भारत

TDB-DST ने मेसर्स ऑटोक्रेसी मशीनरी की खाई खोदने की स्वदेशी तकनीक का समर्थन किया

भारत के बुनियादी ढांचे और मशीनरी विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने हैदराबाद स्थित मेसर्स ऑटोक्रेसी मशीनरी प्राइवेट लिमिटेड को उनके प्रोजेक्ट “अत्याधुनिक ट्रेंचर प्रौद्योगिकी का व्यावसायीकरण” के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। बोर्ड ने इस पहल के लिए वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है, जो भारत के ट्रेंचिंग और भूमिगत बुनियादी ढांचे के परिदृश्य को घरेलू, भू-अनुकूलित समाधानों के साथ बदलने के लिए तैयार है।

ट्रेंचिंग तकनीक ऑप्टिकल फाइबर केबल, पानी और गैस पाइपलाइन बिछाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और सौर ऊर्जा, कृषि और रक्षा जैसे क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण सक्षमकर्ता है। जबकि आज उपयोग में आने वाले ट्रेंचर ज्यादातर आयातित हैं और अक्सर भारत की परिस्थितियों के अनुकूल नहीं होते हैं, मेसर्स ऑटोक्रेसी मशीनरी की स्वदेशी रूप से विकसित रेंज- रुद्र 100एक्‍सटी, रुद्र 100, जीएजेए 200एक्‍सटी, ध्रुव 100, और वीएएच 150- विशेष रूप से भारतीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये ट्रैक्टर से लगे उपकरण न्यूनतम मिट्टी के व्यवधान के साथ खाई की उच्च-खुदाई सुनिश्चित करते हैं, जिससे इनकी शहरी, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में तैनाती करने में आसानी होती है।

पहली पीढ़ी की उद्यमी संतोषी सुषमा बुद्धिराजू द्वारा संचालित, ऑटोक्रेसी मशीनरी एक स्टार्टअप है जिसका उद्देश्य भारत को विशेष निर्माण और कृषि उपकरणों के लिए एक वैश्विक केन्‍द्र के रूप में स्थापित करना है। स्‍वदेशी आरएंडडी टीम और अभिनव, अनुकूलन योग्य समाधानों के प्रति समर्पण के साथ, कंपनी घरेलू मांग और निर्यात क्षमता दोनों को पूरा करने के लिए एक पूर्ण पैमाने पर विनिर्माण सुविधा स्थापित कर रही है।

  • टीडीबी द्वारा समर्थित इस पहल से महत्वपूर्ण रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक लाभ होंगे:
  • महत्वपूर्ण उपकरणों के पूर्ण स्वदेशीकरण के माध्यम से आयात निर्भरता में कमी
  • अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के लिए वैश्विक मानकों के अनुसार डिज़ाइन किए गए निर्यात के लिए तैयार ट्रेंचर
  • रोजगार सृजन और कौशल विकास, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में
  • स्थानीयकृत घटक आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से एमएसएमई सशक्तिकरण
  • एक मजबूत घरेलू मशीनरी इकोसिस्‍टम विकसित करके आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना
  • कुशल ट्रेंचिंग और कम परियोजना पदचिह्न के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता

इस अवसर पर, टीडीबी सचिव, राजेश कुमार पाठक ने कहा: “ऑटोक्रेसी मशीनरी को टीडीबी का समर्थन स्टार्टअप को सक्षम करने की हमारी प्रतिबद्धता का उदाहरण है जो जमीन पर वास्तविक प्रभाव पैदा करते हैं। उनका नवाचार सीधे तौर पर डिजिटल और वास्‍तविक कनेक्टिविटी, विनिर्माण में आत्मनिर्भरता और भविष्य के लिए स्मार्ट बुनियादी ढांचे के निर्माण की भारत की कल्‍पना का समर्थन करता है।”

इस सहायता पर टिप्पणी करते हुए, मेसर्स ऑटोक्रेसी मशीनरी प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक संतोषी सुषमा बुद्धिराजू और लक्ष्मण वी. ने कहा: “हम भारत से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ट्रेंचर्स बनाने के हमारे दृष्टिकोण पर विश्वास करने के लिए टीडीबी के आभारी हैं। इस सहायता के साथ, हमारा लक्ष्य ठेकेदारों, किसानों और बुनियादी ढाँचा प्रदाताओं को कुशल, टिकाऊ और भारत में निर्मित समाधानों के साथ सशक्त बनाना है। हम केवल मशीनें नहीं बना रहे हैं – हम भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढाँचे की नींव रख रहे हैं।”

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