगने वाले वृक्षों की मिश्रित प्रजातियों का उपयोग करके की जाती रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्रशासन (एनएचएआई) ने आगामी मानसून के मौसम में वृक्षारोपण के लिए लगभग 188 हेक्टेयर रिक्त भूमि की पहचान की है ताकि वृक्षों के जीवित रहने की दर को बढ़ाया जा सके और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। औषधीय वृक्ष प्रजातियों पर केंद्रित एक विषयगत मॉडल को अपनाने से ऐसे वृक्षारोपण का पारिस्थितिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ेगा।
यह पहल आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने और स्वदेशी औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण में योगदान देने की भारत सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप भी है। इसके अलावा इन वृक्षारोपण को ऐसे जीवंत भंडार के रूप में परिकल्पित किया गया है जो पारंपरिक औषधीय ज्ञान प्रणालियों और समकालीन समय में उनकी प्रासंगिकता के बारे में जन जागरूकता पैदा करेंगे।
‘आरोग्य वन’ पहल, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ अवसंरचना विकसित करने के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। पारिस्थितिक बहाली को जन जागरूकता के साथ एकीकृत करके इस पहल का उद्देश्य हरित गलियारों का एक नेटवर्क बनाना है जो न केवल सड़क किनारे की पारिस्थितिकी को बढ़ावा दे, बल्कि ज्ञान केंद्रों के रूप में भी कार्य करे और भारत की औषधीय पौधों की समृद्ध विरासत और टिकाऊ जीवन शैली के बारे में जागरूकता को प्रोत्साहित करे।




