उपराष्ट्रपति सी.पी राधाकृष्णन ने हरियाणा के दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
उपराष्ट्रपति सी.पी राधाकृष्णन ने आज हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल में स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने हरियाणा के ‘धर्म क्षेत्र’ की पवित्र भूमि पर अपनी उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने दीनबंधु छोटू राम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सत्यनिष्ठा, सामाजिक न्याय और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि दीनबंधु छोटू राम ने अपना जीवन किसानों और वंचित समुदायों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने एवं उनके सम्मान को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उपराष्ट्रपति ने उनके योगदानों को रेखांकित करते हुए कहा कि सहकारी संस्थाओं और न्यायसंगत भूमि प्रथाओं पर उनके जोर ने एक मजबूत कृषि ढांचे की नींव रखी। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने हरियाणा को एक प्रगतिशील और समृद्ध कृषि प्रधान राज्य के रूप में उभरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसने भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभाई।
उपराष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि स्वर्ण पदक विजेताओं में लगभग 64 प्रतिशत महिलाएं थीं और कुल स्नातक छात्रों में महिलाओं की संख्या लगभग 50 प्रतिशत थी। उन्होंने इसे हाल के वर्षों में महिला-केंद्रित विकास के माध्यम से आए परिवर्तनकारी बदलावों का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियानों और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी पहलों के माध्यम से किए गए निरंतर प्रयासों से हरियाणा में जेंडर अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो सामाजिक परिवर्तन और समावेशिता का एक प्रेरक उदाहरण है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि आत्मनिर्भर भारत का आह्वान नवोन्मेषण, आत्मविश्वास और स्वदेशी समाधानों का आह्वान है।
उपराष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया को याद करते हुए कहा कि जब दुनिया इस संकट से जूझ रही थी, तब कई देशों और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने टीके विकसित किए, जिनमें से कुछ ने अधिक लाभ के लिए उनका पेटेंट कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने टीके विकसित किए और उन्हें अपनी जनता को नि:शुल्क उपलब्ध कराया, साथ ही 100 से अधिक देशों को भी इनकी आपूर्ति की। उन्होंने कहा कि यह भारत की भावना और महानता को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और हरित प्रौद्योगिकियों के परिवर्तनकारी प्रभाव की चर्चा की। उन्होंने छात्रों से इन उभरते क्षेत्रों को जिज्ञासा और जिम्मेदारी के साथ अपनाने तथा अपने ज्ञान का उपयोग राष्ट्र निर्माण के साधन के रूप में करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से मादक पदार्थों का दृढ़तापूर्वक त्याग करने और स्वास्थ्य, उद्देश्य और सकारात्मकता का मार्ग अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को नशामुक्त समाज के राजदूत बनने के लिए प्रोत्साहित किया।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता केवल उपलब्धियों से ही नहीं, बल्कि चरित्र, ईमानदारी और विफलताओं से उबरने की क्षमता से भी परिभाषित होती है। उन्होंने कहा कि जो लोग धैर्य के साथ कठिनाइयों और अन्याय को सहते हैं, वे अंततः विजयी होते हैं। उन्होंने छात्रों को धैर्य धारण करने और जीवन की चुनौतियों का साहस तथा सकारात्मकता के साथ सामना करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि धर्म को अधर्म से पराजित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने मानसिकता को उपनिवेशवाद से मुक्त करने के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि सच्ची शिक्षा को विचारों को मुक्त करना चाहिए, भारत की विरासत में विश्वास पैदा करना चाहिए और इसकी बौद्धिक परंपराओं में गर्व की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने चरित्र और ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए छात्रों को अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान प्राप्त मूल्यों को आगे बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने, समाज में सार्थक योगदान देने और मजबूत एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आशीष कुमार घोष; हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी; हरियाणा के मंत्रिमंडल मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश सिंह उपस्थित थे।





