सीएक्यूएम ने अपनी 27वीं बैठक में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनिवार्य विशेषज्ञ रिपोर्ट की समीक्षा की
एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 20.02.2026 को आयोजित 27वीं पूर्ण आयोग बैठक में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के डब्लूपीपी (सी) संख्या 1135/2020 के निर्देशों के अनुसार 33 संबंधित विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पर विचार किया। स्रोत प्रभाजन अध्ययनों (2015-2025) के मेटा-विश्लेषण में पीएम 2.5 को दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को प्रभावित करने वाले प्रमुख प्रदूषक के रूप में पहचाना गया है। यह स्थानीय उत्सर्जन और वायुक्षेत्र में प्रदूषण के क्षेत्रीय संचलन के सीमा पार प्रभाव दोनों के प्रभाव को उजागर करता है।
आईआईटी, अकादमिक जगत, अनुसंधान संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार सर्दियों के महीनों में पीएम 2.5 के प्रमुख योगदानकर्ताओं में द्वितीयक कण (परिवहन, उद्योग, विद्युत संयंत्र, बायोमास दहन आदि से निकलने वाली गैसीय गैसों से परिवर्तित कण) (27%), परिवहन (23%), बायोमास दहन (20%), धूल (15%) और तापीय विद्युत संयंत्रों सहित उद्योग (9%) शामिल हैं। इसके अलावा गर्मियों के महीनों में धूल (27%) प्रमुख योगदानकर्ता है। इसके बाद परिवहन (19%), द्वितीयक कण (17%), उद्योग (14%) और बायोमास दहन (12%) का स्थान आता है। रिपोर्ट पर प्राप्त सार्वजनिक सुझावों पर विचार किया जा रहा है।
बैठक में आयोग ने ग्रिड-आधारित स्थानिक कवरेज, शहरी निकटता, भूमि उपयोग, द्वितीयक कण (परिवहन, उद्योग, विद्युत संयंत्र, बायोमास दहन आदि से निकलने वाली गैसीय उत्सर्जन से परिवर्तित) और जनसंख्या घनत्व मानदंडों के आधार पर सीएएक्यूएमएस नेटवर्क को मजबूत करने को भी मंजूरी दी। कुल 46 अतिरिक्त स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इनमें से 14 दिल्ली में, 16 हरियाणा में, 1 राजस्थान में और 15 उत्तर प्रदेश में होंगे। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में सीएएक्यूएमएस की कुल संख्या बढ़कर 157 हो जाएगी। इससे निगरानी घनत्व बढ़ेगा और क्षेत्रीय प्रदूषकों और आधारभूत वायु गुणवत्ता स्तरों का बेहतर आकलन हो सकेगा।
इसमें दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों के लिए सख्त पीएम उत्सर्जन मानकों को निर्धारित करने, निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी) कचरे के प्रबंधन और धूल नियंत्रण प्रोटोकॉल को मजबूत करने के निर्देशों को भी मंजूरी दी गई।
सीएक्यूएम ने दिनांक 13.02.2026 के निर्देश संख्या 96 का संज्ञान लिया। इसमें 2026 में गेहूं के अवशेष जलाने की रोकथाम और उन्मूलन के लिए राज्य कार्य योजनाओं के समन्वित और समयबद्ध कार्यान्वयन को अनिवार्य किया गया है;
इसमें एमसीडी टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत रिपोर्ट पर विचार-विमर्श किया गया और वाहनों की भीड़भाड़ और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए आरएफआईडी और एएनपीआर प्रौद्योगिकियों के साथ एकीकृत बाधा-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) प्रणालियों के शीघ्र कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया गया।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए राज्य स्तरीय और शहर स्तरीय वार्षिक कार्य योजनाओं 2026 की समीक्षा की गई। एनसीआर राज्यों, नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों द्वारा तैयार की गई इन योजनाओं का उद्देश्य परिवहन, उद्योग, धूल नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और बायोमास जलाने जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सतत संरचनात्मक उपाय करना है। आयोग ने दोहराया कि इन कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन की नियमित रूप से निगरानी की जाएगी।
आयोग ने प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की कार्रवाइयों की स्थिति की भी समीक्षा की। इसमें इकाइयों को बंद करना और फिर से शुरू करना शामिल है और 22.12.2025 को हुई पिछली पूर्ण आयोग बैठक के बाद जारी किए गए जीआरएपी आदेशों पर ध्यान दिया।
इसने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार डॉ. एस.डी. अत्री को सीएक्यूएम के पूर्णकालिक तकनीकी सदस्य के रूप में पुनः नियुक्त किए जाने पर ध्यान दिया।
सीएक्यूएम ने निरंतर कड़ी निगरानी, समन्वित प्रवर्तन और वैधानिक निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। सभी कार्यान्वयन एजेंसियों ने वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की नियमित समीक्षा करने और सभी क्षेत्रों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताई।





