भारत के कुल कोयला आयात में अगस्त 2026 में 5.83 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह अगस्त 2025 के 111.05 मिलियन टन (एमटी) से घटकर 104.57 मिलियन टन रह गया, यानी 6.48 मिलियन टन की कमी आई। यह गिरावट घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने, उपलब्धता में सुधार करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए लगातार कोयला मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है। इन प्रयासों का उद्देश्य आयातित कोयले पर देश की निर्भरता कम करना है।
प्रमुख बिंदु
1. विद्युत क्षेत्र द्वारा कोयले के आयात में 6.39 प्रतिशत की गिरावट
विद्युत संयंत्रों द्वारा कोयले के आयात में 6.39 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह अगस्त 2025 के 22.77 मिलियन टन (एमटी) से घटकर अगस्त 2026 में 21.32 मिलियन टन रह गया। यह गिरावट घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ाने और घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में मिश्रण (ब्लेंडिंग) के लिए आयातित कोयले पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के अनुरूप है।
2. आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा आयात में मामूली वृद्धि
आयातित कोयला आधारित (आईसीबी) बिजली संयंत्रों द्वारा कोयले के आयात में मामूली 0.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह अगस्त 2025 के 18.13 मिलियन टन से बढ़कर अगस्त 2026 में 18.31 मिलियन टन हो गया। इन संयंत्रों को मुख्य रूप से आयातित कोयले से संचालित होने के लिए तैयार किया गया है।
3. घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में मिश्रण के लिए आयात में 35.23 प्रतिशत की गिरावट
घरेलू कोयला आधारित (डीसीबी) बिजली संयंत्रों में मिश्रण के लिए कोयले के आयात में 35.23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह अगस्त 2025 के 4.64 मिलियन टन से घटकर अगस्त 2026 में 3.00 मिलियन टन रह गया। यह कमी मिश्रण के लिए आयात की कम आवश्यकता को दर्शाती है और बिजली उत्पादन के लिए घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों के अनुरूप है।
4. कुल कोयला खपत में आयातित कोयले की हिस्सेदारी में गिरावट
भारत की कुल कोयला खपत में आयातित कोयले की हिस्सेदारी अगस्त 2025 के 21.20 प्रतिशत से घटकर अगस्त 2026 में 19.30 प्रतिशत रह गई। इस प्रकार इसमें 1.90 प्रतिशत अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यह इस महीने के दौरान आयातित कोयले पर देश की निर्भरता में कमी को दर्शाता है।
5. कोकिंग कोयले के आयात में 4.18 प्रतिशत की गिरावट
कोकिंग कोयले के आयात में 4.18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह अगस्त 2025 के 28.49 मिलियन टन (एमटी) से घटकर अगस्त 2026 में 27.30 मिलियन टन रह गया। कोकिंग कोयला इस्पात उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। देश में इसके घरेलू भंडारों की गुणवत्ता और विशेषताओं के कारण इसकी उपलब्धता सीमित बनी हुई है। इसलिए, इस श्रेणी में आयात की आवश्यकता इस्पात क्षेत्र की विशिष्ट कच्चे माल संबंधी जरूरतों से प्रभावित होती है।
घरेलू कोयला आपूर्ति को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास
कोयला मंत्रालय घरेलू कोयला उत्पादन और उठाने का कार्य बढ़ाने, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) को मजबूत करने, कोयला परिवहन अवसंरचना में सुधार करने तथा ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के भंडार के स्तर की बारीकी से निगरानी करने पर निरंतर ध्यान केन्द्रित कर रहा है।
विद्युत उपयोगिताओं को समय पर और पर्याप्त मात्रा में कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेल मंत्रालय, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और इसकी सहायक कंपनियों के साथ समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू कोयला आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाना, आयात पर अनावश्यक निर्भरता कम करना और देशभर में निर्बाध बिजली उत्पादन में सहयोग करना है।
कुल कोयला आयात में, विशेष रूप से घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में मिश्रण के लिए किए जाने वाले आयात में आई गिरावट, घरेलू उत्पादन, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी अवसंरचना को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित करती है। वहीं, आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों और इस्पात क्षेत्र द्वारा कोयले का आयात उनकी विशिष्ट ईंधन एवं कच्चे माल संबंधी आवश्यकताओं को दर्शाता है।
कोयला मंत्रालय घरेलू कोयला उत्पादन को और बढ़ाने, परिवहन एवं निकासी क्षमता में सुधार करने, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता को मजबूत करने तथा कोयले की गुणवत्ता के उचित प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य जहां तक संभव हो, आयात पर निर्भरता कम करना और साथ ही देश के विद्युत एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए कोयले की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करना है।





