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तीनों सेनाओं के दो दिवसीय प्रदर्शन – ‘शौर्य वेदनम उत्सव’ – की मोतिहारी में शुरूआत

तीनों सेनाओं की सैन्य शक्ति का जीवंत प्रदर्शन, शौर्य वेदनम उत्सव का पहली बार 07 मार्च, 2025 से बिहार के मोतिहारी में आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय कार्यक्रम सैन्य उपकरण, मार्शल आर्ट, सैन्य बैंड द्वारा सामूहिक प्रदर्शन, विशेष बलों द्वारा युद्ध प्रदर्शन, मोटरसाइकिल, डॉग शो और कई अन्य कार्यक्रमों के साथ जोश से प्रारंभ हुआ।

समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, संसद सदस्य और रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह, मध्य कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और तीनो सेनाओं, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों, एनसीसी कैडेटों और बिहार के नागरिकों की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को और भी समृद्ध बना दिया। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान इस अवसर पर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

राधा मोहन सिंह ने अपने संबोधन में मोतिहारी में इस तरह के बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इससे युवाओं को सशस्त्र बलों में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित करने में बड़ी सहायता मिलेगी। इस भव्य उत्सव में, दर्शकों को भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंक- टी-90, स्वदेशी के-9 वज्र स्व-चालित तोप, बीएमपी वाहन और घरेलू रूप से निर्मित हथियार ढूंढने वाले रडार (डब्ल्यूएलआर) स्वाति जैसी रक्षा शस्त्रों की प्रदर्शनी देखने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में भारतीय वायु सेना ने तीन सुखोई-30 लड़ाकू विमान, दो एएन 32 परिवहन विमान और चेतक हेलीकॉप्टरों के साथ फ्लाईपास्ट किया। वायुसेना की आकाश गंगा टीम ने 8,000 फीट की ऊंचाई से कूद का प्रदर्शन कर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। भारतीय नौसेना के कर्मियों ने आगंतुकों के साथ बातचीत की, नौसेना की त्रि-आयामी क्षमताओं के बारे में बताया और युवाओं को नौसेना शामिल होने के लिए प्रेरित किया। नौसेना बैंड के प्रदर्शनों ने सशस्त्र बलों के बीच संयुक्त समन्वय का परिचय देते हुए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सशस्त्र बलों के सभी बहादुरों के बलिदान का सम्मान करते हुए एक स्मारक स्थल पर स्थापित किया गया था। आगंतुकों को साहसी कार्यों और वीरता से अवगत कराया गया और इन शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। भारतीय वायुसेना और नौसेना के विमान वाहक, पनडुब्बी और विध्वंसक के मॉडल भी प्रदर्शित किए गए।

इस कार्यक्रम में आत्मनिर्भर भारत की तकनीक से प्रेरित शक्ति पर प्रकाश डाला गया, जिसमें टैंक और तोपों के स्वदेशी संस्करण शामिल थे। इस कार्यक्रम में कई जानकारीपूर्ण काउंटर और आकर्षक सैन्य प्रदर्शन भी सम्मिलित थे।

पुनर्वास निदेशालय द्वारा भूतपूर्व सैनिकों के लिए आयोजित एक जॉब फेयर ने एक अहम केंद्र के रूप में कार्य किया, जिसमें दूसरा करियर चुनने के लिए संसाधन, सहायता, नेटवर्किंग के अवसर प्रदान किए गए। भारतीय सेना के क्षेत्रीय भर्ती कार्यालयों ने युवाओं से संपर्क किया, उन्हें करियर के अवसरों और सैन्य सेवा में नवीनतम विकास के बारे में जानकारी प्रदान की।

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