केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने महाराष्ट्र में दो कोयला गैसीकरण परियोजनाओं का भूमि पूजन किया
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने महाराष्ट्र के अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ चंद्रपुर, महाराष्ट्र में दो कोयला गैसीकरण परियोजनाओं का भूमि पूजन किया। जी किशन रेड्डी ने मुरपार खदान बंद स्थल पर खदान बंद करने की गतिविधियों की समीक्षा की। जी किशन रेड्डी ने चिमुर में हितधारकों के साथ खदान बंद करने संबंधी सलाहकार समिति की बैठक भी की।
जिन दो कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए भूमि पूजन समारोह का आयोजन किया गया, वे भारत सरकार की योजना के अंतर्गत वित्तीय प्रोत्साहन के लिए चयनित सात परियोजनाओं में शामिल हैं। इन दो परियोजनाओं में से एक ग्रेटा एनर्जी द्वारा गैसीकरण प्रौद्योगिकी पर आधारित एकीकृत इस्पात संयंत्र है जिसे लगभग 130 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यह 0.4 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की स्वतंत्र एकीकृत इस्पात संयंत्र (आईएसपी) और 1490 टन प्रति दिन की क्षमता वाला कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) है। एकीकृत इस्पात परिसर में एक कोयला गैसीकरण द्वीप शामिल होगा जो स्पंज आयरन (डीआरआई) उत्पादन के लिए कोयला आधारित सिंथेटिक गैस का उत्पादन करेगा।
दूसरी परियोजना न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित एक एकीकृत कोयला गैसीकरण एवं स्वच्छ ईंधन परियोजना है। यह परियोजना घरेलू कोयले को उर्वरक, खनन, वस्त्र एवं पैकेजिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायनों और ईंधनों में परिवर्तित करेगी। परियोजना की शुरुआत होने के बाद इससे प्रति वर्ष 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक कोयले का प्रसंस्करण होने की उम्मीद है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि कोयला गैसीकरण भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता, औद्योगिक विकास एवं विकसित भारत के अनुरुप एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत 7 कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में से 4 महाराष्ट्र में आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीकरण से आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत एवं औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन दोनों परियोजनाओं में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश किया जा रहा है। जी किशन रेड्डी ने कहा कि इन परियोजनाओं से 2,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार और पांच गुना अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। जी किशन रेड्डी ने आशा व्यक्त किया कि ये परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा में उत्पादन शुरू करेंगी और जिम्मेदार खनन तथा स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों के लिए एक नया मानक स्थापित करेंगी।
इसके बाद दिन में जी किशन रेड्डी ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की मुरपार भूमिगत खदान के बंद स्थल का निरीक्षण किया। इस खदान में कोयले का उत्पादन 2003 में शुरू हुआ था और 2022 में इस क्षेत्र को ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र का हिस्सा घोषित करने के बाद बंद कर दिया गया।
इस अवसर पर जी किशन रेड्डी ने कहा कि खदान बंद करना किसी परियोजना का अंत नहीं बल्कि सतत विकास की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने इस कहा कि खनन क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करना एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए खदान बंद करने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित रूप से लागू करना चाहिए। मंत्री ने आगे कहा कि खदान बंद करने की योजनाओं में स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों के माध्यम से बंद खदानों को सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय रूप से उपयोगी संपत्तियों में परिवर्तित करने की दिशा में काम किए जा रहे हैं।
डब्ल्यूसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहान ने मुरपार भूमिगत खदान की जानकारी देते हुए कहा कि इसकी स्थापना के बाद से इस खदान से लगभग 9,95,926 टन कोयले का उत्पादन हुआ है। खदान बंद करने की योजना को डब्ल्यूसीएल बोर्ड ने 19 जनवरी, 2026 को मंजूरी प्रदान की थी। खदान में कार्यरत लगभग 426 कर्मचारियों को उमरेर क्षेत्र की अन्य खदानों में स्थानांतरित किया गया है।
नियमों के अनुसार, मुरपार खदान की सभी खनन अवसंरचनाओं को हटा दिया गया है जबकि जिला प्रशासन की सिफारिश के आधार पर प्रबंधक कार्यालय एवं कैंटीन भवन को सामाजिक उपयोग के लिए संरक्षित किया गया है। खदान बंद करने संबंधित सभी भौतिक कार्यों एवं तीन वर्षों की पर्यावरण निगरानी पूरी हो चुकी है। जून से सितंबर 2026 के दौरान, जबलपुर स्थित उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान के सहयोग से खदान क्षेत्र में 5 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण कार्य किया जाएगा। आसपास के ग्रामीणों के लिए आठ निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का भी आयोजन किया गया जिनसे लगभग 715 लाभार्थियों को लाभ प्राप्त हुआ।
चंद्रपुर जिला प्रशासन ने 12 जून, 2025 को खदान बंद करने संबंधी सलाहकार समिति (एमसीएसी) का गठन किया, जिसके माध्यम से खदान बंद होने के बाद क्षेत्र के सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक योजना तैयार की गई। इसके साथ ही, खदान बंद होने के सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करने तथा सामुदायिक विकास एवं आजीविका योजना तैयार करने के लिए सामाजिक प्रभाव का आकलन करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
जी. किशन रेड्डी ने खदान बंद करने के स्थल का दौरा करने के बाद चिमूर नगरपालिका कार्यालय में जिला कलेक्टर और खदान बंद करने संबंधी सलाहकार समिति के साथ बैठक की। इस बैठक में डब्ल्यूसीएल के खदान बंद करने संबंधी नोडल अधिकारी, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि, सलाहकार एवं स्थानीय ग्राम प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में खदान बंद होने के बाद क्षेत्र के समग्र एवं सतत विकास पर चर्चा की गई। इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सनोज कुमार झा, कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम और कोयला मंत्रालय, सीआईएल और डब्ल्यूसीएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित हुए।
कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में, सीआईएल और डब्ल्यूसीएल सहित उसकी सहायक कंपनियां वैज्ञानिक तरीके से खदानों को बंद करने का निरंतर प्रयास कर रही हैं। कोयला मंत्रालय पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव छोड़ते हुए राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।





