प्रधानमंत्री जी ने निरंतर इस बात पर बल दिया है कि देश में माल परिवहन का अधिकाधिक हिस्सा रेल के माध्यम से किया जाना चाहिए, क्योंकि यह परिवहन का एक अधिक हरित एवं ऊर्जा-कुशल साधन है। भारतीय रेल के लगभग 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के निकट पहुँचने के साथ, रेल-आधारित माल परिवहन में वृद्धि से देश की आयातित डीज़ल पर निर्भरता कम हुई है तथा पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा मिला है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की, जिसमें भारतीय रेल को विभिन्न प्रकार की वस्तुओं के लिए माल परिवहन का पसंदीदा माध्यम बनाने हेतु सुधारों पर चर्चा की गई। इस बैठक के दौरान रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना एवं रवनीत सिंह बिट्टू, अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के महानिदेशक, रेलवे बोर्ड के सदस्य तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
इस दिशा में भारतीय रेल विभिन्न उद्योगों, व्यापारिक संगठनों तथा प्रमुख माल ग्राहकों के साथ विस्तृत परामर्श कर रही है, जो अनेक ऐसी वस्तुओं से जुड़े हैं जिनमें रेल परिवहन की व्यापक संभावनाएं हैं। इन चर्चाओं के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि यदि वैगनों के डिज़ाइन को विभिन्न वस्तुओं की विशिष्ट हैंडलिंग, लोडिंग, अनलोडिंग एवं परिवहन आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए, तो रेल परिवहन को अधिक व्यापक रूप से अपनाया जा सकता है।
बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि सीमेंट एवं नमक जैसी वस्तुओं के लिए हाल ही में विकसित विशेषीकृत वैगनों की सफलता ने यह सिद्ध किया है कि उद्योगों की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप वैगनों का डिज़ाइन अत्यंत महत्वपूर्ण है। वस्तु-विशिष्ट वैगनों ने लोडिंग, अनलोडिंग एवं परिवहन प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बनाया है, जिससे रेल लॉजिस्टिक्स की आकर्षण क्षमता बढ़ी है।
इसी क्रम में भारतीय रेल ने वर्तमान वैगन डिज़ाइन नीति में व्यापक सुधार करने का निर्णय लिया है। विभिन्न वस्तुओं की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेषीकृत वैगनों के विकास हेतु एक उद्योग-अनुकूल ढांचा प्रदान करने के लिए नई वैगन डिज़ाइन नीति अगले 15 दिनों के भीतर तैयार करने का निर्णय लिया गया है।
रेलवे बोर्ड ने आज वैगन डिज़ाइन नीति में व्यापक सुधार करने का निर्णय लिया। प्रस्तावित नीति के अंतर्गत उद्योग अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप वैगनों का डिज़ाइन तैयार कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, स्टील कॉइल्स के परिवहन हेतु विशेष बाइंडिंग व्यवस्था एवं समर्पित लोडिंग-अनलोडिंग प्रणालियों की आवश्यकता होती है, जबकि अन्य अनेक वस्तुओं की भी अपनी विशिष्ट परिचालन आवश्यकताएँ हैं। नई व्यवस्था के तहत उद्योगों को अपनी जरूरतों के अनुसार वैगनों के डिज़ाइन में परिवर्तन करने की सुविधा उपलब्ध होगी। वैगनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आरडीएसओ एवं सीसीआरएस की रहेगी। इन सुधारों से भारतीय रेल के साथ अनेक नए उद्योगों के जुड़ने की संभावना बनेगी।
यह सुधार रेलवे माल परिवहन तंत्र में तथा वैगन विकास में नवाचार को बढ़ावा देगा। वस्तु-विशिष्ट परिवहन समाधान उपलब्ध कराकर भारतीय रेल नए माल परिवहन स्रोतों को आकर्षित करने, ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने तथा राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रेल की हिस्सेदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
उद्योगों को सड़क से रेल की ओर अधिक मात्रा में माल परिवहन स्थानांतरित करने में सक्षम बनाकर नई वैगन डिज़ाइन नीति हरित रेलवे एवं हरित लॉजिस्टिक्स के विजन को आगे बढ़ाएगी। रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत अधिक पर्यावरण-अनुकूल है तथा भारतीय रेल के लगभग पूर्ण विद्युतीकरण के साथ रेल आधारित माल परिवहन में वृद्धि से आयातित डीज़ल पर निर्भरता कम होगी, लॉजिस्टिक लागत घटेगी, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी तथा आवश्यक वस्तुएं आम नागरिकों के लिए अधिक किफायती बन सकेंगी।
प्रस्तावित वैगन डिज़ाइन नीति भारतीय रेल द्वारा एक आधुनिक, ग्राहक-केंद्रित एवं नवाचार-प्रधान माल परिवहन तंत्र के निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सुधार है। आर्थिक विकास को गति देने, पर्यावरणीय स्थिरता को सुदृढ़ करने तथा विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।





