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Home Minister Amit Shah paid tribute to the martyred police personnel at the National Police Memorial and addressed the gathering
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गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और समारोह को संबोधित किया

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर गृह मंत्री ने ‘Fight Against Drugs’ के संदेश पर आयोजित एक देशव्यापी मोटरसाइकिल रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया। पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में संसद सदस्य कृष्ण प्रसाद टेनेटी, राजीव कुमार, केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आसूचना ब्यूरो के निदेशक महेश दीक्षित, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर सहित अन्य केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के महानिदेशक और कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर हम उन वीर पुलिसकर्मियों को नमन करने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता से लेकर आज तक राष्ट्र की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद करीब आठ दशकों में देश आज विश्व में एक सम्मानजनक स्थान पर खड़ा है। इसकी नींव में हमारे वीर जवानों का बलिदान है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि यदि इन जवानों ने आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान न दिया होता, तो आज हम कहाँ खड़े होते।

गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 भारतीय पुलिस के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष है। 31 मार्च 2026 को हमने दशकों से देश को पीड़ित कर रहे नक्सलवाद से मुक्ति प्राप्त की। नक्सलवाद के कारण 1981 से मार्च 2026 तक देश ने अनेक दंश झेले हैं। इस अवधि में कितने ही निर्दोष जवान और नागरिक शहीद हुए। इस समयावधि में 3600 से अधिक जवान शहीद हुए और देश के लगभग 13,700 निर्दोष नागरिक भी अपनी जान गँवा बैठे। गृह मंत्री ने कहा कि वे शहीद जवानों के परिजनों को बताना चाहते हैं कि पाँच दशक पुरानी इस समस्या से निजात पाकर यदि देश आज विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, तो इसकी नींव में इन 3600 जवानों का बलिदान है। गृह मंत्री ने शहीदों के परिजनों से कहा कि हम आपकी क्षति की पूर्ति नहीं कर सकते, परंतु 140 करोड़ नागरिकों वाला पूरा देश आपके परिवार के समर्पण के प्रति कृतज्ञ है।

अमित शाह ने पुलिस स्मृति दिवस के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के दुर्गम हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 10 जवानों ने चीन की सेना के हमले का डटकर मुकाबला करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। जब हम हॉट स्प्रिंग्स की उस घटना का अध्ययन करते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि जब संघर्ष का निर्णय ऊँची पहाड़ियों पर लिया गया होगा, तब परिणाम लगभग तय था। फिर भी उन अमर सपूतों ने देश की एक इंच भूमि भी किसी विदेशी के हाथ में न जाए, इस संकल्प को मृत्यु पर्यन्त निभाते हुए अपना अमर बलिदान दिया। तभी से 21 अक्टूबर का यह दिन प्रतिवर्ष पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज हम जिस स्थान पर खड़े हैं, वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देशभर के शहीद पुलिस जवानों को समर्पित इस राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया था। इसके पीछे मंशा यही है कि आने वाली पुलिस की पीढ़ियाँ यहाँ से प्रेरणा लेकर अपने दायित्व के प्रति सजग रहें और ड्यूटी निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने के लिए भी तैयार रहें। उन्होंने कहा कि यह स्थान देशभर के नागरिकों के लिए भी एक श्रद्धा स्थल बन गया है। कृतज्ञ नागरिक यहाँ आकर अपने मन के भाव के साथ 36,852 पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि देते हैं और राष्ट्र की ओर से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

अमित शाह ने कहा कि सरकार की सभी प्रकार की सेवाओं में यदि कोई सबसे कठिन सेवा है, तो वह पुलिस की सेवा है। देश के हर नागरिक के लिए रक्षाबंधन, होली, दीपावली और ईद जैसे त्योहार होते हैं, परंतु पुलिस कर्मियों के लिए कोई त्योहार नहीं होता। उन्होंने कहा कि जब हम अपने परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं, उस दिन हमारे ये जवान मौके पर खड़े रहकर आंतरिक सुरक्षा, यातायात और लोगों की सुरक्षा की चिंता करते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि अपने जीवन के स्वर्ण काल को परिवार से दूर रहकर राष्ट्र को समर्पित करना बहुत बड़ी सेवा है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि देशभर में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहाँ पुलिस के जवानों ने अभूतपूर्व धैर्य, संयम, अनुशासन, वीरता और समर्पण का भाव दिखाते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा की प्रथम और अंतिम पंक्ति दोनों पुलिस का जवान ही होता है। गृह मंत्री ने सीमा पर तैनात और देश के अंदर सुरक्षा का दायित्व निभा रहे सभी केन्द्रीय शस्त्र पुलिस बलों के जवानों का विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस बलों के जवान अपने घर से दूर रहकर चाहे चुनाव हो, त्योहार, प्रदर्शन, या सीमा की सुरक्षा करनी हो, हर मौके पर मुस्तैदी के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के साथ साथ देश के सुचारु रूप से चलने के लिए सदैव अपनी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। अमित शाह ने कहा कि देश के लोकतंत्र की रक्षा हो या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुचारु रूप से संचालित करना, हम केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बिना इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार से तो चुनावी हिंसा को समाप्त करने में देश सफल रहा था, परंतु बंगाल में चुनावी हिंसा लंबे समय से चलती रही। उन्होंने कहा कि बंगाल विधानसभा के हाल में संपन्न चुनाव में एक भी व्यक्ति की मृत्यु के बिना चुनाव पूरा कराने में हमारे सुरक्षा जवानों को बड़ी सफलता मिली और ऐसा करके केन्द्रीय सुरक्षा बलों ने एक नया मानक स्थापित किया। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश मानता है कि देश चुनावी हिंसा से मुक्त हो गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में देश में कई समस्याएँ थीं, जिनमें तीन प्रमुख समस्याओं को हम दशकों से झेल रहे थे। उन्होंने कहा कि कश्मीर, उत्तर-पूर्व और लाल आतंक का पूरा क्षेत्र – इन तीनों hotspot में आज शांति है, विकास का वातावरण बना है और ये सभी क्षेत्र देश के साथ विकास की स्पर्धा में भागीदारी करने के लिए तैयार हैं। अमित शाह ने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद पर नकेल कसने में हम लगभग सफल हुए हैं। कई समझौतों के बाद हजारों लोगों के हथियार डालने के पश्चात पूरा पूर्वोत्तर आज शांति के मार्ग पर आगे बढ़ गया है। अनेक राज्यों में फैली पाँच दशक पुरानी नक्सल समस्या को पूर्ण रूप से समाप्त करने में हमारे पुलिस और सीएपीएफ के जवानों को बहुत बड़ी सफलता मिली है। गृह मंत्री ने नक्सलवाद की समाप्ति के लिए विशेष रूप से सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन तथा छत्तीसगढ़ पुलिस की बहादुरी की तारीफ की।

अमित शाह ने कहा कि देश समस्याओं से पूर्णतः मुक्त नहीं हुआ है। हमारे सामने अभी भी कई समस्याएँ हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने तय किया है कि वर्ष 2026 के शेष भाग तथा 2027, 2028 और 2029 – इन साढ़े तीन वर्षों में हम ड्रग्स के खिलाफ एक संयुक्त लड़ाई लड़कर 31 दिसंबर 2029 तक देश को ड्रग की समस्या से मुक्ति दिलाएंगे। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की समस्या हमारी आने वाली पीढ़ियों को खोखला करती है, हमारे अर्थतंत्र पर अनावश्यक बोझ डालती है और देश विरोधी प्रवृत्तियाँ रखने वाले संगठनों को आर्थिक समर्थन भी प्रायः ड्रग तस्करी से ही मिलता है। गृह मंत्री ने देशभर के पुलिस बलों का आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में तैयार किए गए ‘नशा मुक्त भारत’ के रोडमैप को जमीन पर उतारने के लिए पूरे मनोयोग से जुड़ें और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करें।

गृह मंत्री द्वारा आज रवाना की गई मोटरसाइकिल रैली में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू व कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व दिल्ली), केंद्रीय सशस्त्र बलों (CRPF, CISF, BSF, SSB, ITBP व NSG) और कुछ केंद्रीय पुलिस संगठनों (RPF, NDRF व NIA) के लगभग 90 सवार शामिल हैं। यह रैली ‘Fight Against Drugs’ के संदेश पर आयोजित एक देशव्यापी रैली का भाग है जिसमें देशभर के सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों व केंद्रीय बलों के मोटरसाइकिल सवार एकता नगर, गुजरात पहुँच कर एकता परेड-2026 में सम्मिलित होंगे।

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