भारत

वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पहली बार पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) बेसलाइन रिपोर्ट जारी होने से साक्ष्य आधारित ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिला

सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को स्थानीय स्तर पर कार्यान्वित करने और जमीनी स्तर पर शासन को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) जारी किया है – जो देश भर में 2 लाख 50 हज़ार से अधिक ग्राम पंचायतों (जीपी) की प्रगति को मापने का परिवर्तनकारी उपकरण है। पीएआई स्थानीयकृत एसडीजी (एलएसडीजी) के नौ विषयों में पंचायतों का प्रदर्शन दर्शाता है। इनमें पंचायत में गरीबी मुक्त और बेहतर आजीविका, स्वस्थ पंचायत, बाल-अनुकूल पंचायत, जल-पर्याप्त पंचायत, स्वच्छ और हरित पंचायत, आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचे वाली पंचायत, सामाजिक रूप से न्यायसंगत और सामाजिक रूप से सुरक्षित पंचायत, सुशासन युक्त पंचायत और महिला-अनुकूल पंचायत शामिल हैं। ये विषय वैश्विक लक्ष्यों को ग्रामीण वास्तविकताओं के साथ जोड़ते हैं, जिससे स्थानीय सरकारों को समग्र विकास के लिए अपनी नीति निर्धारित करने में मदद मिलती है।

पंचायत उन्नति सूचकांक के राज्यवार आकलन में गुजरात 346 ग्राम पंचायतों के साथ अग्रणी है, उसके बाद 270 ग्राम पंचायतों के साथ तेलंगाना दूसरे स्थान पर है। अधिक संख्या में बेहतर मानक प्रदर्शन करने वाले राज्यों में गुजरात (13781), महाराष्ट्र (12,242), तेलंगाना (10099) के साथ मध्य प्रदेश (7,912) और उत्तर प्रदेश (6593) शामिल हैं, जबकि बिहार, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में आकांक्षी ग्राम पंचायतों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो केंद्रित विकास प्रयासों की आवश्यकता वाले क्षेत्रों को उजागर करता है। 2022-23 के पंचायत उन्नति सूचकांक आंकड़ों से पता चलता है कि 2,55,699 ग्राम पंचायतों में से 2,16,285 ने मान्य डेटा प्रस्तुत किए। इनमें 699 (0.3%) पंचायतें अग्रणी रूप में उभरीं, 77,298 (35.8%) का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि 1,32,392 (61.2%) आकांक्षी पंचायतें थीं। 5,896 (2.7%) ग्राम पंचायतें आरंभिक स्तर पर थीं। कोई भी ग्राम पंचायत पूर्ण लक्ष्‍य प्राप्‍तकर्ता नही रही। अब तक इसकी अंतर-राज्यीय तुलना नहीं की गई है।

पंचायत उन्नति सूचकांक के बारे में

पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) एक समग्र सूचकांक है और इसे 435 अद्वितीय स्थानीय संकेतकों (331 अनिवार्य और 104 वैकल्पिक) के आधार पर संकलित किया गया है, जिसमें सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के राष्ट्रीय संकेतक फ्रेमवर्क (एनआईएफ) के साथ संरेखित एलएसडीजी (सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण) के 9 विषयों में 566 अद्वितीय डेटा अंक शामिल हैं, पीएआई भागीदारी, नीचे से ऊपर के विकास के माध्यम से सतत विकास लक्ष्‍य 2030 एजेंडा प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता दर्शाता है। विभिन्न ग्राम पंचायतों द्वारा प्राप्त पीएआई स्कोर और विषयगत स्कोर के आधार पर, इन ग्राम पंचायतों को प्रदर्शन की विभिन्‍न श्रेणियों में रखा गया है – पूर्ण लक्ष्‍य प्राप्‍तकर्ता अचीवर: (90+), अग्रणी-फ्रंट रनर : (75 से 90 से नीचे); बेहतर प्रदर्शन-परफॉर्मर : (60 से 75 से नीचे); आकांक्षी-एस्पिरेंट: (40 से 60 से नीचे) और आरंभिक स्‍तर पर-बिगनर्स (40 से नीचे)।

पंचायत उन्नति सूचकांक-पीएआई का उद्देश्य स्थानीय सतत विकास लक्ष्‍य हासिल करने में जमीनी स्तर की संस्थाओं द्वारा की गई प्रगति का आकलन और मापन करना है, जिससे एसडीजी 2030 की प्राप्ति में योगदान प्राप्‍त हो सके। पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) एक बहु-डोमेन और बहु-क्षेत्रीय सूचकांक है जिसका उपयोग पंचायतों के समग्र विकास, प्रदर्शन और प्रगति के आकलन के लिए किया जाता है। यह सूचकांक किसी पंचायत के अधिकार क्षेत्र में स्थानीय समुदायों के कल्‍याण और विकास की स्थिति के आकलन के लिए विभिन्न सामाजिक-आर्थिक संकेतकों और मापदंडों को अपनाता है। पीएआई का एक उद्देश्य विभिन्न एलएसडीजी विषयों में हासिल अंकों के माध्यम से पंचायतों के विकास अंतराल की पहचान करना और पंचायत को जमीनी स्तर पर साक्ष्य-आधारित योजना के लिए सक्षम बनाना है। समय के साथ पीएआई के परिणाम पंचायतों द्वारा हासिल अंकों के आधार पर बढ़ती प्रगति को दर्शाएंगे। वित्त वर्ष 22-23 के लिए पहला आधारभूत पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) स्थानीय लक्ष्य निर्धारित करने, कार्रवाई योग्य बिंदुओं की पहचान करने और वांछित लक्ष्यों की प्राप्‍ति के उद्देश्य से साक्ष्य-आधारित पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह सूचकांक ग्रामीण भारत की आवश्‍यकता के अनुरूप है और उन्हें जमीनी स्तर पर प्रासंगिक बनाता है। पीएआई आकलन के एक उपकरण के रूप में कार्य करता है और पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है। इसके अतिरिक्‍त, पीएआई के माध्यम से एकत्र आंकड़े साक्ष्य-आधारित योजना के लिए आधार रेखा के रूप में कार्य करते हैं, जिससे पंचायतें विकास के अंतर की पहचान कर सकती हैं, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर सकती हैं और संसाधनों को अधिक प्रभावी ढंग से आवंटित कर सकती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर अधिक रणनीतिक और प्रभावशाली शासन हो सकता है। यह राज्य सरकारों से लेकर संसद सदस्यों तक सभी स्तरों पर नीति निर्माताओं को जमीनी स्तर पर प्रगति का आकलन करने और इसी अनुरूप नीतियों को संशोधित करने में सक्षम बनाता है।

पंचायत उन्नति सूचकांक विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के सहयोग से संभव हो पाया है। इन हितधारकों ने आवश्यक आंकड़े साझा किए जो सूचकांक की रीढ़ हैं और इसे विकास की निगरानी का व्यापक उपकरण बनाते हैं। 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 2 लाख 16 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें पहले ही समर्पित पीएआई पोर्टल में अपना डेटा दर्ज कर चुकी हैं और अंतिम सूचकांक में शामिल किए जाने से पहले प्रत्येक प्रविष्टि का सावधानीपूर्वक सत्यापन किया जाता है। पीएआई पोर्टल ( www.pai.gov.in ) एक सुदृढ़, बहुभाषी डेटा प्रबंधन प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है, जो पंचायतों को अपने विकास मैट्रिक्स को दर्ज करने और ध्‍यान रखने में सक्षम बनाता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सत्यापन के साथ 2 लाख 16 हजार से अधिक पंचायतों के आंकड़े संसाधित किए गए हैं।

भारत 2030 एसडीजी लक्ष्यों की ओर अग्रसर है, ऐसे में पीएआई ग्रामीण शासन में एक ऐतिहासिक नवाचार के रूप में सहयोग दे रहा है जो पारदर्शिता, दक्षता और समुदाय-केंद्रित विकास को बढ़ावा देता है। अधिक जानकारी और विस्तृत रिपोर्ट के लिए, www.pai.gov.in पर जाएं।

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