अहीसा डिजिटल इनोवेशन्स ने स्वदेशी VEGA माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग करके निर्मित ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’ के साथ सिलिकॉन चिप निर्माण में प्रथम चरण की सफलता हासिल की
सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक महत्वपूर्ण वैल्यू ड्राइवर है। यह कुल वैल्यू एडिशन में 50 प्रतिशत तक का योगदान देने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिल ऑफ मैटेरियल्स (बीओएम) लागत का लगभग 15-35 प्रतिशत हिस्सा होता है।
देश की रणनीतिक तकनीकी महत्वाकांक्षाओं में सेमीकंडक्टर डिजाइन की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए, डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना विभिन्न रणनीतिक और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के लिए चिप्स डिजाइन करने हेतु भारतीय स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान कर रही है। इनमें सैटेलाइट संचार, ड्रोन, निगरानी कैमरे, रक्षा और एयरोस्पेस सिस्टम, ऑटोमोटिव, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) उपकरण, एलईडी ड्राइवर, एआई सिस्टम, दूरसंचार उपकरण और स्मार्ट मीटर शामिल हैं।
अहीसा डिजिटल इनोवेशन
अहीसा का मुख्यालय चेन्नई में है, यह ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग और सुरक्षा के लिए चिप्स डिजाइन करने वाले भारतीय फैबलेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप है। गणतंत्र दिवस पर टेप आउट और इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर पहले चरण की सिलिकॉन सफलता हासिल करने वाली ‘विहान’ – फाइबर ब्रॉडबैंड के लिए विशेष रूप से निर्मित नेटवर्किंग सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) – अब 2027 के लक्षित उत्पादन टेप आउट की ओर आगे बढ़ेगी।
भारत ऑप्टिकल फाइबर, 5जी और ब्रॉडबैंड आधारित सेवाओं के माध्यम से अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है, ऐसे में स्वदेशी रूप से निर्मित सेमीकंडक्टर समाधानों की आवश्यकता बढ़ रही है। अहीसा, अपनी विहान श्रृंखला, लगातार प्राप्त हो रही फंडिंग उपलब्धियों और डीएलआई योजना से मिल रहे सक्रिय समर्थन के माध्यम से, इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए सक्षम है।
निवेशकों का विश्वास – वैश्विक समाधानों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए भारत के डीप-टेक नवाचार का समर्थन करना
इस वर्ष की शुरुआत में, अहीसा ने तमिलनाडु इमर्जिंग सेक्टर सीड फंड (टीएनईएसएसएफ) और अन्य निजी निवेशकों के माध्यम से तमिलनाडु इंफ्रास्ट्रक्चर फंड मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन (टीएनआईएफएमसी) से लगभग 40 करोड़ रुपये जुटाए। इसका उद्देश्य उत्पाद विकास में तेजी लाना और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कंपनी की वृद्धि के लिए समर्थन प्राप्त करना है। डीएलआई योजना के तहत मंजूरी के बाद फंडिंग के ये लगातार दौर भारत से उन्नत ब्रॉडबैंड सिलिकॉन समाधान प्रदान करने की अहीसा की क्षमता में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं।
सरकारी सहायता से भारतीय चिप कंपनियां विचार से उत्पाद तक पहुंचने में सक्षम हो रही हैं।
अहीसा की उपलब्धि भारत के सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इकोसिस्टम में हो रहे एक व्यापक परिवर्तन का हिस्सा है। सरकार के सेमीकंडक्टर कार्यक्रमों के माध्यम से, अत्याधुनिक चिप-डिज़ाइन उपकरण 455 संगठनों को उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें 350 शैक्षणिक संस्थान और 105 स्टार्टअप शामिल हैं। इससे देश भर के छात्रों, शोधकर्ताओं और कंपनियों को चिप्स डिज़ाइन करने में सहायता मिल रही है।
डीएलआई योजना के तहत समर्थित कंपनियों ने विभिन्न फाउंड्री में कुल मिलाकर 30 से अधिक चिप डिजाइन टेप-आउट हासिल किए हैं और 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की वेंचर कैपिटल फंडिंग जुटाई है। यह भारत की सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमताओं में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। चिप्स टू स्टार्टअप (सी2एस) कार्यक्रम के तहत, भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 71 शैक्षणिक संस्थानों द्वारा 245 चिप डिजाइन टेप-आउट किए गए हैं।
इस योजना के अंतर्गत हाल ही में मिली अन्य सफलताएं
1. वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स ने इनकोर सेमीकंडक्टर द्वारा निर्मित स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग करके बीएलडीसी मोटर कंट्रोलर चिप और इसके मोटर ड्राइवर चिप के पहले चरण में सिलिकॉन निर्माण में सफलता प्राप्त की ।
2. नेट्रासेमी ने एकीकृत वीडियो एनालिटिक्स एक्सेलरेशन के साथ 12 एनएम विजन एसओएसी का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
3. ऑप्टोएमएल को अपना 12 एनएम ‘कंप्यूट-इन-मेमोरी’ एसओसी प्राप्त हुआ है, जो एआई प्रोसेसिंग को तेज और बिजली की बचत करने वाला बनाता है।
4. माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज ने सीसीटीवी निगरानी कैमरों में अपने विजन एसओसी के उपयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए प्रामा इंडिया के साथ साझेदारी की घोषणा की।
5. इंडीसेमी ने अपने ब्लूटूथ (बीएलई 6) चिप मॉड्यूल के लिए वैश्विक प्रमाणन प्राप्त किया।
भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण
सरकार की सेमीकंडक्टर पहल का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत चिप्स का डिज़ाइन तैयार करना नहीं है, बल्कि चिप डिज़ाइन और निर्माण से लेकर उन्नत पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री, अनुसंधान और विकास तथा कुशल मानव संसाधन तक संपूर्ण सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला को कवर करने वाला एक इकोसिस्टम बनाना है। भारत जुलाई 2026 में 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृत सेमीकंडक्टर 2.0 के साथ इस प्रयास को अगले स्तर पर ले जा रहा है। इसका लक्ष्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
अहीसा डिजिटल इनोवेशन्स जैसी कंपनियों की प्रगति यह दर्शाती है कि भारतीय सेमीकंडक्टर डिज़ाइन अब प्रयोगशाला की सीमाओं से आगे बढ़ रहे हैं। भारत में डिज़ाइन किए गए चिप्स का निर्माण, परीक्षण, प्रमाणीकरण किया जा रहा है और उन्हें ग्राहकों के परीक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है। जैसे-जैसे इकोसिस्टम परिपक्व होगा, सिलिकॉन-मान्य डिज़ाइन बड़े पैमाने पर उत्पादन की ओर बढ़ेंगे। इससे भारतीय कंपनियां विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में तो स्थापित होंगी और साथ ही घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।




