लोक सभा से पारित ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन संशोधनों से सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए कानूनी ढांचा और मजबूत होगा, साथ ही छात्रों और युवाओं के हितों की भी रक्षा होगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सार्वजनिक परीक्षाएं पारदर्शी, विश्वसनीय और योग्यता आधारित हों ताकि छात्रों के ईमानदार प्रयासों की रक्षा की जा सके। इस बात पर जोर देते हुए कि कानून केवल प्रश्न पत्र लीक होने तक ही सीमित नहीं है, उन्होंने कहा कि विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के पूरे स्पेक्ट्रम को रोकने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि यह कानून प्रश्न पत्रों और उत्तर कुंजी के लीक होने, उत्तर पुस्तिकाओं और कंप्यूटर प्रणालियों के साथ छेड़छाड़, परीक्षा प्रक्रियाओं में हेरफेर, नकली वेबसाइटों और प्रवेश पत्रों के निर्माण से लेकर परीक्षाओं में अनुचित साधनों को सुविधाजनक बनाने के संगठित प्रयासों तक के अपराधों को व्यापक रूप से निपटता है। उन्होंने कहा कि ये प्रावधान परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के विभिन्न रूपों से निपटने में इस कानून के व्यापक स्वरूप को दर्शाते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने विनम्रता और खुले मन से संशोधन विधेयक पेश किया है। सरकार कानून को और मजबूत बनाने के लिए सदस्यों के रचनात्मक सुझावों का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का मुद्दा देश के हर माता-पिता, हर परिवार और हर नागरिक से जुड़ा है, क्योंकि इसका सीधा असर छात्रों की आकांक्षाओं और देश के भविष्य के मानव संसाधन पर पड़ता है।
शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने छात्रों के लिए अधिक शैक्षणिक अनुकूलता और अवसरों का विस्तार करके परिवर्तनकारी सुधार किए हैं। उन्होंने सदन को सूचित किया कि देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,293 हो गई है, जबकि उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 51,534 से बढ़कर 64,896 हो गई है।
चिकित्सा शिक्षा में सुधारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 22, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 844, स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या 51,300 से बढ़कर 1.39 लाख और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों की संख्या 31,000 से बढ़कर 86,300 हो गई है, जिससे बेहतर मेडिकल शिक्षा अधिक सुलभ और आसान हो गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने शैक्षिक अवसरों और रोजगार के विस्तार के लिए सरकार की पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब देश भर में 400 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खुल गए हैं। रोजगार के अवसर सृजित करने पर उन्होंने कहा कि सरकारी नियुक्तियां 2004-2014 के दौरान 7.22 लाख से बढ़कर 2014-2024 के दौरान 10.96 लाख हो गईं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने बैकलॉग वाली रिक्तियों को भर दिया है और पब्लिक सर्विस में करियर में तरक्की को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रमोशन अभियान चलाए हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के ज़रिए युवाओं में उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया है। उन्होंने सदन को बताया कि मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या इस पहल की शुरुआत के समय लगभग 350-400 थी, जो आज बढ़कर लगभग 2.4 लाख हो गई है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। उन्होंने नवाचार, अनुसंधान और बौद्धिक संपदा सृजन में महत्वपूर्ण वृद्धि का भी उल्लेख किया, भारत अब पीएचडी आउटपुट और पेटेंट फाइलिंग में अग्रणी देशों में शामिल है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) सहित प्रमुख भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित परीक्षाएं शामिल हैं। परीक्षा प्रणालियों में पहले से किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ सरकारी भर्तियों के लिए इंटरव्यू खत्म कर दिए गए हैं, ऑनलाइन आवेदन प्रणाली और उम्मीदवारों के अनुकूल परीक्षा प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं, प्रोविजनल आंसर की (अस्थायी उत्तर कुंजी) से पारदर्शिता बढ़ी है और साइबर सुरक्षा के उपाय मजबूत किए गए हैं। उन्होंने सदन को यह भी बताया कि कर्मचारी चयन आयोग में भर्ती की औसत प्रक्रिया की अवधि नौ महीने और आठ दिन से घटाकर आठ महीने और चौबीस दिन कर दी गई है। प्रतिभा सेतु पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पोर्टल सिविल सेवा के मेधावी उम्मीदवारों को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए बनाया गया है और इस प्लैटफॉर्म पर 335 निजी कंपनियां पहले ही पंजीकृत हो चुकी हैं।
मंत्री ने सदन को सूचित किया कि सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए गठित उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि समिति की 46 सिफारिशों में से 35 को पहले ही लागू किया जा चुका है, जिसमें आधार आधारित बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण, एआई-सक्षम चेहरे का प्रमाणीकरण, बहु-स्तरीय तलाशी, सीसीटीवी निगरानी, सिग्नल जैमर, राज्य और जिला समन्वय समितियां, शिकायत निवारण तंत्र और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी का पुनर्गठन शामिल है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता को मजबूत करने के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों, छात्रों और समाज की सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार सभी संबंधित पक्षों से रचनात्मक सुझावों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करना जारी रखेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह निष्पक्ष, पारदर्शी, विश्वसनीय और अनुचित साधनों से मुक्त रहे, और साथ ही लाखों छात्रों और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों की आकांक्षाओं का भी ध्यान रखा जा सके।
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