नेपाल और तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर पांच सौ उनयासी हो गई है। एक हज़़ार 924 लोग लापता हैं। जबकि 101 घायल लोगों का अस्पतालों में उपचार चल रहा है। लापता लोगों में पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े लोग, विदेशी नागरिक, आम नागरिक और सुरक्षा तथा सरकारी कर्मी शामिल हैं। भारत ने बाढ़ प्रभावित नेपाल को मानवीय सहायता तेज कर दी है। मानवीय सहायता सामग्री के साथ तीसरा विमान कल शाम काठमांडू पहुंचा।
विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने बताया कि सहायता सामग्री में पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य सामाग्री और जल शोधन की गोलियां शामिल हैं। डॉ. जयशंकर ने बताया कि बचाव अभियान के लिए चिकित्सकों, पैरामेडिक्स और रेकी टीम सहित 11 सदस्यीय दल भी मौके पर मौजूद है। उन्होंने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए भारत का समर्थन दोहराया। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नेपाल बाढ़ के बाद से 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो सका है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि लगभग 100 भारतीय मूल के लोग भी लापता हैं।
नई दिल्ली में कल रणधीर जायसवाल ने कहा कि त्रिशुली- वन जलविद्युत परियोजना में लगे 63 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया। तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिक काठमांडू से कल नई दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने नई दिल्ली में कल इन 21 तीर्थयात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने बचाव प्रयासों के लिए नेपाल सरकार और सेना को धन्यवाद दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने बताया कि चीन की ओर लगभग 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और अपने परिवारों के संपर्क में हैं। रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने विदेश मंत्रालय में चौबीसों घंटे कार्यरत एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि काठमांडू और पेइचिंग में भारतीय दूतावासों ने भी 24 घंटे कार्यरत हेल्पलाइन शुरू की हैं।
विदेश मंत्रालय ने जानकारी के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इनके टेलीफोन नंबर हैं। 011-2308 8718, 011-2308 8719 हैं। व्हाट्सऐप नंबर 99682 91988 और ईमेल-situationroom@mea.gov.in के जरिए भी संपर्क कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के आपातकालीन संपर्क नंबर 977 98513 16807 संपर्क कर सकते हैं।




