रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने “जापान-भारत विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी” के अंतर्गत रक्षा सहयोग के निरंतर सुदृढ़ीकरण का स्वागत किया। इसमें रणनीतिक दृष्टिकोण साझा करने वाले दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों और सेवाओं के बीच सहयोग शामिल है और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के स्तंभों में से एक है।
जुलाई 2026 में दोनों देशों के नेताओं द्वारा जारी जापान-भारत संयुक्त वक्तव्य का स्मरण करते हुए, दोनों रक्षा मंत्रियों ने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को साकार करने के लिए अपने नेतृत्व में रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
दोनों मंत्रियों ने वैश्विक तनाव के इस दौर में दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा वातावरण के आकलन साझा करने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता और सुरक्षा में बाधा डालने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई के साथ-साथ बल या दबाव द्वारा यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध जताया।
दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक और प्रभावी ढंग से परिचालन सहयोग को परिपुष्ट करने पर सहमति व्यक्त की। तदनुसार, उन्होंने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए जापान और भारत के रक्षा मंत्रालयों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता ज्ञापन समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए एक प्रारूप प्रदान करता है। विशेष रूप से, इसमें जापान समुद्री आत्मरक्षा बल और भारतीय नौसेना के बीच सहयोग को मजबूत करना शामिल है, जिसमें समुद्री क्षेत्र जागरूकता (एमडीए) के क्षेत्र में सूचना साझा करना, साथ ही खोज और बचाव (एसएआर) और मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना शामिल है।
दोनों मंत्रियों ने नौसेना के जहाजों और इकाइयों के आपसी दौरों, संयुक्त अभ्यासों, कर्मियों और विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान एवं बंदरगाहों, रखरखाव और मरम्मत सुविधाओं के उपयोग सहित रसद संबंधी सहायता के माध्यम से समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए दोनों पक्षों के बीच समन्वय को मजबूत करने की पुष्टि की। ऐसा सहयोग न केवल जापान और भारत के लिए, बल्कि क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दोनों मंत्रियों ने रणनीतिक और परिचालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले ठोस समुद्री सुरक्षा सहयोग को शीघ्रता से पूरा करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने यह भी माना कि दोनों पक्षों को अपनी-अपनी संबंधित नीतियों के अनुसार, बारूदी सुरंगों को नष्ट करने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सामंजस्य को अधिकतम करना चाहिए और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमताओं का लाभ उठाते हुए नौसेना पोत निर्माण और डिजाइन में संयुक्त विकास की संभावनाओं का पता लगाना चाहिए। उन्होंने यह भी सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों को रक्षा पोत निर्माण और संबंधित क्षेत्रों में एक-दूसरे की शक्तियों का लाभ उठाना चाहिए और “मेक इन इंडिया” के ढांचे के अंतर्गत भारत की उत्पादन क्षमताओं के जापान द्वारा उपयोग पर गहन चर्चा करनी चाहिए। दोनों मंत्रियों ने निकट भविष्य में पोत मरम्मत समझौते को अंतिम रूप देने सहित, पारस्परिक पोत मरम्मत सुविधाओं के प्रावधान को आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।
दोनों मंत्रियों ने जापान और भारत द्वारा आयोजित द्विपक्षीय अभ्यासों के निरंतर विस्तार और गहनता का स्वागत किया, जिनमें जापान-भारत सेना अभ्यास ‘धर्म संरक्षक’ और जापान-भारत समुद्री अभ्यास “जिमेक्स” शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस वर्ष आयोजित होने वाले जापान-भारत वायु सेना अभ्यास “वीर गार्डियन 26” के समन्वय में हो रही निरंतर प्रगति का स्वागत किया, जिसके तहत जापान वायु आत्मरक्षा बल के लड़ाकू विमान पहली बार भारत आएंगे और अभ्यास में भाग लेंगे। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय अभ्यासों में सहयोग को और अधिक गहन बनाने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें जटिल अभ्यासों को बढ़ावा देना, मानवरहित प्रणालियों का एकीकरण करना और अवसर मिलने पर अल्प सूचना पर संयुक्त अभ्यास करना शामिल है।
दोनों देशों की सैन्य सेवाओं के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाने के उद्देश्य से, दोनों मंत्रियों ने अपने-अपने विशेष अभियान बलों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और भारत की एकीकृत थिएटर कमानों की स्थापना के बाद उनके साथ सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए जापान द्वारा हाल ही में किए गए प्रारूप की समीक्षा का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र और व्यापक विश्व में शांति एवं स्थिरता में और अधिक योगदान देगा। उन्होंने विशेष रूप से दोनों देशों के बीच रक्षा एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की आशा व्यक्त की।
दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि जहाज पर तैनात यूनिकॉर्न एकीकृत संचार एंटीना प्रणाली से संबंधित यह परियोजना, दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों के हस्तांतरण की पहली परियोजना होने के नाते, रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में जापान और भारत के बीच बढ़ते सहयोग का प्रतीक है। दोनों मंत्रियों के नेतृत्व में, उन्होंने परियोजना को शीघ्र साकार करने की दिशा में संयुक्त रूप से कार्य करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अन्य परियोजनाओं को साकार करने के उद्देश्य से, उन्होंने परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के बारे में दोनों देशों की संबंधित सेनाओं के बीच चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों मंत्रियों ने अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में डीआरडीओ और एटीएलए के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दोनों मंत्रियों ने रक्षा उद्योग मंच आयोजित करने की अपनी इच्छा की भी पुष्टि की।
दोनों मंत्रियों ने जापान, भारत और इंडोनेशिया की भागीदारी वाले पहले त्रिपक्षीय नौसैनिक पैसेज एक्सरसाइज का स्वागत किया, जो इस वर्ष फरवरी में आयोजित किया गया था। हिंद-प्रशांत क्षेत्र का व्यापक परिप्रेक्ष्य प्राप्त करने और क्षेत्र तथा विश्व में शांति एवं स्थिरता में संयुक्त रूप से योगदान देने के उद्देश्य से, उन्होंने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान, अभ्यासों और अन्य प्रासंगिक पहलों के माध्यम से तीसरे देशों के साथ सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों मंत्रियों ने प्राकृतिक आपदा की स्थिति में साझेदार देशों को कर्मियों और आपूर्ति के परिवहन के माध्यम से सहायता प्रदान करने हेतु इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (आईपीएलएन) के माध्यम से सहयोग को और बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने इस बात का भी स्वागत किया कि आईपीएलएन का दूसरा टेबलटॉप अभ्यास इस वर्ष सितंबर में जापान के रक्षा मंत्रालय में आयोजित किया जाएगा।
जुलाई 2026 में दोनों देशों के नेताओं द्वारा जारी जापान-भारत संयुक्त वक्तव्य में निर्धारित दिशा-निर्देशों का स्मरण करते हुए, दोनों मंत्रियों ने इस वर्ष टोक्यो में चौथी जापान-भारत विदेश और रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक (“2+2”) आयोजित करने की दिशा में चर्चा में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों मंत्रियों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि जापान और भारत दोनों देशों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, आवश्यकता पड़ने पर परामर्श करेंगे।
दोनों मंत्रियों ने महानिदेशक/संयुक्त सचिव स्तर के नेतृत्व में एक कार्य समूह की स्थापना पर सहमति व्यक्त की, जिसका उद्देश्य परिचालन, खुफिया, उपकरण, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षेत्रों में एकीकृत सहयोग को बढ़ावा देना है, साथ ही प्रत्येक देश की संबंधित नीतियों और संप्रभु विकल्पों का पूर्ण सम्मान करना है। यह कार्य समूह दोनों मंत्रियों द्वारा स्वीकृत सहयोग की दिशाओं के लिए समग्र समन्वय प्रदान करेगा, सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल को अधिकतम करेगा और उनके कार्यान्वयन में तेजी लाएगा।
बैठक से पहले, रक्षा मंत्री कोइज़ुमी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारत के शहीद नायकों को श्रद्धांजलि दी और उनका स्वागत तीनों सेनाओं के गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। रक्षा मंत्री कोइज़ुमी ने मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान (डब्ल्यूएनसी) और आईएनएस चेन्नई का भी दौरा किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की समिति ने आज…
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज इटानगर में अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज रेल मंत्रालय…
अत्याधुनिक महासागर अनुसंधान पोत (यार्ड 3041), जिसका आधिकारिक नाम ओआरवी सागर मंथन है, को आज…
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष श्री राजेश वर्मा की अध्यक्षता में 8 सितंबर…
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात…