TDB-DST ने अगली पीढ़ी की मल्टी-सेंसर सैटेलाइट प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए गैलेक्स आई के साथ 63.84 करोड़ रुपये की आरडीआई सहायता का समझौता किया
हाई-रिज़ॉल्यूशन अर्थ ऑब्ज़र्वेशन (पृथ्वी की निगरानी) के लिए एसएआर और ऑप्टिकल इमेजिंग को मिलाने वाली स्वदेशी ऑप्टो एसएआर प्रौद्योगिकी रणनीतिक और उभरती हुई प्रौद्योगिकी में प्राइवेट सेक्टर के रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की भारत सरकार की पहल को आगे बढ़ाते हुए, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) ने मेसर्स गैलेक्स आई स्पेस सॉल्यूशंस प्रा. लि., बेंगलुरु के साथ रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) फंड के तहत 63.84 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस प्रोजेक्ट की कुल मंज़ूर लागत 247.69 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य एक ऐसा मल्टी-सेंसर सैटेलाइट विकसित करना है जो हाई-रिज़ॉल्यूशन (<0.5 मीटर) ऑप्टो एसएआर इमेजिंग करने में सक्षम हो और इस प्रौद्योगिकी को टीआरएल -6 से टीआरएल -9 तक ले जाए। यह सहायता ‘ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स’ (ओसीडी) के ज़रिए दी जाएगी। गैलेक्स आई प्रोजेक्ट का मुख्य हिस्सा ऑप्टो एसएआर है, जो पृथ्वी को देखने के दो बिल्कुल अलग तरीकों — सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर ) और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (ईओ) इमेजिंग — को एक साथ लाता है।
हालांकि ऑप्टिकल इमेजिंग बहुत विस्तृत विज़ुअल जानकारी दे सकती है, लेकिन बादलों और रोशनी की स्थिति इसकी प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर, एसएआर दिन की रोशनी की परवाह किए बिना काम कर सकता है और बादलों के बीच से भी इमेजिंग कर सकता है। प्रस्तावित सिस्टम एसएआर और ईओ डेटा के फ्यूज़न (मिलाप) के ज़रिए इन पूरक क्षमताओं को एक साथ लाने का प्रयास करता है, जिससे पृथ्वी की ज़्यादा बेहतर और लगातार तस्वीर मिल सकेगी।
प्रस्तावित सैटेलाइट को 0.5 मीटर से कम रिज़ॉल्यूशन वाली इमेजिंग प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस प्रौद्योगिकी का उद्देश्य बड़े भू-भाग और लंबी दूरी की निगरानी, इंसानों और वाहनों का पता लगाने और टारगेट की पहचान करने जैसे कामों में मदद करना है, साथ ही अलग-अलग मौसम और रोशनी की स्थितियों में इमेजिंग को सक्षम बनाना है।
यह प्रोजेक्ट प्रौद्योगिकी को परिपक्व बनाने का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। आरडीआई सहायता से गैलेक्स आई को आगे का डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग, टेस्टिंग और वैलिडेशन करने में मदद मिलेगी, जो प्रौद्योगिकी को टीआरएल -6 से टीआरएल -9 तक ले जाने के लिए ज़रूरी है।
टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा, “भारत का स्पेस इकोसिस्टम ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहाँ देश के भीतर ही एडवांस्ड प्रौद्योगिकी को विकसित और तैनात करने की क्षमता और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। आरडीआई फंड, एडवांस्ड डेवलपमेंट और तैनाती के बीच के अहम चरणों में ऐसी प्रौद्योगिकी-प्रधान कोशिशों को सपोर्ट करने के लिए एक महत्वपूर्ण जरिया प्रदान करता है। गैलेक्स आई के साथ हुआ समझौता, उभरती हुई स्पेस प्रौद्योगिकी में स्वदेशी क्षमताओं को सक्षम करने और उनके कमर्शियलाइज़ेशन की दिशा में उनके सफर को सपोर्ट करने पर टीडीबी के फोकस को दर्शाता है।”
मेसर्स गैलेक्स आई स्पेस सॉल्यूशंस प्रा. लि. के प्रवर्तकों ने कहा, ” आरडीआई फंड के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड से मिलने वाला सपोर्ट हमें अपनी ऑप्टो एसएआर प्रौद्योगिकी के डेवलपमेंट और वैलिडेशन में तेज़ी लाने में सक्षम बनाएगा। एसएआर और ऑप्टिकल सेंसिंग को मिलाकर, हम पृथ्वी-अवलोकन की ऐसी क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं जो मौसम और रोशनी की विभिन्न स्थितियों में हाई-रिज़ॉल्यूशन जानकारी प्रदान कर सके। यह साझेदारी प्रौद्योगिकी को टीआरएल -9 तक ले जाने और उसके बाद उसकी तैनाती के लिए महत्वपूर्ण होगी।”





