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Vice President C.P. Radhakrishnan attended the Parakram Diwas celebrations in Kolkata.
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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कोलकाता में पराक्रम दिवस समारोह में शामिल हुए

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह में शामिल हुए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पराक्रम दिवस केवल नेताजी को श्रद्धांजलि मात्र नहीं है, बल्कि पीढ़ियों तक साहस का संचार है। उन्होंने नेताजी द्वारा आराम को त्यागने के सचेत निर्णय को याद किया। इसमें भारतीय सिविल सेवा में एक प्रतिष्ठित पद को अस्वीकार करना और राष्ट्र की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए उच्च पद का त्याग करना शामिल है। उन्होंने कहा कि नेताजी ने आज़ाद हिंद फौज को संगठित करके और अनगिनत भारतीयों को सुरक्षा से ऊपर सम्मान और भय से ऊपर स्वतंत्रता को रखने के लिए प्रेरित करके भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक वैकल्पिक मार्ग प्रशस्त किया।

उपराष्ट्रपति ने नेताजी के देश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से दक्षिण भारत से गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया और तमिलनाडु के कई जिलों के आईएनए सैनिकों के महत्वपूर्ण योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि नेताजी का जीवन और आदर्श युवाओं को भय से ऊपर उठने, राष्ट्र के भविष्य की जिम्मेदारी लेने और प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त किए गए दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर सी.वी. आनंद बोस की पुस्तक “पिताजी की यादें” का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यक्तिगत संस्मरण और लेखन विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए नेताजी के जीवन और विरासत को समझने में एक मूल्यवान मानवीय आयाम जोड़ते हैं।

समारोह में संस्कृति मंत्रालय की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल थीं। यह नेताजी के “जय हिंद” के आह्वान और भारत की राष्ट्रीय चेतना पर उनके अमिट प्रभाव को दर्शाती हैं।

उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी दुर्लभ और महत्वपूर्ण यादगार वस्तुओं की एक विशेष प्रदर्शनी का लोकार्पण किया। प्रदर्शनी में नेताजी का फाउंटेन पेन, उनकी शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र और भारतीय राष्ट्रीय सेना के पदक शामिल थे। यह नेताजी के जीवन, आदर्शों और बलिदानों की जीवंत झलक प्रस्तुत करते हैं। उपराष्ट्रपति ने इन यादगार वस्तुओं को देश के स्वतंत्रता संग्राम को आकार देने वाले साहस, अनुशासन और अदम्य भावना के गवाह बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी कलाकृतियों का न केवल ऐतिहासिक महत्व है, बल्कि ये एक महत्वाकांक्षी राष्ट्र की धड़कन भी हैं।

इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस; राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद के महानिदेशक अरिजीत दत्ता चौधरी; विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के सचिव अनुराग कुमार; भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के निदेशक सायन भट्टाचार्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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