सरकार ने तटीय जहाज़रानी अधिनियम, 2025 के तहत IFSC GIFT City इकाइयों को लाइसेंस लेने की आवश्यकता से छूट दी
भारत के समुद्री सेवा इकोसिस्टम को मजबूत करने और वैश्विक जहाज़रानी में देश की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक बड़ी नीतिगत पहल के तहत, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी), ‘गिफ्ट सिटी’, गांधीनगर में स्थापित इकाइयों को आयात-निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संचालन के लिए विदेशी जहाजों को किराए पर लेने के लिए तटीय जहाज़रानी अधिनियम, 2025 की धारा 11 के तहत लाइसेंस लेने से छूट दे दी है।
पतन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा तटीय जहाज़रानी अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के तहत अधिसूचित इस छूट में अब पात्र आईएफएससी इकाइयों के लिए धारा 11 के अंतर्गत आने वाले परिचालनों हेतु विदेशी जहाजों को किराए पर लेने के लिए जहाज़रानी, महानिदेशक से लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इस सुधार से गिफ्ट सिटी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री लीज़ और वित्त पोषण केंद्र के रूप में मजबूती मिलने, समुद्री निवेश को बढ़ावा मिलने और भारत को एक अग्रणी समुद्री सेवा केंद्र के रूप में उभरने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह सुधार भारत के समुद्री वित्त पोषण इकोसिस्टम के विकास में एक अहम भूमिका निभाएगा। अंतरराष्ट्रीय जहाज़रानी परिचालनों के लिए विदेशी जहाजों को किराए पर लेने से जुड़े नियामक ढांचे को सरल बनाकर, इससे गिफ्ट सिटी के माध्यम से समुद्री लीज़, जहाज वित्तपोषण और जहाज के स्वामित्व को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और साथ ही समुद्री उद्यमों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल तैयार होने की संभावना है।
केंद्रीय पतन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा: “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों ने ऐतिहासिक सुधारों, विश्व स्तरीय अवसंरचना और अभूतपूर्व नीतिगत समर्थन के माध्यम से भारत के समुद्री क्षेत्र की कायापलट कर दी है। हमने एक मजबूत नींव रखी है। अगला चरण न्यूनतम शासन के जरिए समुद्री उद्योग की पूरी क्षमता का उपयोग करना है ताकि प्रतिस्पर्धात्मकता और कुशलता को बढ़ाया जा सके, जो ‘विकसित भारत’ की ओर भारत की यात्रा को गति दे सके।”
इस कदम से समुद्री संपत्तियों में वैश्विक पूंजी की अधिक भागीदारी को सुगम बनाने, भारत में जहाज-स्वामित्व और लीज़ संरचनाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करने तथा जहाज लीजिंग, वित्तपोषण, संपत्ति प्रबंधन और अन्य मूल्यवर्धित समुद्री सेवाओं को शामिल करने वाले एक व्यापक समुद्री इकोसिस्टम के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। यह नीति गिफ्ट सिटी को वैश्विक समुद्री व्यवसाय के लिए एक विश्व स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) के रूप में स्थापित करने के सरकार के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह छूट केवल तटीय जहाज़रानी अधिनियम, 2025 की धारा 11 के तहत लाइसेंसिंग की ज़रूरत तक ही सीमित है और तटीय व्यापार को नियंत्रित करने वाले मौजूदा ढांचे में कोई बदलाव नहीं करती है। तटीय जहाज़रानी पर लागू मौजूदा नियंत्रण व्यवस्था और सुरक्षात्मक उपायों में कोई बदलाव नहीं है, जबकि आयात-निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संचालन के लिए नियामक लचीलापन रुख अपनाया गया है।
यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू होगी। “अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र” का वही अर्थ होगा जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 की धारा 3 की उप-धारा (1) के खंड (जी) के तहत इसे प्रदान किया गया है।
यह सुधार प्रगतिशील नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी समुद्री इकोसिस्टम बनाने के सरकार के चल रहे प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण कदम है। समुद्री वित्तीय सेवाओं और जहाज लीज़ पर लेने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करके, इस पहल से भारत की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने, वैश्विक निवेश को आकर्षित करने और समुद्री व्यवसाय व अंतर्राष्ट्रीय जहाज़रानी सेवाओं के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में देश की स्थिति को मजबूत करने की उम्मीद है।





