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A group of trainee officers from the Indian Information Service and the Indian Statistical Service met President Droupadi Murmu.
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भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक ग्रुप ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की

भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक ग्रुप ने आज (19 अगस्त, 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों ही सेवाओं, भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के कार्य अलग-अलग हैं, किंतु दोनों के लक्ष्य एकसमान हैं – वह है शासन की गुणवत्ता को और बेहतर करना तथा देश के लोगों की सेवा करना। प्रभावी सम्प्रेषण और विश्वसनीय सूचना एक जीवंत और संवेदनशील लोकतंत्र के अनिवार्य स्तंभ हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब प्रशिक्षु अधिकारी अपने सेवाकाल की शुरुआत कर रहे हैं तब उन्हें निरंतर सीखते रहने और स्वयं को परिस्थिति के अनुरूप ढालने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। टेक्नोलॉजी की दुनिया, मीडिया, अर्थनीति और लोक नीति में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। उन्होंने उन्हें जिज्ञासु बने रहने, नई योग्यताएं अर्जित करने और अनुभव से सीख लेने की सलाह दी। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे अपने निर्णयों में विवेक का इस्तेमाल करें, अपने आचरण में करुणामय रहें और सत्यनिष्ठा के पालन में अटल बने रहें। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उन्हें सौंपे गए दायित्व में निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ लोगों की सेवा करने का गंभीर उत्तरदायित्व समाहित है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा ने नागरिकों के साथ सरकार के जुड़ाव को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के जानकारी पाने, उसे साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया करने के तौर-तरीकों में मूलभूत रूप से परिवर्तन कर दिया है। उन्होंने भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग केवल जानकारी देने और लोगों को जोड़ने के लिए न करके उनकी चिंताओं को सुनने और समझने तथा उनका समाधान करने के लिए भी करें। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवेश में जब सूचना द्रुत गति से फैलती है, सूचना प्रदान करने में सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित का हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत वर्ष 2047 की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी, क्योंकि जानकारी से परिपूर्ण नागरिक ही विकास कार्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रियतापूर्वक भाग ले सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज की डेटा-आधारित दुनिया में, लोक नीति की गुणवत्ता काफी हद तक सटीक, समय पर और विश्वसनीय डेटा की उपलब्धता पर निर्भर करती है। भारतीय सांख्यिकी सेवा उन आधिकारिक आंकड़ों को तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जो हमारे लाखों-करोड़ों देशवासियों की जिंदगियों पर प्रभाव डालने वाले निर्णयों का आधार बनते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों के कार्य से अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रमाण-आधारित नीति-निर्माण में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को यह बात सदैव याद रखने की सलाह दी कि प्रत्येक डेटासेट के पीछे मानव समुदाय और उनका जीवन होता है। उन्होंने उनसे कहा कि नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए आंकड़ों की सुलभता बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक, प्रामाणिक और प्रौद्योगिकी-आधारित सांख्यिकीय तंत्र के निर्माण में उनका योगदान, भारत को विकसित भारत बनाने की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।

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