दिल्ली विधानसभा ने स्कूल फीस विनियमन विधेयक पारित कर दिया है। इसका उद्देश्य दिल्ली के गैर-सरकारी स्कूलों में मनमाने तरीके से फीस वृद्धि पर रोक लगाना है।
इस विधायक के पारित होने से मनमानी फीस वृद्धि से परेशान अभिभावकों को राहत मिलेगी। प्राइवेट स्कूलों को ऑफिस बढ़ोतरी से पहले बच्चों के माता-पिता की सहमति लेनी होगी। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि अगर एक भी अभिभावक फीस वृद्धि के प्रस्ताव से असहमत है। तो उसे मंजूरी नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अभिभावकों के पास वीटो शक्ति होगी और प्रबंधन उन पर अपना एक तरफा निर्णय नहीं थोप सकता।
इस विधेयक के अनुसार मनमानी ढंग से फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उनसे भविष्य में फीस बढ़ाने का प्रस्ताव देने का अधिकार भी छीना जा सकता है। पहली बार उल्लंघन करने पर स्कूलों पर एक लाख रूपये से पांच लाख रूपये के बीच जुर्माना लगाया जाएगा। बार-बार उल्लंघन करने पर जुर्माना 10 लाख रुपए तक हो सकता है।
इसके अलावा निर्धारित अवधि के भीतर अतिरिक्त फीस वापस न करने पर 20 दिनों के बाद जुर्माना दोगुना, 40 दिनों के बाद तीन गुणा, और प्रत्येक 20 दिन की देरी पर और बढ़ता जाएगा। विधेयक में शुल्क नियमन प्रक्रिया की निगरानी के लिए तीन समितियों के गठन का भी प्रावधान है।
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