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India and the Arab countries reiterated their commitment to lasting peace in West Asia.
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भारत और अरब देशों ने पश्चिम एशिया में स्थाई शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

भारत और अरब देशों ने अंतरराष्‍ट्रीय कानून, संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रासंगिक प्रस्‍ताव और अरब शांति पहल के अनुसार पश्चिम एशिया में न्‍यायसंगत, व्‍यापक और स्थायी शांति के लिये अपनी वचनबद्धता की फिर पुष्टि की है। विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्‍यम जयशंकर ने अरब देशों के विदेश मंत्रियों और अरब लीग के महासचिवों के साथ कल नई दिल्‍ली में भारत – अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में भागीदारी की। एक रिपोर्ट-

इस बैठक में एक सम्‍प्रभु, स्‍वतंत्र और 1967 की सीमा पर आधारित एक व्‍यवहारिक फलस्तीन का आह्वान किया गया। साथ ही इस्राइल के साथ शांति बनाए रखने की मांग की गई। भारत–अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक के दिल्‍ली घोषणा पत्र में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने 2025 के शर्म अल – शेख शांति शिखर सम्‍मेलन के निष्‍कर्षों का स्‍वागत किया। इस शिखर सम्‍मेलन का नतीजा गाजा में संघर्ष विराम समझौते के रूप में सामने आया। इस घोषणा पत्र में लीबिया की राजनीतिक प्रक्रिया के पूर्ण स्‍वामित्‍व और नेतृत्‍व पर बल दिया गया। भारत और अरब के देशों ने सूडान की सम्‍प्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने समर्थन की फिर पुष्टि की। दोनों पक्षों ने भारत तथा अरब के देशों के बीच बढती राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक, विकास, सांस्‍कृतिक और लोगों से लोगों के बीच के आदान–प्रदान का स्‍वागत किया।

इस अवसर पर विदेश मंत्री सुब्रहमण्‍यम जयशंकर ने कहा है कि आतंकवाद को कतई बर्दाश्‍त न करने की नीति के लिए एक मजबूत और सार्वभौमिक नियम होना चाहिए। डॉ. जयशंकर ने बताया कि आतंकवाद के सभी रूपों से भारत और अरब देशों को समान रूप से खतरा है। सीमा पार आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। आतंकवाद से प्रभावित देशों को आत्मरक्षा का अधिकार है। इस वैश्विक अभिशाप से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना आवश्यक है। आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर एक अटल कानून होना चाहिए।

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरब देशों के विदेश मंत्रियों, अरब लीग के महासचिव और अरब देशों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की।

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