प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता प्रकट करते हुए कहा है कि दुनिया भर में पेट्रोल और डीज़ल का संकट बढ़ रहा है। आज आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मौजूदा समय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि भारत की ऊर्जा ज़रूरतों के एक बड़े हिस्से की पूर्ति पश्चिम एशिया से ही होती है।
उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय के साथ भारत के संबंधों, तमाम देशों से मिल रहे सहयोग और पिछले दशक में भारत के अभ्युदय के कारण देश इस परिस्थितियों से निपटने में सक्षम हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि कोविड काल की तरह, मौजूदा संकट से भी भारत उबर जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय रहते हैं। उन्होंने 1 करोड़ से अधिक भारतीयों को हर तरह की सहायता देने के लिए खाड़ी देशों को धन्यवाद दिया और लोगों से अपील की कि वे सामूहिक रूप से इस चुनौती का मुका़बला करें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे के राजनीतिकरण से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह 140 करोड़ देशवासियों के हित का मामला है और इसमें स्वार्थगत राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि इस मामले में अफ़वाह फैलाने वाले लोग देश को नुक़सान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने देशवासियों से अफ़वाहों के प्रति सतर्क रहने और केवल सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने ज्ञान भारतम् सर्वेक्षण की चर्चा की जो भारत की महान संस्कृति और धरोहर को प्रदर्शित करने के लिए जन-भागीदारी की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य देशभर से पांडुलिपियों के संबंध में सूचना जुटाना है। प्रधानमंत्री ने अनुरोध किया कि जिन लोगों के पास पांडुलिपि या इसके बारे में सूचना हो, वे इसे ज्ञान भारतम ऐप पर साझा करें। उन्होंने कहा कि अब तक हज़ारों पांडुलिपियां प्राप्त हो चुकी हैं और प्रत्येक प्रविष्टि का सत्यापन किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के नमसाई के चाओ नान्तिसिंध लोकांग ने ताई लिपि और अमृतसर के अमित सिंह राणा ने गुरमुखी में उपलब्ध पांडुलिपि साझा की है। कुछ संगठनों ने ताड़पत्र पर लिखी पांडुलिपियां उपलब्ध कराई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राजस्थान के अभय जैन पुस्तकालय ने ताम्रपत्र पर लिखी पांडुलिपि भेजी है। इसी प्रकार, लद्दाख के हेमिस बौद्धविहार से तिब्बती पांडुलिपि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
ज्ञान भारतम् सर्वेक्षण इस वर्ष मध्य जून तक जारी रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सर्वेक्षण के ज़रिए अपनी-अपनी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को साझा करने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में माई भारत संगठन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है क्योंकि यह देश के युवाओं के सकारात्मक कार्यों से जोड़ रहा है। उन्होंने माई भारत द्वारा हाल ही में आयोजित बजट प्रतियोगिता की चर्चा की जिसका उद्देश्य युवाओं को बजट प्रक्रिया और नीति निर्माण की जानकारी देना था। इस क्विज से लगभग एक लाख साठ हज़ार प्रतिभागियों को निबंध प्रतियोगिता के लिए चुना गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस प्रतियोगिता के लिए प्राप्त कुछ आलेखों को पढ़ा है जिनसे पता चलता है कि आज का युवा देश के विकास में योगदान करना चाहता है।
उन्होंने तेलंगाना के सूर्यापेट के कोटला रघुवीर रेड्डी, उत्तरप्रदेश के बाराबांकी के सौरभ बैसवार और बिहार के गोपालगंज के सुमीत कुमार की खासतौर से चर्चा की जिन्होंने किसानों के मुद्दे पर निबंध लिखे हैं। इसी प्रकार, पंजाब में मोबाली की आंचल, ओडिशा में केंद्रपाड़ा के ओम प्रकाश रथ ने महिलाओं के नेतृत्व में विकास को बढ़ावा देने पर विचार साझा किए हैं।
हरियाणा के यमुनानगर से प्रथम बरार ने लिखा है कि हरित और स्वच्छ भारत ही खुशहाली का एकमात्र विकल्प है। दिल्ली के शंख गुप्ता का सुझाव है कि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं की पहचान के प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने विचार साझा करने वाले सभी युवाओं की सराहना की और कहा कि ये विचार देश को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में संपन्न टी-20 क्रिकेट विश्वकप में भारतीय टीम की जीत पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कर्नाटक के हुबली में, जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के रणजी ट्रॉफी जीतने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। जम्मू-कश्मीर ने लगभग सात दशक बाद पहली बार रणजी ट्रॉफी जीती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सफलता वर्षों के अनवरत प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कप्तान पारस डोगरा और युवा कश्मीरी गेंदबाज आकिब नबी के प्रदर्शन की भी सराहना की, जिन्होंने 60 विकेट लिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के लोगों में खेलों के प्रति ज़बरदस्त जुनून है और अब यह बड़े खेल आयोजन का केन्द्र बन रहा है। गुलमर्ग, पहले ही खेलो इंडिया शीतकालीन खेल के आयोजक के तौर पर अपनी पहचान बना चुका है। फुटबॉल जैसे खेल भी यहां बहुत लोकप्रिय हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तरप्रदेश के गुलवीर सिंह की चर्चा की जिन्होंने न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन में तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रचा है। उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में, स्क्वॉश का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाली अनाहत सिंह की भी प्रशंसा की। इस जीत के साथ अनाहत विश्व रैंकिंग में शीर्ष 20 में पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की एशियाई खिलाड़ी बन गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अस्मिता एथलेटिक्स लीग का भी उल्लेख किया जिसमें महिला दिवस पर 8 मार्च को कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
प्रधानमंत्री मोदी ने फिटनेस पर भी ध्यान देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में योग के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने अफ्रीका के जिबूती के अल्मिस का जिक्र किया जहां अरविंद योग केंद्र में योग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने लोगों से चीनी का सेवन कम करने की अपील भी की। उन्होंने इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर युवराज दुआ की एक पोस्ट का उल्लेख किया जिसमें प्रधानमंत्री से अपने पिता को चीनी का सेवन कम करने के लिए कहने का अनुरोध किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि खाद्य तेल का उपयोग 10 प्रतिशत तक कम करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से मोटापे और जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव संभव है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु में शिक्षा से जुड़ी एक अनूठी पहल की जानकारी दी। बेंगलुरु की एक टीम प्रयोग शिक्षा अनुसंधान संस्थान चला रही है जिसने अन्वेषण नाम से एक प्रयोग शुरू किया है। इसमें नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान, भूविज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में नवाचार का अवसर मिल रहा है।
प्रधानमंत्री ने नागा समुदाय की सराहना की जो अतीत को संरक्षित कर रहा है और शिक्षा के माध्यम से भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि नागा जनजातियों में मोरंग शिक्षा प्रणाली में बुजुर्ग अपने समुदाय के युवाओं कोपारंपरिक ज्ञान, इतिहास और जीवन कौशल से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ ही जल संरक्षण के प्रति नये सिरे से प्रतिबद्धता व्यक्त करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ से लोगों में व्यापक जागरूकता आई है और देशभर में लगभग 50 लाख कृत्रिम जल संचयन केंद्र बनाए गए हैं। जल संकट से निपटने के लिए अब प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देश भर में लगभग 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने जन-भागीदारी से जल संरक्षण संबंधी कुछ प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए। उन्होंने त्रिपुरा के जम्पुई पहाड़ियों में तीन हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित वांगमुन गांव की चर्चा की जहां गंभीर जल संकट से निजात के लिए लगभग हर घर की छत पर वर्षाजल संचयन प्रणाली स्थापित की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की एक अनूठी पहल की जानकारी दी जहां किसानों ने खेतों में छोटे पुनर्भरण तालाब और सोख्ते बनाए हैं। इससे बारिश का पानी धीरे-धीरे जमीन में रिस जाता है। इस मॉडल को इलाक़े के 12 सौ से अधिक किसानों ने अपनाया है। इसी प्रकार, तेलंगाना के मंचरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव में भी चार सौ परिवारों ने अपने घरों में सोख्ते बनाए हैं। इससे इन इलाक़ों के भू-जल स्तर में सुधार हुआ है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में काफी कमी आई है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार मछुआरों का जीवन आसान बनाने के लिए पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि मछुआरे आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बंदरगाह विकास और मछुआरों के लिए बीमा योजनाएं उपयोगी साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अब मछुआरों को मौसम की जानकारी मिल रही है, मत्स्य-पालन और समुद्री शैवाल के क्षेत्र में नवाचार हो रहे हैं और मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भुयान का उदाहरण दिया जिन्होंने हीराकुंड में मछली पालन को महज दो-तीन वर्ष में ही एक सफल व्यवसाय में बदल दिया है।
प्रधानमंत्री ने लक्षद्वीप के मिनिकॉय की हव्वा गुलजार का भी जिक्र किया, जो पहले मछली प्रसंस्करण इकाई चलाती थीं। कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के बाद से उनका व्यवसाय और बेहतर हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार की चर्चा की जिन्होंने एक तालाब फार्म बनाया और इस व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में, एक घंटे में 251 हजार से अधिक पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया गया है। यह हजारों लोगों की भागीदारी से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत देशभर में लाखों पेड़ लगाए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने नागालैंड के चिज़ामी गांव की महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से 150 से अधिक किस्मों के पारंपरिक बीजों का संरक्षण करने को प्रेरणादायी बताया। इन बीजों को गांव की महिलाओं द्वारा संचालित सामुदायिक बीज बैंक में संरक्षित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का प्रभाव देश के हर कोने में देखा जा रहा है। इस योजना के तहत गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की पायल मुंजपारा ने सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी में चार महीने का पाठ्यक्रम किया और अब वह एक कुशल सौर ऊर्जा उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। इसी प्रकार, मेरठ के अरुण कुमार भी अब अपने क्षेत्र में ऊर्जा प्रदाता बन गए हैं। जयपुर के मुरलीधर की खेती पहले डीजल पंप से होती थी जिस पर हर साल हजारों रुपये खर्च होते थे। सौर पंप अपनाने के बाद उनकी खेती का तरीका पूरी तरह बदल गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों को लाभ मिल रहा है। त्रिपुरा में रियांग जनजाति के कई गांव अब सौर मिनी-ग्रिड से रोशन रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से सौर ऊर्जा क्रांति में शामिल होने और दूसरों को भी इससे जोड़ने का आग्रह किया।
अंत में, प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने आसपास की प्रेरणादायक कहानियां साझा करते रहने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन संदेशों के कारण भी दूर-दराज के लोग मन की बात को उत्साहपूर्वक सुनते हैं।
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