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एम्स नई दिल्ली और समीर ने चिकित्सा इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी में नवाचार को बढ़ाने के लिए महत्‍वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के परमाणु चुंबकीय अनुनाद (एनएमआर) विभाग के 32वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (समीर) और (एम्स) ने चिकित्सा उपकरणों पर सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर समीर और एम्स, नई दिल्ली के बीच हस्ताक्षर किए गए हैं, ताकि दोनों संस्थान उच्च क्षेत्र/निम्न क्षेत्र चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई)/परमाणु चुंबकीय अनुनाद (एनएमआर) प्रणालियों को विकसित करने और चिकित्सा अनुप्रयोगों के लिए रेडियो आवृत्ति, आरएफ, माइक्रोवेव प्रणालियों और संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सहयोगात्मक रूप से काम कर सकें।

इस समझौता ज्ञापन में पांच प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:

  1. चिकित्सा उपकरणों के विकास में सहयोगात्मक अनुसंधान।
  2. समीर, मुंबई द्वारा विकसित स्वदेशी 1.5 टी एमआरआई प्रणाली का नैदानिक ​​सत्यापन।
  3. तस्‍वीर संवर्द्धन और त्वरित इमेजिंग के लिए एआई/एमएल में सहयोगात्मक अनुसंधान।
  4. उच्च/निम्न क्षेत्र एमआरआई स्कैनर के उप-प्रणालियों का डिजाइन और विकास।
  5. उच्च क्षेत्र जीव एमआरआई स्कैनर के लिए आरएफ उप-प्रणालियों का विकास।

एमआरआई प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की आत्‍मनिर्भरता को मजबूती मिली

स्वदेशी चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (आईएमआरआई) को इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा प्रायोजित किया गया है। इसे नोडल एजेंसी के रूप में समीर, मुंबई और सहयोगी एजेंसियों के रूप में सी-डैक (त्रिवेंद्रम), सी-डैक (कोलकाता), आईयूएसी (नई दिल्ली), डीएसआई-एमआईआरसी (बैंगलोर) में लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य चिकित्सा इमेजिंग के लिए स्वदेशी 1.5 टेस्ला एमआरआई प्रणाली को डिजाइन, विकसित और परीक्षण करना है।

इस उद्देश्य के अनुसार, आरएफ पावर एम्पलीफायर, हाई पावर टी/आर स्विच, आरएफ स्पेक्ट्रोमीटर, आरएफ कॉइल, आरएक्स। फ्रंट एंड, कंट्रोल यूनिट, काउच, आईएमआरआई सॉफ्टवेयर का सबसिस्टम विकास और परीक्षण पूरा हो चुका है और खरीदे गए चुंबक, ग्रेडिएंट कॉइल और ग्रेडिएंट एम्पलीफायर के साथ एकीकृत किया गया है। इस दिशा में जीवों पर परीक्षण पूरे हो चुके हैं। सुपरकंडक्टिंग घटकों, क्वेंच प्रोटेक्शन सिस्टम, हीलियम क्रायोस्टेट, मैग्नेट रैंपिंग यूनिट, इमरजेंसी रन डाउन यूनिट, फास्ट डेटा एक्विजिशन यूनिट और अन्य कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स आदि सहित स्वदेशी 1.5 टेस्ला मैग्नेट का विकास किया गया है और मैग्नेट को 1.5 टेस्ला तक रैंप किया गया है। अंतिम क्रायोटेस्टिंग चल रही है और जल्द ही इसे बाकी स्वदेशी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के साथ एकीकृत किया जाएगा। ईओआई प्रक्रिया के माध्यम से इसके विकास को आगे बढ़ाने के लिए 7 कंपनियों को लगाया गया है। इस दिशा में एम्स के साथ समझौता ज्ञापन नैदानिक ​​​​सत्यापन करने की सुविधा प्रदान करेगा और एमआरआई प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर बनने की भारत की यात्रा को आगे बढ़ाएगा।

एम्स, नई दिल्ली के निदेशक डॉ एम श्रीनिवास ने इस अवसर पर देश की क्षमताओं को प्रदर्शित करने के महत्व पर प्रकाश डाला और चिकित्‍सकों एवं वैज्ञानिकों के बीच में मिलकर काम करने की आवश्‍यकता पर बल देते हुए एम्‍स की ओर से बेहतर चिकित्‍सा उपकरणों के विकास में पूर्ण समर्थन का आश्‍वासन दिया।

इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की समूह समन्वयक अनुसंधान एवं विकास सुनीता वर्मा ने अपने वक्तव्य में सह-निर्माण पर जोर दिया ताकि भारत न केवल घरेलू मांग को पूरा करने बल्कि देश के लोगों की सेवा करने के लिए चिकित्सा उपकरणों सहित किफायती और स्वदेशी स्वास्थ्य समाधान विकसित करने में एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकें।

इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, आईएएस अभिषेक सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में बताया कि साझेदारी देश में चिकित्सा उपकरण तंत्र को सक्षम करेगी। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान केंद्रित करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने और एआई मिशन के विवरण को आत्‍मसात करने के लिए देश की तैयारियों को साझा किया। उन्होंने एम्‍स के साथ साझेदारी कर स्वदेशी चिकित्सा उपकरण विकसित करने की समीर की क्षमताओं और संभावनाओं का समर्थन किया।

समीर के महानिदेशक डॉ. पीएच राव ने चिकित्सा उपकरणों पर विशेष ध्यान देने के साथ समीर में की गई विस्तृत शोध गतिविधियों को साझा किया और एमआईआई, लिनेक, एक्स-रे आधारित रक्त विकिरण आदि जैसे विकास को विस्तार से साझा किया।

यह समझौता ज्ञापन अभिषेक सिंह, अपर सचिव एमईआईटीवाई, सुनीता वर्मा, जी.सी. एवं वैज्ञानिक जी, एमईआईटीवाई, राजेश हर्ष, कार्यक्रम निदेशक, समीर, जय वर्धन तिवारी, वैज्ञानिक ई., एमईआईटीवाई और प्रो. रामा जयसुंदर, विभागाध्यक्ष, एनएमआर विभाग, एम्स, नई दिल्ली तथा अन्य गणमान्य व्‍यक्तियों की उपस्थिति में किया गया।

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