लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित हो गया है। पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार और पारित करने के लिए चर्चा शुरू की। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच विधेयक पेश किया। सदन में बिना किसी चर्चा के हंगामे के बीच यह विधेयक पारित हो गया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विधेयक पर चर्चा में भाग न लेने के लिए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कार्य सलाहकार समिति में चर्चा के लिए समय पहले ही निर्धारित किया जा चुका था। उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्ष से बार-बार अपील की थी कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर उचित चर्चा सुनिश्चित की जाए।
पार्लियामेंट में भेजा है बात बोलने के लिए हंगामा करने के लिए नहीं, लेकिन आप हिस्सा नहीं लेते हैं बिल में फिर आप बाहर में न्यूज में जाकर कहते हैं कि सरकार चर्चा नहीं कराते हैं, बिना चर्चा के बिल पारित करते हैं, ये इल्जाम आप नहीं लगा सकते, आपने अपना मौका गंवा दिया है। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं सहयोग करें, हंगामा न करें।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करना है।
जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी को रोकने और लोगों को समय पर पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, यह नया विधेयक लाया गया है। इसके तहत, अगर किसी जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल बाद, लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट, उप–मंडल मजिस्ट्रेट या डीएम द्वारा अधिकृत, कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति मिलने के बाद ही होगा। अनुमति देने से पहले अधिकारी को यह जांच करनी होगी कि उस व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी सही है या नहीं। यदि जन्म या मृत्यु की सूचना, दो वर्ष से अधिक समय के बाद दी जाती है, तो उसका पंजीकरण, केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जाएगा। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराना सभी के लिए अनिवार्य है और इसके बाद मिलने वाला प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति की कानूनी पहचान का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है।





