PRIP के पहले राउंड के तहत 41 फार्मा और मेडटेक नवाचार प्रोजेक्ट्स के लिए 1,600 करोड़ रुपए मंज़ूर किए गए
फार्मा मेडटेक सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने (पीआरआईपी) के पहले चरण के तहत, लगभग 1,600 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता वाली 41 प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई है। मंज़ूर की गई इन प्रोजेक्ट्स से 3,020 करोड़ रुपए का अतिरिक्त निजी निवेश आने की उम्मीद है, जिससे इन प्रोजेक्ट्स में कुल अनुसंधान और विकास निवेश लगभग 4,620 करोड़ रुपए हो जाएगा। मंज़ूर किए गए पोर्टफोलियो में नवाचार मूल्य श्रृंखला (इनोवेशन वैल्यू चेन) शामिल है, जिसमें नई दवा की खोज, नैदानिक विकास और नवीन चिकित्सा प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
अब तक मंज़ूर की गईं 41 प्रोजेक्ट्स में से 12 शुरुआती चरण में हैं और 29 बाद के चरण में हैं। 19 प्रोजेक्ट्स का कार्य स्टार्टअप्स और एमएसएमई द्वारा किया जा रहा है, जबकि 22 प्रोजेक्ट्स का काम बड़ी कंपनियां कर रही हैं। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के हिसाब से, 27 प्रोजेक्ट्स नई दवाओं के तहत, पांच प्रोजेक्ट्स कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स और बायोसिमिलर्स के तहत और नौ प्रोजेक्ट्स नए चिकित्सा उपकरणों के अंतर्गत आती हैं।
ये प्रोजेक्ट्स मुख्य रूप से मात्रा-आधारित फार्मास्युटिकल मॉडल से नवाचार-आधारित, प्रौद्योगिकी-प्रधान मॉडल की ओर बदलाव को दर्शाते हैं, जो दवा कंपनियों, जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों और मेडटेक नवप्रवर्तकों को एक साथ लाते हैं।
इस पोर्टफोलियो में बायोकॉन, भारत बायोटेक, सन फार्मा, वॉकहार्ट, ज़ाइडस, मैनकाइंड फार्मा, पांडोरम टेक्नोलॉजीज़, सेलोजेन थेरेप्यूटिक्स, ऑरिजीन ऑन्कोलॉजी और बगवर्क्स रिसर्च जैसी कंपनियों और इनोवेटर्स के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। ये प्रोजेक्ट्स पीआरआईपी के तहत सहायता प्राप्त नवाचार की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित करते हैं, जिसमें प्रथम श्रेणी के नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकियां, वैश्विक बाजारों के लिए क्षमता वाले नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े रणनीतिक प्राथमिकता वाले नवाचार शामिल हैं। इन श्रेणियों के तहत सहायता प्राप्त प्रोजेक्ट्स में मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट ग्राम-नेगेटिव संक्रमणों को लक्षित करने वाली एंटीबैक्टीरियल दवा, कॉर्नियल बीमारी के लिए एक्सोसोम-आधारित रीजेनरेटिव थेरेपी, इन-विवो सीएआर-टी प्लेटफॉर्म, मरीज़ से प्राप्त ब्रेस्ट कैंसर ऑर्गेनॉइड्स, प्रोग्रामेबल आरएनए-टारगेटिंग एंटीवायरल तकनीक, पॉइंट-ऑफ-केयर संक्रमण निदान के लिए पोर्टेबल प्लास्मोनिक-पीसीआर और टीबी का पता लगाने के लिए माइक्रोफ्लुइडिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
रणनीतिक प्राथमिकता ढांचे के तहत, ध्यान नहीं दिए गए उष्णकटिबंधीय बीमारियां, दुर्लभ बीमारियां, भारत के प्राथमिकता वाले रोगजनकों (पैथोजन) के लिए एएमआर (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, महामारी या बड़े पैमाने पर फैलने की क्षमता वाले पैथोजन और वैक्सीन से बचाव योग्य बीमारियों के लिए टीकों जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने वाले नवाचारों के लिए अधिक सहायता उपलब्ध है। इस ढ़ांचे के तहत अब तक छह प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई है, जिनमें बैक्टीरियल निमोनिया/मेनिन्जाइटिस, डेंगू, इन्फ्लूएंज़ा और अगली पीढ़ी के टीबी टीकों से जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। पहले दौर के तहत बाकी आवेदनों का मूल्यांकन चल रहा है और आने वाले महीनों में इनके परिणाम घोषित किए जाएंगे।





