केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में स्टार्टअप पे चर्चा संवाद को संबोधित किया
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में स्टार्टअप पे चर्चा संवाद को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नए और उभरते भारत में सबसे स्पष्ट बदलाव देश के युवाओं में बढ़ता आत्मविश्वास है। उन्होंने कहा कि आज के युवा जोखिम उठाने, उद्यमशीलता अपनाने और नए विचारों पर काम करने को अत्यंत इच्छुक हैं। यह करियर विकल्पों को लेकर पहले जो झिझक थी उसमें उल्लेखनीय परिवर्तन का संकेत है। पीयूष गोयल ने कहा कि यह आत्मविश्वास नवाचार और भविष्योन्मुखी विकास के प्रति भारत की मानसिकता में मूलभूत बदलाव को दर्शाता है।
पीयूष गोयल ने संवाद के दौरान, कई व्यवसायिक संस्थापकों और सफल उद्यमियों से बातचीत की। उच्च विकास क्षमता वाले क्षेत्रों के सवाल पर पीयूष गोयल ने पर्यटन और कौशल विकास को चिन्हित किया। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र राष्ट्रीय आवश्यकताओं और उद्यमशीलता दोनों में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बड़ी आबादी विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचने में इन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी को समेकित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए देश में कार्यबल तैयार करने हेतु प्रशिक्षण, पुनः प्रशिक्षण और दोबारा कौशल विकास के महत्व पर बल दिया।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने मुक्त व्यापार समझौतों-एफटीए के बारे में कहा कि दुनिया की विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के हाल के समझौते स्टार्टअप और उद्यमियों को महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से निवेशकों में निश्चितता और विश्वास उत्पन्न होगा साथ ही भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजार खुलेंगे। उन्होंने स्टार्टअप्स को निवेश आकर्षित करने और वैश्विक विस्तार के लिए विदेशों के साथ स्टार्टअप-टू-स्टार्टअप सहयोग और साझेदारी तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। पीयूष गोयल ने सेवा, गतिशीलता, भुगतान, संवहनीयता, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अवसरों की चर्चा की।
डीप-टेक इनोवेशन (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स और एडवांस्ड मैटेरियल्स इत्यादि) पर पीयूष गोयल ने पूरे देश में हो रही प्रगति पर संतोष और आशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल की नीतिगत चर्चाओं में डीप-टेक विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित हुआ है और सरकार द्वारा घोषित 10 हजार करोड़ रुपये के दूसरे स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स से डीप-टेक स्टार्टअप्स, विशेष रूप से इनके विकास के शुरुआती और महत्वपूर्ण चरणों में काफी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि देशभर के इनक्यूबेटरों (स्टार्टअप्स के लिए ऐसा केंद्र जो शुरुआती चरण के व्यवसायों को ऑफिस स्पेस, मार्गदर्शन, वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है) और शैक्षणिक संस्थानों के साथ उनकी बातचीत से इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति दिखी है।
पीयूष गोयल ने हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर कारीगरों को डिजिटल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पहुंच प्रदान करने के लिए माल प्रबंधन में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) – माल को पटल पर लाने, प्रक्रिया डिजिटलीकरण और बाजार पहुंच सुगम बनाकर तथा ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स के साथ समेकन सहित, सहयोग के लिए तत्पर है।
भारत के अंतरिक्ष स्टार्टअप परितंत्र का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अभी इस क्षेत्र में 350 से अधिक स्टार्टअप संचालित हैं, जिनके मूल में डीप-टेक नवोन्मेष है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र दो अरब डॉलर से अधिक का बन चुका है और सरकार का आगामी वर्षों में कई यूनिकॉर्न कंपनियों (एक अरब डॉलर से अधिक कारोबार वाली कंपनियां) के उदय को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
संवाद में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग सचिव अमरदीप सिंह भाटिया, विभाग के संयुक्त सचिव संजीव, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी बोट के सह-संस्थापक और मुख्य विपणन अधिकारी अमन गुप्ता, ओयो रूम्स के संस्थापक और समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितेश अग्रवाल और स्किनकेयर और हेयरकेयर कंपनी मिनिमलिस्ट के सह-संस्थापक मोहित यादव मौजूद रहे।
पीयूष गोयल ने संवाद के समापन पर स्टार्टअप्स और छोटे उद्यमों को बड़े निवेशकों और निर्माताओं से जोड़कर मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला निर्मित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन्वेस्ट इंडिया और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग जैसे संस्थान इसे सुगम बना रहे हैं ताकि स्टार्टअप्स को बाजार में मांग, पूंजी और विस्तार का लाभ मिल सके। उन्होंने उद्यमियों को उभरते अवसरों का पता लगाने, फायदे-नुकसान का आकलन करते हुए जोखिम उठाने और नवाचार आधारित विकास को तेज करने के लिए भारत की अद्वितीय प्रतिभाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।





