प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में रायसीना संवाद के 11वें संस्करण का शुभारंभ किया। मुख्य भाषण देते हुए फिनलैंड के राष्ट्रपति आलेक्सांदर स्तूब ने कहा कि विकासशील और अल्पविकसित देश यह तय करेगें कि भविष्य में विश्व व्यवस्था कैसी होगी और इसमें भारत की अहम भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन बदल गया है। विकासशील और अल्पविकसित देशों के पास अर्थव्यवस्था और जनसंख्या दोनों ही मजबूत पक्ष हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिमी प्रभुत्व वाले विश्व का युग समाप्त हो गया है, लेकिन पश्चिम में इसे पूरी तरह समझने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि आज विश्व राजनीति में कई बड़ी चुनौतियाँ हैं।
उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना छोड़ देते हैं, तो वर्तमान विश्व व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम को यह पता लगाने का प्रयास करना चाहिए कि एक अपूर्ण विश्व में शक्ति को नियंत्रित करने का सर्वोत्तम तरीका क्या है।
उन्होंने कहा कि भारत किसी भ्रम में नहीं रहा है और उसने अपनी विदेश नीति को एक व्यावहारिक विश्व दृष्टिकोण पर आधारित किया है। उन्होंने कहा कि भारत स्वयं को अलग-थलग नहीं करता और उसकी शक्ति सक्रिय भागीदारी पर आधारित है।
नई विश्व व्यवस्था को आकार देने के विषय पर डॉ. स्तूब ने कहा कि फिनलैंड की नीति मूल्यों पर आधारित यथार्थवाद पर टिकी है। उन्होंने कहा कि भारत हजारों वर्षों से मूल्यों पर आधारित यथार्थवाद का पालन करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के एक रचनात्मक सदस्य के रूप में भारत के कार्य करने के तरीके से यह स्पष्ट है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापार को एक भू-राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और इस युग में भारत के नेतृत्व की आवश्यकता है। राष्ट्रपति स्तूब ने कहा कि नई तकनीक से विकसित और विकासशील देशों के बीच की खाई नहीं बढ़नी चाहिए।
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