प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को आज एक वर्ष पूरा हो गया है। इस योजना की शुरुआत पिछले वर्ष आज ही के दिन देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई थी। हमारे संवाददाता ने बताया है कि इस योजना के अंतर्गत 11 मंत्रालयों और विभागों की छत्तीस केंद्रीय योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है। इसके अलावा, राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रत्येक जिले की कृषि संबंधी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य किया जा सके।
इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता, सिंचाई सुविधाओं, ऋण की उपलब्धता और फसल कटाई के बाद की आधारभूत संरचना में सुधार करना है। प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्तरीय व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। स्थानीय कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप जिला कार्य योजनाएं तैयार की जाती हैं। वहीं, 36 केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत 121 संकेतकों के माध्यम से प्रगति की निगरानी की जाती है। पहले वर्ष के दौरान योजना के लिए चुने गए सभी 100 जिलों ने अपनी कार्य योजनाएं तैयार कर ली हैं और उनका क्रियान्वयन जारी है। इन जिलों का औसत प्रदर्शन स्कोर अप्रैल 2026 में 18 दशमलव आठ पांच प्रतिशत से बढ़कर अगस्त 2026 में 46 दशमलव आठ नौ प्रतिशत हो गया।





