भारत

नीति आयोग ने “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” का सातवां अंक जारी किया

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने आज नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के “ट्रेड वॉच क्वार्टरली ” प्रकाशन का नवीनतम अंक जारी किया। नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इसे जारी किया गया।

वैश्विक व्यापार में निरंतर व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद स्थिति अनुकूलता (विपरीत परिस्थितियों, तनाव या आघात के बाद भी वापस संभलने की क्षमता) के बीच यह प्रकाशन वैश्विक और घरेलू व्यापार रुझानों का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। इस तिमाही अंक का विषयगत खंड भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र पर केंद्रित है, जिसमें वैश्विक मांग में वृद्धि, भारत का निर्यात, प्रयोगशाला में उत्पादित हीरे जैसे उभरते क्षेत्र और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में इसकी स्थिति का विश्लेषण किया गया है। यह प्रमुख संरचनात्मक बाधाओं, विकसित होते मांग पैटर्न (निश्चित नियम या व्यवस्था के अनुसार बार-बार दोहराए जाने वाले व्यवहार, या अनुक्रम) और प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ करने और निर्यात प्रदर्शन बढ़ाने के लिए आवश्यक नीतिगत प्राथमिकताओं की भी पहचान करता है।

वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत के व्यापार में मिश्रित लेकिन मजबूत रुझान रहा। व्यापारिक माल निर्यात में 1.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोत्‍तरी दर्ज की गई, जबकि आयात में 7.9 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई। इसके विपरीत, सेवा निर्यात में 7.8 प्रतिशत की अच्‍छी वृद्धि रही, जबकि सेवा आयात में अपेक्षाकृत औसत वृद्धि हुई, जिससे निरंतर अधिशेष के कारण समग्र बाह्य संतुलन (देश के विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने) को मजबूती मिली।

इस तिमाही अंक का मुख्य विषय रत्न और आभूषण हैं, जो भारत के श्रम-प्रधान विनिर्माण तंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ और व्यापार में एक अहम योगदानकर्ता बने रहे हैं। कच्चे सोने को छोड़कर, वैश्विक बाजार का आकार 2024 में लगभग 378 अरब डॉलर होने के अनुमान के अनुसार भारत का निर्यात विश्व निर्यात में 7.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ 29.5 अरब डॉलर का रहा।

इस क्षेत्र में भारत की निर्यात क्षमता हीरे और मूल्‍यवान धातु के आभूषणों में केंद्रित रही, जो मिलकर वैश्विक मांग के आधे से अधिक (लगभग 207.3 अरब डॉलर) की पूर्ति करते हैं। इन क्षेत्रों में, भारत ने 26.7 अरब डॉलर के निर्यात के साथ मजबूत वैश्विक उपस्थिति हासिल की है, जो मूल्यवर्धन द्वारा संचालित आयातित कच्चे माल में वैश्विक प्रसंस्करण केंद्र के रूप में उसकी स्थापित भूमिका दर्शाती है जिसमें सूरत विश्व के सबसे बड़े कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र के रूप में उभर रहा है।

विश्लेषण से पता चलता है कि इस क्षेत्र में भारत की व्यापार संरचना में उत्पाद और बाजार का अत्यधिक केंद्रीकरण है। निर्यात मुख्य रूप से कुछ प्रमुख बाजारों, विशेषकर अमेरिका, संयुक्‍त अरब अमीरात और हांगकांग की ओर निर्देशित है, जबकि आयात कच्चे माल के लिए सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर केंद्रित है।

अवसरों के बावजूद, इस क्षेत्र को संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें बिखरावपूर्ण एमएसएमई आधार के कारण सीमित मूल्यवर्धन, आयातित कच्‍चे माल पर अत्यधिक निर्भरता, वित्तीय संस्थानों के भरोसे में कमी के कारण ऋण अंतर, कौशल और डिजाइन की कमियां और वैश्विक व्यापार केंद्रों में सीमित पहुंच शामिल हैं। इनके समाधान के लिए उच्च मूल्यवर्धन के लिए विशेष प्रयास, उभरते क्षेत्रों में विविधीकरण, वित्त और कच्चे माल तक बेहतर पहुंच, प्रौद्योगिकी और कौशल में निवेश और अनुकूल नीतिगत ढांचों द्वारा समर्थित अधिक एकीकृत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना आवश्यक होगा।

सुमन बेरी ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक व्यापार में संरचनात्मक बदलाव द्वारा प्रमुख क्षेत्रों में घरेलू क्षमता सुदृढ़ बनाकर निर्यात आधार में विविधता लाने की भारत की क्षमता, निरंतर विकास और लचीलेपन (स्थिति अनुकूल) बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगी। रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों में, बदलती वैश्विक मांग के अनुरूप ढलना, मूल्यवर्धन मजबूत बनाना और संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने हेतु आवश्यक है।

नीति आयोग सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने भी प्रकाशन की विश्लेषणात्मक गहनता की सराहना करते हुए कहा कि लक्षित क्षेत्रीय उपायों के साथ ही वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण सुदृढ़ बनाना, भारत की निर्यात गति की निरंतरता बनाये रखने और गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन में प्रमुखता केन्द्रीय रहेगा।

ट्रेड वॉच क्वार्टरली का अंक नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए महत्‍वपूर्ण संसाधन है, जो सूचित निर्णय लेने में सहायता और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता स़ुदृढ़ करने के लिए डेटा-आधारित अंतर्दृष्टि और दूरदर्शी नीतिगत संस्‍तुतियां प्रदान करता है।

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