राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम (एनएलएमसी) के निदेशक मंडल की 21वीं बैठक 18 सितंबर 2026 को निगम के चल रहे परिसंपत्ति के मुद्रीकरण कार्यक्रम, वित्तीय प्रदर्शन और प्रमुख संस्थागत पहलों की समीक्षा करने के लिए आयोजित की गई।
बैठक का एक प्रमुख बिंदु 5,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों से संबंधित मुद्रीकरण प्रस्तावों पर विचार और अनुशंसा करना था। इन प्रस्तावों में मुद्रीकरण के लिए चिन्हित अधिशेष भूमि और भवन संपत्तियां शामिल हैं और ये सरकार के अल्पउपयोग और अधिशेष संपत्तियों के मूल्य को प्रकट करने के उद्देश्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बोर्ड ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) और अन्य सरकारी संस्थाओं की अधिशेष संपत्तियों के मुद्रीकरण को सुगम बनाने में एनएलएमसी द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की। निगम उपयुक्त संपत्तियों की पहचान करने, आवश्यक जांच-पड़ताल करने, मूल्यांकन को सुगम बनाने और पारदर्शिता, दक्षता और मूल्य प्राप्ति पर जोर देते हुए उचित मुद्रीकरण प्रक्रियाओं को संरचित करने के लिए संपत्ति की स्वामी संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है।
बोर्ड को एनएलएमसी द्वारा किए जा रहे परिसंपत्ति के मुद्रीकरण की गति और प्रगति से अवगत कराया गया। इसमें विभिन्न परिसंपत्ति-स्वामित्व वाली संस्थाओं में अपनाई जा रही पहलें भी शामिल थी। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य मुद्रीकरण प्रक्रिया को तेज करना, कार्यान्वयन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना और यह सुनिश्चित करना था कि चिन्हित परिसंपत्तियां उचित और पारदर्शी तंत्रों के माध्यम से आगे बढ़ें।
बोर्ड ने प्रगति की सराहना करते हुए अधिशेष परिसंपत्तियों के समय पर मुद्रीकरण को सुविधाजनक बनाने के लिए गति बनाए रखने और हितधारक संस्थाओं के साथ समन्वय को मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया।
बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एनएलएमसी के वार्षिक वित्तीय विवरण और निदेशकों की रिपोर्ट को भी मंजूरी दी।
इस बैठक में एनएलएमसी की संस्थागत और परिचालन क्षमताओं को मजबूत करने और परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए अधिक व्यवस्थित ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से चल रही पहलों की समीक्षा करने का अवसर भी मिला।
बोर्ड द्वारा 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों से संबंधित प्रस्तावों की अनुशंसा सरकार के संपत्ति मुद्रीकरण कार्यक्रम में एनएलएमसी की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। एनएलएमसी अधिशेष भूमि और भवन संपत्तियों के उत्पादक उपयोग को सुगम बनाकर उन संपत्तियों से मूल्य प्राप्त करने में योगदान देना चाहती है जो अन्यथा अनुपयोगी रह सकती हैं, साथ ही संपत्ति के स्वामियों को पारदर्शी और व्यावसायिक रूप से उपयुक्त मुद्रीकरण अवसरों का लाभ उठाने में सहायता प्रदान करती है।
बोर्ड ने भारत सरकार के व्यापक परिसंपत्ति मुद्रीकरण उद्देश्यों के अनुरूप, अधिशेष परिसंपत्तियों के कुशल, पारदर्शी और मूल्य-उन्मुख मुद्रीकरण पर एनएलएमसी के निरंतर ध्यान के बारे में दोहराया। निगम अधिशेष परिसंपत्तियों की पहचान और मुद्रीकरण को सुगम बनाने तथा सार्वजनिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग में सहयोग करने के लिए संबंधित मंत्रालयों, विभागों, सीपीएसई और अन्य सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।
राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम (एनएलएमसी) के बारे में
राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम लिमिटेड (एनएलएमसी) भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। इसका प्रशासनिक नियंत्रण लोक उद्यम विभाग (डीपीई), वित्त मंत्रालय के पास है। एनएलएमसी की स्थापना केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) और अन्य सरकारी संस्थाओं की अधिशेष भूमि और भवन संपत्तियों का मुद्रीकरण करने और इसे सुगम बनाने के लिए की गई है।
एनएलएमसी परिसंपत्ति-स्वामित्व वाली संस्थाओं के साथ मिलकर उपयुक्त और पारदर्शी तंत्रों के माध्यम से अधिशेष परिसंपत्तियों की पहचान, मूल्यांकन और मुद्रीकरण को सुगम बनाने का कार्य करती है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अधिशेष परिसंपत्तियों के मूल्य को प्रकट करना और सरकार के व्यापक परिसंपत्ति मुद्रीकरण उद्देश्यों में सहयोग करना है।
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