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TBD ने स्वदेशी प्वाइंट-ऑफ-केयर रीनल डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म प्रोफ्लो-यू के व्यावसायीकरण के लिए बायोटेक स्टार्टअप प्रांटे सॉल्यूशंस के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए

केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण और सस्ते दर, सुलभ और प्रौद्योगिकी-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य के अनुरूप, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने ओडिशा स्थित प्रांटे सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ गुर्दे की देखभाल संबंधी अभिनव निदान उत्पाद: प्रोफ्लो-यू फॉर पॉइंट-ऑफ-केयर किडनी हेल्थ असेसमेंट नाम की परियोजना के लिए वित्तीय सहायता संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। परियोजना का उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर गुर्दे की बीमारी और गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं का शीघ्र पता लगाना और उनकी निगरानी करना है।

भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज (गुर्दे धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते जिससे यह रक्त को साफ करने और अपशिष्ट निकालने में असमर्थ हो जाता है) एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, अनुमानतः हर साल दो लाख से अधिक मरीज अंतिम चरण की किडनी रोग की श्रेणी में पहुंच जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और वृद्धावस्था सहित उच्च जोखिम वाली लोगो में मूत्र में एल्ब्यूमिन, क्रिएटिनिन और मूत्र एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात को मापकर किडनी की कार्यक्षमता के बायोमार्करों के माध्यम से शीघ्र निदान आवश्यक है। ये बायोमार्कर, प्रीक्लेम्पसिया (गर्भावस्था की 20 सप्ताह के बाद होने वाली गंभीर स्थिति जो उच्च रक्तचाप, मूत्र में प्रोटीन की उच्च मात्रा से किडनी/लिवर को क्षति पहुंचाती है) जैसी गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के शीघ्र निदान के लिए भी महत्वपूर्ण हैं और प्रसवपूर्व देखभाल के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद- आईसीएमआर की आवश्यक निदान सूची में शामिल हैं। हालांकि, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर विश्वसनीय समाधान सीमित हैं, क्योंकि सर्वश्रेष्ठ इम्यूनोटर्बिडोमेट्रिक विधियां (प्रयोगशाला तकनीक जिसका उपयोग रक्त या शरीर के तरल पदार्थों में विशिष्ट प्रोटीनों, एंटीबॉडी या एंटीजन की मात्रा मापने के लिए किया जाता है) प्रयोगशालाओं तक ही सीमित हैं और पारंपरिक डिपस्टिक विधियों (रसायनीकृत प्लास्टिक की पट्टी को नमूने में डुबोया जाता है, जो मौजूद पदार्थों ग्लूकोज, प्रोटीन, पीएच के आधार पर रंग बदलती है। यह विधि यूटीआई, मधुमेह और किडनी की बीमारियों के शुरुआती पता लगाने के लिए उपयोगी है) में प्रारंभिक निदान श्रेणियों में संवेदनशीलता की कमी रहती है।

इस महत्वपूर्ण अंतर को पाटने के लिए, प्रांटे सॉल्यूशंस ने प्रोफ्लो-यू विकसित किया है , जो अभिनव, पेटेंटकृत, स्वदेशी पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म है, जिसमें निम्नलिखित विशिष्टता शामिल हैं:

• मूत्र एल्ब्यूमिन मापन किट – यह नैनो-सेंसर आधारित इन विट्रो डायग्नोस्टिक चिकित्सा उपकरण है, जिसे तीन स्वीकृत भारतीय पेटेंट (संख्या 360496, 308432, 543714) और एक पीसीटी आवेदन (पीसीटी/आईएन2023/050508) के आधार पर विकसित किया गया है। यह किट परिवेशी तापमान स्थिरता के साथ पता लगाने की व्यापक सीमा (20–1200 मिलीग्राम/लीटर) प्रदान करती है।

• मूत्र क्रिएटिनिन मापन किट – कमरे के स्थिर तापमान वाला इन विट्रो डायग्नोस्टिक उपकरण हैं जिसमें पता लगाने की व्यापक सीमा सीमा (150–4000 मिलीग्राम/लीटर) है।

• पोर्टेबल मूत्र विश्लेषक – स्वदेशी तौर पर विकसित, अवशोषण और प्रतिदीप्ति प्रौद्योगिकी युक्त पेटेंट प्राप्त विश्लेषक है। यह हल्का, रिचार्जेबल उपकरण ब्लूटूथ और आपस में जुड़े उपकरणों के सामूहिक नेटवर्क इंटरनेट ऑफ थिंग्स सक्षम है, और प्रोफ्लो-यू मोबाइल एप्लिकेशन के साथ एकीकृत है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग सुविधाएं और अंशांकन-मुक्त कार्यक्षमता शामिल हैं।

इस परियोजना में ओडिशा में प्रोफ्लो-यू के उत्पादन बढ़ाने और इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, निदान नेटवर्क और प्रसवपूर्व देखभाल प्रणालियों में सुलभ बनाने के लिए विनिर्माण और व्यावसायीकरण सुविधा स्थापित का विचार है। उत्पाद का उच्च-स्तरीय नैदानिक ​​विधियों के आधार पर कठोरता से सत्यापन किया गया है और इसे प्रयोगशाला-स्तरीय सटीकता के साथ ही प्वाइंट-ऑफ-केयर परीक्षण (रोगी के पास या घर पर ही तत्काल किए जाने वाले शुगर या प्रेगनेंसी टेस्ट जैसे नैदानिक परीक्षण हैं। पारंपरिक प्रयोगशाला परीक्षणों के विपरीत, यह बिना नमूना बाहर भेजे जल्द परिणाम देता है, जिससे त्वरित उपचार निर्णय लेना संभव होता है) की सरल परिचालन क्षमता को संयोजित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस अवसर पर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि प्रांटे सॉल्यूशंस को दी गई सहायता स्वदेशी निदान क्षमताओं को सुदृढ़ करने और अंतिम छोर तक सस्ते दर पर स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकी सक्षम बनाने के लिए टीडीबी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रोफ्लो-यू जैसी पॉइंट-ऑफ-केयर नवाचारों में शीघ्र निदान और समय पर सहायता से बीमारियों का बोझ कम करने की क्षमता है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार और स्वास्थ्य देखभाल व्यय में कमी आएगी।

प्रांते सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापकों ने प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के समर्थन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहायता से स्वदेशी तौर विकसित प्वाइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म प्रोफ्लो-यू के निर्माण और देशव्यापी स्थापन में तेजी आएगी। यह प्लेटफॉर्म गुर्दे की बीमारी और गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का शीघ्र पता लगाने में मौजूद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड का समर्थन इसके ट्रांसलेशनल बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान (वैज्ञानिक अनुसंधान का उपयोग सीधे मानव स्वास्थ्य और चिकित्सा में सुधार करने) को मान्यता देता है और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप किफायती, विश्वसनीय और प्रौद्योगिकी-आधारित स्वास्थ्य सेवा समाधान प्रदान करने के मिशन को मजबूती प्रदान करता है।

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