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केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के सहयोग से आयोजित ‘खेल प्रशासन सम्मेलन’ को संबोधित किया

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज अहमदाबाद के वीर सावरकर खेल परिसर में सरकार द्वारा गुजरात सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के सहयोग से आयोजित खेल प्रशासन सम्मेलन को संबोधित किया।

इस सम्मेलन में राष्ट्रीय खेल संघों (एनएसएफ), राज्य ओलंपिक संघों के प्रतिनिधियों और भारतीय ओलंपिक संघ की कार्यकारी परिषद के सदस्यों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मांडविया ने भारत के खेल तंत्र के लिए सरकार की स्पष्ट और अटल प्राथमिकताओं को रेखांकित किया, जिसमें शासन सुधार, प्रतिस्पर्धी वातावरण, जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक प्रतिभाओं की पहचान और पोषण, कोचिंग तंत्र को मजबूत करना और खेल अवसंरचना, अकादमियों और लीगों में निजी क्षेत्र की भागीदारी का विस्तार करना शामिल है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों में सरकार ने एक मजबूत संस्थागत आधार तैयार किया है जो भारतीय खेलों में सुधार लाने के इरादे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम (एनएसजीए), खेलो भारत नीति, एएनएसएफ मानदंडों में सुधार और कोच भर्ती प्रणालियों में सुधार जैसी प्रमुख पहलों का हवाला देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “एक बार निर्णय लेने के बाद, सरकार ने उसके कार्यान्वयन में राजनीतिक इच्छाशक्ति और उद्देश्य की स्पष्टता दोनों की पुष्टि की है।”

डॉ. मांडविया ने सरकार की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि खेल संघों के भीतर लगातार बनी रहने वाली समस्याएं, आंतरिक राजनीति, भ्रष्टाचार, अनुचित चयन परीक्षण, खिलाड़ियों के साथ अन्याय, शासन संबंधी विवाद और वित्तीय अनियमितताओं का अब समाधान होना चाहिए।

डॉ. मांडविया ने कहा “हमारे लिए खिलाड़ी और राष्ट्र की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है,” हालांकि सरकार संघों की स्वायत्तता का सम्मान करती है, लेकिन सभी खेल निकायों को ईमानदारी, पारदर्शिता और खिलाड़ी-केंद्रित शासन के प्रति समान प्रतिबद्धता दर्शानी चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट का प्रभावी कार्यान्वयन स्वयं संघों पर निर्भर करेगा और उन्हें निष्पक्ष और समय पर चुनाव, वित्तीय पारदर्शिता, कार्यात्मक एथलीट आयोग, नैतिकता आयोग और निर्धारित शासन मानदंडों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

डॉ. मांडविया ने पेशेवर और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए प्रत्येक महासंघ से अगले 1, 3, 5 और 10 वर्षों के लिए एक स्पष्ट कार्यसूची तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खेल निकायों का संचालन पेशेवर तरीके से होना चाहिए, जिसमें योग्य मुख्य कार्यपालक अधिकारी, वित्तीय विशेषज्ञ, विपणन पेशेवर, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच और विशेष संचालन दल शामिल हों।

डॉ. मांडविया ने कहा कि सरकार जल्द ही प्रमुख नीतिगत पहल शुरू करेगी, जिसमें पारदर्शी और मानकीकृत चयन परीक्षण, “वन कॉर्पोरेट, वन स्पोर्ट” मॉडल और बेहतर एथलीट कल्याण पैकेज शामिल हैं।

डॉ. मांडविया ने खेल विज्ञान, पोषण, चोट प्रबंधन और उच्च प्रदर्शन सहायता में पहले से ही किए जा रहे महत्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश पर प्रकाश डालते हुए, संघों से सरकार की गति और महत्वाकांक्षा के अनुरूप काम करने का आग्रह किया।

भारत के दीर्घकालिक खेल दृष्टिकोण को दोहराते हुए, डॉ. मांडविया ने घोषणा की कि ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष 10 में स्थान प्राप्त करना एक राष्ट्रीय लक्ष्य है, और इस महत्वाकांक्षा को साकार करने में राष्ट्रीय खेल संघों और राज्य ओलंपिक संघों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा, “एशियाई गेम्स वर्ष 2026 से लेकर, प्रत्येक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदर्शन में लगातार सुधार होना चाहिए। राष्ट्रमंडल खेल 2030 में भारत को मेजबान और एक खेल शक्ति के रूप में ऐतिहासिक सफलता के साथ उभरना चाहिए।”

डॉ. मांडविया ने वर्तमान दौर को भारतीय खेलों का स्वर्ण युग बताते हुए जवाबदेही के सशक्त संदेश के साथ कहा कि “इतिहास हमारी वर्तमान उपलब्धियों को याद रखेगा और हमारी असफलताओं को कभी माफ नहीं करेगा।”

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