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Prime Minister Modi inaugurated a grand international exhibition of sacred Piprahwa relics associated with Lord Buddha
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प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’ का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि भगवान बुद्ध द्वारा दिखाया गया मार्ग और ज्ञान समस्त मानवता के लिए है और उनके पवित्र अवशेष मात्र कलाकृतियां नहीं बल्कि देश की पूजनीय विरासत का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि ये अवशेष देश की सभ्यता के अभिन्न अंग हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आज नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से संबंधित पिपरहवा के पवित्र अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसका शीर्षक प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष है। उन्होंने इस प्रदर्शनी की सूची का भी अनावरण किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद देश की विरासत लौट आई है। उन्होंने कहा कि आज से देश के लोग भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे और उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत न केवल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का संरक्षक है, बल्कि उस शाश्वत परंपरा का जीवंत वाहक भी है।

बौद्ध विरासत के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने विश्व भर में बौद्ध विरासत स्थलों के विकास में योगदान देने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि बौद्ध स्थलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और तीर्थयात्रियों के लिए नई सुविधाएं बनाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं मूल रूप से पाली भाषा में हैं और उनकी सरकार का प्रयास पाली भाषा को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि पाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है।

1898 में खोजे गए पिपरहवा अवशेषों का प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में महत्वपूर्ण स्थान है। ये भगवान बुद्ध से सीधे जुड़े सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अवशेषों में से हैं। पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं। कपिलवस्तु वह स्थान है जहां भगवान बुद्ध ने संन्यास लेने से पहले अपना प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया था। पिपरहवा अवशेषों को एक सदी से भी अधिक समय के बाद भारत वापस लाया गया है। पिपरहवा अवशेष के कुछ हिस्से नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय और कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए थे। इन अवशेषों को इस प्रदर्शनी में रखा गया है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर भगवान बुद्ध के पिपरहवा रत्न अवशेषों की 127 वर्षों के बाद वापसी को दर्शाने का है। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय है। गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि उनका मंत्रालय प्रधानमंत्री के देश की विरासत के संरक्षण के साथ विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य कर रहा है। गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि उनका मंत्रालय देश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और देश की सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के साथ भारत के गहरे और निरंतर सभ्यतागत संबंध को उजागर करती है और भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हाल में इन अवशेषों की वापसी सरकार के निरंतर प्रयासों, संस्थागत सहयोग और अभिनव सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से संभव हुई है।

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