रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने फिलीपींस के सेबू में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम) – प्लस के अवसर पर मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने अगस्त में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में निरंतर प्रगति का स्वागत किया। ये प्रगति उन दिशााओं के अनुरूप है, जिन पर दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की थी। इनमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
- दोनों पक्षों की रणनीतिक और परिचालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले ठोस समुद्री सुरक्षा सहयोग पर चर्चा में प्रगति हुई। इसमें समुद्री बारूदी सुरंग-रोधी उपायों की क्षमताओं को बढ़ाना तथा जापान की प्रौद्योगिकीय विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमताओं का लाभ उठाते हुए नौसेना पोतों के निर्माण एवं डिजाइन के क्षेत्र में संयुक्त विकास की संभावनाओं का पता लगाना शामिल है। इस दिशा में भारतीय नौसेना के उप प्रमुख की जापान यात्रा जैसे अवसरों से सहयोग को बढ़ावा मिला है।
- भारत-जापान वायु सेना अभ्यास ‘वीर गार्डियन 26’ के दौरान जापान के वायु आत्मरक्षा बल के लड़ाकू विमानों की भारत की पहली यात्रा के बाद दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से चर्चा में प्रगति हुई। इस अभ्यास के साथ ही जापान के वायु आत्मरक्षा बल के प्रमुख की भारत यात्रा भी हुई।
- टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में भारत-जापान रक्षा उद्योग मंच का सफल आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों की लगभग 40 कंपनियों ने भाग लिया।
दोनों मंत्रियों ने इस वर्ष के उत्तरार्ध में टोक्यो में चौथी जापान-भारत विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तरीय बैठक (2+2) और जापान-भारत रक्षा मंत्रियों की बैठक आयोजित करने की दिशा में चर्चा में तेजी लाने पर भी सहमति व्यक्त की।
बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बातचीत के दौरान भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र, मुक्त और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत और जापान की साझा प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।





