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अंतररष्‍ट्रीय शांति-सुरक्षा और संपर्क सुविधा उभरती शक्तियों के लिए महत्‍वपूर्ण एजेंडा: विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर

विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्‍यम जयशंकर ने कहा है कि अंतररष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला का लचीलापन और संपर्क सुविधा उभरती और मध्‍यम स्‍तर की शक्तियों के लिए महत्‍वपूर्ण एजेंडा हैं। आज नई दिल्‍ली में 62वें म्‍यूनिख सुरक्षा सम्‍मेलन में डॉ. जयशंकर ने कहा कि उभरते और मध्‍यम स्‍तरीय देश ग्‍लोबल साउथ और ग्‍लोबल नॉ‍र्थ से हैं जिनके लक्ष्‍य एक हैं और यह बहुत प्रासंगिक होने जा रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि विश्‍व बदल रहा है, इसका एजेंडा और परिदृश्‍य बदल रहा है तथा उभरते और मध्‍यम स्‍तरीय देशों के बीच सहयोग के लिए महत्‍वपूर्ण एजेंडा सामने आ रहा है।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि उभरती और मध्‍यम स्‍तरीय शक्तियों से संचालित बदलता परिदृश्‍य अमरीका की बदलती स्थिति, चीन के उभार और परस्‍पर बढती अत्‍यधिक निर्भरता की बहस को जन्‍म दे रहा है। उन्‍होंने कहा कि उभरती और मध्‍य स्‍तरीय शक्तियों का दृष्टिकोण जोखिम कम करना और विविधता लाना है। ये देश एजेंडे आधारित सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि दुनिया में कई देशों और समूहों के बढ़ते प्रभाव, विभिन्‍न पक्षों के साथ तालमेल और छोटे-छोटे समूहों का गठन इस तरह के दृष्टिकोण का परिणाम है। विदेश मंत्री ने कहा कि उभरते और मध्‍यम स्‍तरीय देशों का हित अपने अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग को मजबूत करने में ही है। लेकिन यह भी स्‍वाभाविक है कि वे अमरीका और चीन के साथ भी सहयोग करें।

उन्‍होंने क्‍वाड का उदाहरण देते हुए कहा कि उभरते मध्‍य स्‍तरीय देशों का बड़ी ताकतों के साथ सहयोग संभव है। उन्‍होंने कहा कि संपर्क सुविधा के क्षेत्रों में भारत-मध्‍य पूर्व-यूरोप संपर्क गलियारा, अंतरराष्‍ट्रीय उत्‍तर-दक्षिण-परिवहन गलियारा और उत्‍तरी समुद्र मार्ग शामिल हैं। डॉ. जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्‍स विभिन्‍न पक्षों का ऐसा उदाहरण है जो अलग-अलग आवाज न उठाकर कहीं अधिक मजबूती के साथ सामूहिक आवाज उठाता है।

बाद में म्‍यूनिख सुरक्षा सम्‍मेलन के अध्‍यक्ष वोल्‍फगैंग इशिंजर और जर्मनी के विदेश मंत्रालय में सचिव बर्नहाड कॉच के साथ बातचीत में विदेश मंत्री ने कहा कि आने वाले दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि तीव्र रहेगी और जनांकिकी वृद्धि दर का स्‍तर बनाए रखेगी। उन्‍होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत में यह रुझान रहा है कि वह यूरोप के बड़े देशों की तरफ देखता है, जबकि अब ऐसा नहीं है और भारत यूरोपीय संघ के साथ संबंध प्रगाण करने की प्रक्रिया तेज कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि उन्‍नत विनिर्माण, सेमीकंडक्‍टर, एआई और अंतरिक्ष क्षमताएं ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत यूरोपीय संघ के साथ साझेदारी बढ़ाई जा सकती है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय रक्षा क्षेत्र के अनेक स्‍टार्टअप विदेशों में साझेदारी कर रहे हैं और रक्षा निर्यात तेजी से बढ़ रहा है।

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