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PM Narendra Modi addressed the Israeli Parliament, the Knesset.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने यरूशलम में नेसेट के विशेष पूर्ण अधिवेशन को संबोधित किया। वे इज़राइल की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।

नेसेट पहुँचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत नेसेट के अध्यक्ष अमीर ओहाना द्वारा किया गया तथा उन्हें औपचारिक समारोहपूर्वक अभ्यर्थना प्रदान की गई। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेन्‍जामिन नेतन्याहू, विपक्ष के नेता यायर लापिद तथा अध्यक्ष ओहाना ने प्रधानमंत्री के संबोधन से पूर्व पूर्ण अधिवेशन में वक्तव्य दिए और भारत–इज़राइल संबंधों के प्रति सशक्त द्विदलीय समर्थन व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत विशेष सम्मान के लिए अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने “स्पीकर ऑफ द नेसेट” पदक से सम्मानित किए जाने पर कृतज्ञता प्रकट की और इसे दोनों देशों की स्थायी मैत्री तथा साझा लोकतांत्रिक परंपराओं को समर्पित किया। भारत और इज़राइल के बीच सुदृढ़ मित्रतापूर्ण संबंधों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि दोनों देशों के लोगों के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा और सामरिक अभिसरण पर आधारित एक सशक्त समकालीन साझेदारी भी विद्यमान है। उन्होंने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, जल प्रबंधन, स्थिरता और उद्यमिता के क्षेत्र में सहयोग पर आधारित जीवंत जन-से-जन संबंधों ने द्विपक्षीय संबंधों को ऊर्जावान दृष्टिकोण प्रदान किया है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों और लोगों की द्विपक्षीय आवाजाही को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इज़राइल में भारतीय समुदाय तथा भारत में यहूदी प्रवासी समुदाय ने दोनों देशों की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

दोनों देशों की आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की अडिग नीति का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने 7 अक्तूबर के आतंकवादी हमले पर संवेदना व्यक्त की और कहा कि ऐसी क्रूरता का कोई औचित्य नहीं हो सकता। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता में योगदान देने वाले सभी प्रयासों के प्रति भारत के समर्थन की पेशकश की। इस संदर्भ में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित गज़ा शांति पहल के प्रति भारत के दृढ़ समर्थन को रेखांकित किया। बहुपक्षीय मंचों पर भारत और इज़राइल के बीच जारी सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) तथा I2U2 रूपरेखाओं के अंतर्गत दोनों देशों के बीच और गहन सहभागिता का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने भारत की विकास गाथा को रेखांकित किया और व्यापार, निवेश, अवसंरचना विकास, हरित विकास, स्टार्ट-अप, डिजिटल समाधान तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में अधिक द्विपक्षीय सहयोग का आह्वान किया, जिससे युवाओं की नवाचार क्षमता और सृजनशीलता को प्रोत्साहित किया जा सके। द्विपक्षीय निवेश संधि के संपन्न होने पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने अप्रयुक्त व्यापारिक संभावनाओं को साकार करने के लिए एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत में इज़राइल के लिए गठित संसदीय मैत्री समूह का लाभ उठाते हुए दोनों जीवंत लोकतंत्रों के बीच अधिक संसदीय संवाद का आह्वान किया। दोनों सभ्यताओं के मूल्यों के बीच समानताओं को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (समस्त विश्व एक परिवार है) और इज़राइल का सिद्धांत ‘तिक्कुन ओलाम’ (विश्व के उपचार का भाव) एक सामंजस्यपूर्ण समाज के प्रति साझा दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करते हैं। प्रधानमंत्री ने नेसेट के सदस्यों को भारत–इज़राइल संबंधों में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया तथा आगामी पर्व ‘पुरिम’ के लिए शुभकामनाएँ दीं। प्रधानमंत्री का पूर्ण संबोधन यहाँ देखा जा सकता है।

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